Home Hindi राम के आदर्शों का अनुकरण कर हम भी राम बन सकते हैं

राम के आदर्शों का अनुकरण कर हम भी राम बन सकते हैं

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राम के आदर्शों का अनुकरण कर हम भी राम बन सकते हैं

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से हम सभी परिचित हैं, उनके जीवन के विविध प्रसंगों का हमने रामकथा, रामचरित मानस पाठ व रामायण आदि किसी न किसी माध्यम से अध्ययन, श्रवण एवं चलचित्र व उनकी लीलाओं का मंचन आदि के माध्यम से दर्शन किया है।देश की जनता जनार्दन की इच्छा एवं मांग पर भारत सरकार द्वारा दूरदर्शन पर रामायण के पुनः प्रसारण की व्यवस्था की गई, साथ ही अन्य प्रेरक धारावाहिकों का पुनः प्रसारण प्रारम्भ किया गया है, जो इन लॉक डाउन के दिनों में नियमित रूप से जारी है।

विविध रिपोर्टों, समाचारों एवं टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों ने रामायण के पुनः प्रसारण को ऐतिहासिक बताया है, क्योंकि भारी संख्या में लोग बहुत ही मनोयोग के साथ इस धारावाहिक का सपरिवार दर्शन कर रहे हैं। प्रभु श्रीराम का पूरा जीवन ही संघर्ष, मेहनत, साहस, करुणा, प्रेम, विनम्रता, दयालुता एवं कष्टों आदि से भरा हुआ है। प्रभु श्रीराम ने संघर्षो, कष्टों एवं राजपरिवार से होने के बाद भी सभी प्रकार की मर्यादाओं व अनुशासन का पालन कर न सिर्फ समाज के समक्ष एक आदर्श उपस्थित किया, बल्कि सुशासन एवं रामराज्य की जो व्यवस्था अपने नागरिकों को दी, वह आज भी प्रासंगिक एवं लोकप्रिय है, आज भी उनके सुशासन व राज्य की चर्चा पूरी दुनिया मे चहुंओर होती है।

प्रभु श्रीराम ने अपने सम्पूर्ण जीवन के प्रत्येक प्रसंग से समाज व समाज के लोगों के समक्ष यही संदेश देने का प्रयास किया है कि हम भी अपने जीवन मे मर्यादाओं, अनुशासन, सदाचरण, सद्मार्ग, सद्बुद्धि, साहस, विनम्रता व प्रेम आदि के मार्ग पर चलकर राम की भांति ही हो सकते हैं एवं समाज के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं, लोगों को अपने जीवन से प्रेरित कर सकते हैं। प्रभु श्रीराम के जीवन को, उनके आचरण को, उनके अनुशासन को, उनके आदर्शों को, उनकी प्रेरणाओं को, उनके गुणों का हम सब यदि अपने जीवन मे शतांश भी अनुकरण कर लें, तो हमारा जीवन धन्य और दूसरों के लिए आदर्श बन सकता है, जिस रामराज्य व सुशासन की हम कल्पना हम अपने अंतःकरण में आज करते हैं, उसे साकार करने में भी हम अपने जीवन मे अवश्य सफल हो पाएंगे और प्रभु श्रीरामचंद्र जी के विषय मे हमारा अध्ययन, श्रवण व दर्शन भी सार्थक हो सकेगा।

श्रीराम जय राम जय जय राम।
रघुपति राघव राजाराम।।

तीर्थराज सिंह

छात्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।

प्रयागराज।।

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