Tuesday, March 9, 2021
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bibhutisrivastava

मोदी विरोध का मानसिक पतन

किसान बिल या विरोध को समझने के लिए चार नामों में गीता कही बेहतर शिक्षित, तार्किक, व्यवस्थित और सक्षम है। परन्तु बंजारों की पसंद मिया खलीफा, रीरी और ग्रेटा है। कारण स्पष्ट है, पहले तीन नाम बंजारों को समर्थन देने वाले है।

तां ड व !

OTT पर वेब सीरीज के नाम पर सेक्स, गालिया और नग्नता परोसी जाती ये तो हम सब जानते है। पर शायद पहली बार समाज...

शांत कश्मीर और चिदंबरम का 370 वाला तीर

डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के सबसे शक्तिशाली मंत्रियो में से एक चिदंबरम आज वही भाषा बोल रहे है जो पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर बोलता आया है। चिदंबरम यही नहीं रुके उन्होंने अलगाववादियों को भी महत्व देने की बात कही है।

मिले न मिले हम- स्टारिंग चिराग पासवान

आज के परिपेक्ष्य में बिहार का चुनाव कई मायनो में अलग है। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पारम्परिक राजनीती वाली रणनीति का अनुसरण कर रहे है तो वही युवा चिराग और तेजस्वी विरासती जनाधार को नए भविष्य का सपना दिखने का प्रयास कर रहे है।

दलित!

विलुप्त होती कांग्रेस के लिए दलित सम्मान के ऐसे मौके शायद सिर्फ राजनीतिक जरूरत हैं। दलित सशक्तिकरण का कोई उदाहरण मुझे तो याद नही आता।

नेता, पत्रकार और हाथरस वाला परिवार!

कई ऐसे उदहारण है जो बताते है की राज्य सरकार बहिन बेटियों या माँओ के खिलाफ होने वाले अपराधों को नियंत्रीत करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे है। अतः सरकार की नियत पर संदेह करना राजनितिक ही हो सकता है व्यवहारिक नहीं।

गाँधी हाथरस में!

महात्मा ने इस बार अपना जन्मदिन ना मनाने का फैसला किया है। वो विगत कुछ दिनों से होने वाले महिला अत्याचारों से व्यथित हैं। उनका सबसे बड़ा दुुुख न्याय का घुुुट घुुुट कर दम तोड़ देेंना है।

बिहार में का बा

ये एक ऐसा सवाल है जो चुनाव ख़त्म होने के बाद अगले पांच साल हम जरुर पूछते है पर जब वोट डालने का समय आता है तब हम बिहार को भूल कर जातिवाद जैसे विभाजनकारी मानसिकता को चुन लेते है। इस मानसिकता को बदले बिना हम बिहार के विकास की कल्पना भी नहीं कर सकते।

किसान, फसल और राजनितिक दखल

मोदी सरकार कृषि बिल 2020 ले कर आयी है। यह कानून हमारे कृषि प्रधान देश के किसानो को सशक्त बनाता है। इस बिल में उनकी समसयाओ के व्यवहारिक समाधानों का प्रावधान है। परन्तु यह दुर्भाग्यपूर्ण है की राजनितिक स्वार्थ के लिए किसानो को भड़काया जा रहा है।

वन्स अपॉन ऐ टाइम इन मुंबई …नाउ इन उत्तर प्रदेश!

आज सुशांत हमारे बीच नहीं है पर जब जब उत्तर प्रदेश फिल्म सिटी की बात की जाएगी सुशांत सिंह राजपूत का नाम स्वतः ही सबको याद आएगा। मेरी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से सविनय निवेदन है की प्रस्तावित फिल्म सिटी में सुशांत के नाम पर कुछ न कुछ जरूर बनाया जाए।

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