Tuesday, November 29, 2022
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AMU: अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी या आतंकी मुस्लिम यूनिवर्सिटी?

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AKASH
AKASH
दर्शनशास्त्र स्नातक, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी परास्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय PhD, लखनऊ विश्वविद्यालय

सर सैयद अहमद खां ने AMU की स्थपना अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के तौर पर की थी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनकी आगे आने वाली पीढियां उसको आतंकी मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बदल देंगी।

एक तरफ पूरा देश पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों की शहादत को याद कर रहा था वहीँ दूसरी तरफ आतंकी मुस्लिम यूनिवर्सिटी का छात्र बसीम हिलाल अपने आतंकी बाप को बधाई देने में जुटा था। अपने ट्विटर अकाउंट पर उसने अपने आपको गणित का विद्यार्थी बताया था। इसने अपने ट्वीट में लिखा था How the Jaish यह सीधे तौर पर भारत के विरोध को प्रदर्शित करता है। शायद उसे याद नहीं होगा यह वही जैश है, जिसने इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली। यह वही जैश है जिसने लोकतंत्र के मंदिर को नेस्तानाबूत करने की साजिश 2001 में रची थी। हाँ, यह वही जैश है जिसका मुखिया मसूद अजहर है जिसे 1994 में गिरफ्तार किया गया था। पांच साल बाद कंधार विमान अपहरण में 180 लोगों को बचाने के लिए छोड़ा गया था। जिसके बाद इसने 2000 में जैश ए मोहम्मद की स्थापना की।

जैश के बड़े हमलों में उरी का आतंकी हमला, पठानकोट एयरबेस पर हमला। सबसे बड़ा जिसे मानवता कभी भुला नहीं पायेगी वह हमला था 26/11 का मुंबई हमला जिसमे 166 मासूम निहत्थे लोगों को इसके मुजाहिदीनों ने मौत की नींद सुला दिया था। जैश का अर्थ है सेना मतलब मोहम्मद की सेना। क्या इस्लाम के रक्षक मोहम्मद यही चाहते थे कि उनकी सेना निर्दोष लोगों की हत्या करे? और अगर वो यही चाहते थे हमें ऐसे रोल मॉडल के विषय में सोचना होगा। उस पंथ का कहना ही क्या जिसमे लोगों को काफ़िर बोला जाता है, लोगों को कुरान जबरन पढवाया जाता है, लोगों को प्यार के जाल में फ़ांस कर रेप कर छोड़ दिया जाता है, बच्चे गिरवाए जाते हैं, अपने मुजाहिदीनों को लड़कियों को फंसाकर लव जिहाद करवाया जाता है।

क्या किसी भी पंथ और धर्म का मर्म किसी की हत्या करवाना है?

ऐसा इस आतंक की यूनिवर्सिटी में पहली बार नहीं हुआ है। आतंक के इस गढ़ से मन्नान वानी नामक आतंकी भी पैदा हुआ है जिसकी मौत पर वहां के छात्रों ने रैली निकाली और आजादी के नारे लगाये और मन्नान वानी का नमाज-ए-जनाजा पढ़ा गया था। भोपाल उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट में भी AMU से पढ़े सैयद मीर हुसैन और आतिस मुजफ्फर का नाम शामिल था। उरी हमले पर AMU से श्रीनगर के छात्र मुदस्सर युसूफ ने फेसबुक पर लिखा था “17 Indian army men have been killed by those who have been made terrorists by the (Indian) army itself”. आतंक की यह यूनिवर्सिटी अरसे से आतंकियों की पौध खड़ी कर रही है। जब पूरा देश इंदिरा के खिलाफ एकजुट था उसकी तानाशाही का विरोध कर रहा था तब यहाँ से सिमी (Student Islamic Movement in India) खड़ा हो रहा था।

सिमी मुस्लिम ब्रदरहुड की Allah is our Lord, Quran is our Constitution, Mohammad is our leader, Jihad is our way, Shahadat is our desire’ की विचारधारा को मानने वाले थे।  पहले यह मुस्लिमों की भलाई के बना संगठन था लेकिन अंदरूनी तौर पर वह गजवा-ए-हिन्द की तैयारी कर रहे थे। जो 2000 के बाद उनके मूवमेंट में साफ दिखाई देता है 2013 में जब अफजल गुरु को फांसी पर लटकाया गया तब भी अलीगढ के छात्रों ने नारे लगाये थे justice hanged. मध्य प्रदेश में जब सिमी के आतंकियों का एनकाउंटर किया गया तब भी वहां के छात्र एक हो गये थे साथ ही वहां के छात्रसंघ अध्यक्ष ने इस एनकाउंटर की जाँच की मांग कर दी।

क्या कारण है भारत विरोधी नारे हमेशा मुस्लिम बाहुल्य स्थानों पर पर ही लगाये जाते हैं? क्या कारण है कि अलीगढ इन आतंकियों का अड्डा बन बैठा है? क्या वहां का प्रोक्टर छात्रों पर नजर नहीं रखता या वह भी इन घटनाओं में शामिल है?

हमें इन सभी प्रश्नों का जबाव मांगना होगा, सरकार से, प्रशासन से छात्रों से ऐसी मांग उठाने वाले परिवारों से?

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दर्शनशास्त्र स्नातक, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी परास्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय PhD, लखनऊ विश्वविद्यालय
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