Friday, November 27, 2020
Home Hindi वन्स अपॉन ऐ टाइम इन मुंबई ...नाउ इन उत्तर प्रदेश!

वन्स अपॉन ऐ टाइम इन मुंबई …नाउ इन उत्तर प्रदेश!

Also Read

समुद्रतट पर बसा मुंबई शहर 14 जून 2020 की दुपहर एक असामान्य पहचान के संकट में डूब गया। अरब सागर के साथ साथ फैले इस शहर की पहचान सपनो को साकार करने वाली माया नगरी की थी। लाखो लोग हर रोज़ अपनी प्रतिभा को पहचान दिलाने इस अलग सी दुनिया में कदम रखते है। ऐसा ही एक लड़का सुशांत सिंह राजपूत कुछ साल पहले बिना किसी को कुछ बताये चुप चाप इस शहर में आया। नाम कमाया पैसा कमाया अपनी पहचान बनायीं और अचानक एक दिन बिना किसी को कुछ भी बताये चुपचाप इस दुनिया को छोड़ कर चला गया।

सुशांत का जाना एक सामान्य घटना नहीं थी। ना ही सामान्य रह गया है मुंबई का नाम जो कभी सितारों की चमक से चकाचौंध रहता था। सफेद पोशो की काली दुनिया के कई काले कारनामे परत दर परत खुल कर सामने आने लगे। इस रस्सा कस्सी में या यूँ कहे की सुशांत को न्याय दिलवाने की लड़ाई में एक चीज़ जो सबको समझ आयी वो है झूठे क्षेत्रीय अभिमान के नाम पर बिहार यूपी या किसी भी अन्य राज्य के मूल निवासी का अपमान। स्वाभिमान और अभिमान के ये लड़ाई लम्बी खींचती चली गयी। हालाँकि अगर इतिहास के पन्नो को पलटा जाए तो पाएंगे की यह समस्या हमेशा ही रही है। जब भी किसी उत्तर भारतीय ने किसी भी मनमानी को मानने से इंकार किया है, क्षेत्रीय धौस दिखा कर उसकी बेइज़्ज़ती की गयी है। सिवाय कड़ी निंदा के इस मामले पर कुछ भी नहीं किया गया।

उत्तर प्रदेश शासन ने इन स्वाभिमान हनन के प्रयासों को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश हर मामले को गंभीरता से लेने और सख्त कदम उठाने के लिए जाने जाते है। लॉकडाउन के समय भी प्रवासियों, छात्रों एवं अन्य निवासियों को राज्य में वापस लाने की सुचारु व्यवस्था की गयी। मजदूरो के पुनर्वासन एवं प्रदेश में ही रोज़गार देने के लिए प्रभावी ढंग से काम किया गया। मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी ने लॉकडाउन में अपनी छवि एक प्रभावी और जनता के भरोसे पर खरा उतरने वाले शासक के रूप में स्थापित की है।
अब बारी फ़िल्मी दुनिया की थी। फ़िल्मी दुनिया के लोग अपने लिए नयी ज़मीन तलाश रहे थे। यहाँ भी संकट मोचक के रूप में योगी जी सामने आये। त्वरित कार्यवाही करते हुए उत्तर प्रदेश के जनपद गौतम बुद्ध नगर में देश की सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने की घोषणा की गयी है। गौतम बुद्ध नगर अपने विकसित एवं आधुनिक संस्कृति के लिए जाना जाता है। फिल्म सिटी का बनना उन कलाकारों के लिए एक वरदान है जिनकी प्रतिभा मुंबई की भीड़ में दब जाती थी या प्रभावी लोगो द्वारा दबा दी जाती थी। उत्तर प्रदेश की फिल्म सिटी भोजपुरी जैसी क्षेत्रीय भाषाओ की फिल्मो के निर्माण के लिए भी एक पुनर्जन्म जैसा है। यह परियोजना एक बृहद स्तर पर रोजगार भी प्रदान करेगी।
संकल्प अगर दृढ हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं। जिन लोगो ने जीवन के कठिनतम संघर्षो को पार पाते हुए मुंबई में सफलता हासिल की वो भी इस बात को असंभव मानते होंगे की उत्तर प्रदेश में कभी फिल्मो का निर्माण होगा। लेकिन एक मजबूत इरादों वाले नेतृव्त ने इस असंभव को भी संभव कर दिया है।

सुशांत सिंह राजपूत एक नेकदिल वक्तित्व और संवेदनशील ह्रदय वाले सौम्य कलाकार थे। कई जिंदगियों को उन्होंने प्रभावित किया। उनके कई दोस्त बताते है कैसे सुशांत ने उनकी सोंच को सकारात्मक आयाम दिए। आज सुशांत हमारे बीच नहीं है पर जब जब उत्तर प्रदेश फिल्म सिटी की बात की जाएगी सुशांत सिंह राजपूत का नाम स्वतः ही सबको याद आएगा। मेरी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से सविनय निवेदन है की प्रस्तावित फिल्म सिटी में सुशांत के नाम पर कुछ न कुछ जरूर बनाया जाए।

जिस महफ़िल ने ठुकराया हमको क्यों उस महफ़िल को याद करे आगे लम्हे बुला रहे है आओ उनके साथ चले
~ सुशांत सिंह राजपूत in PK

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

Latest News

26/11 : संघ और हिंदूओं को बदनाम करने के लिए कांग्रेस का सबसे घटिया प्रयास

Hinduism is a complex, inclusive, liberal, tolerant, open and multi-faceted socio-spiritual system of India called “Dharma”. Due to its innumerable divergences, Hinduism has no concept of ‘Apostasy’.

Hinduism: Why non-Hindus can’t comprehend

Hinduism is a complex, inclusive, liberal, tolerant, open and multi-faceted socio-spiritual system of India called “Dharma”. Due to its innumerable divergences, Hinduism has no concept of ‘Apostasy’.

आओ तेजस्विनी, प्रेम की बात करें

इसे लव जिहाद कहा जाये या कुछ और किन्तु सच यही है कि लड़कियों के धर्म परिवर्तन के लिए प्रेम का ढोंग किया जा रहा है और उसमें असफलता मिलने पर उनकी हत्या।

दाऊद लौटेगा भारत – कहा पैंसठ साल का और सीनियर सिटीजन होने के कारण पुलिस उसे नहीं पकड़ सकती

दाऊद को लगता है कि पैंसठ की उम्र और वरिष्ठ नागिरक बनने के बाद भारत के GO और लिबरल्स उसके लिए सरकार से लड़ेंगे और उसे जेल में एक दिन भी नहीं रहना पड़ेगा।

Migration and job creation

Here is reason- why migration is a way to job but one should attempt it only when there is no second option.

Which way do I move? Purpose of Rashtra

Civilization is such a grand machine in which input is a new born baby and output is the enlightened one.

Recently Popular

गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

The story of Lord Jagannath and Krishna’s heart

But do we really know the significance of this temple and the story behind the incomplete idols of Lord Jagannath, Lord Balabhadra and Maa Shubhadra?

What is the base of my thought process?politics

Connection amongst writing, thinking, reading and seeing.

The Bose who Illuminated the Constitution of India

The University of Calcutta honored him with the honorary D. Litt for his contribution towards the field of art in the year 1957.