Sunday, January 24, 2021
Home Hindi क्यों न फिर से निर्भर हो जाए

क्यों न फिर से निर्भर हो जाए

Also Read

डॉ नीलम महेंद्रhttp://drneelammahendra.blogspot.in/
Writer. Taking a small step to bring positiveness in moral and social values.

आज की दुनिया में हर किसी के लिए आत्मनिर्भर होना बहुत आवश्यक माना जाता है। स्त्रियाँ भी स्वावलंबी होना पसंद कर रही हैं और माता पिता के रूप में हम अपने बच्चों को भी आत्मनिर्भर होना सिखा रहे हैं।

इसी कड़ी में आज के इस बदलते परिवेश में हम लोग प्लैनिंग पर भी बहुत जोर देते हैं। हम लोगों के अधितर काम प्लैनड अर्थात पूर्व नियोजित होते हैं। अपने भविष्य के प्रति भी काफी सचेत रहते हैं इसलिए अपने बुढ़ापे की प्लैनिंग भी इस प्रकार करते हैं कि बुढ़ापे में हमें अपने बच्चों पर निर्भर नहीं रहना पड़े। यह आत्मनिर्भरता का भाव अगर केवल आर्थिक आवश्यकताओं तक सीमित हो तो ठीक है लेकिन क्या हम भावनात्मक रूप से भी आत्मनिर्भर हो सकते हैं?

क्या हमने कभी रुक कर सोचा या फिर पलट कर स्वयं से यह सवाल किया कि क्यों हम अपने बच्चों पर निर्भर नहीं होना चाहते? सम्पूर्ण जीवन जिस परिवार को सींचने में लगा दिया उसे एक पौधे से वृक्ष बना दिया और जब उस वृक्ष की शाखाओं में लगे फलों का आनंद लेने का समय आए तो आत्मनिर्भरता का राग क्यों गाया जाता है?

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अपने भोजन कपड़े मकान इलाज आदि जीवन की हर छोटी बड़ी चीज़ के लिए हम एक दूसरे पर निर्भर रहते ही हैं। केवल मनुष्य ही क्यों सम्पूर्ण सृष्टि जीव और जड़ जगत एक दूसरे पर निर्भर है तो फिर अपने ही बच्चों से यह दूरी क्यों?

आज क्यों हम अपने बच्चों से अपेक्षा नहीं करना चाहते? जिस बच्चे को हमने अँगुली पकड़ कर बचपन में चलना सिखाया क्यों बुढ़ापे में हम उसकी अँगुली की अपेक्षा न करें?

हमारा समाज जिसकी नींव परिवार की यही शक्ति थी हम सभी क्यों उसे खत्म करने पर तुले हैं? हम सभी किस घमंड में जी रहे हैं?

यह तो प्रकृति का चक्र है बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापा प्रकृति के इस नियम को हम सहजता के साथ स्वीकार क्यों नहीं करते ? जब हम सभी को एक दुसरे की जरूरत है तो इसे मानते क्यों नहीं?

आज क्यों हम और हमारे बच्चे दोनों इस बात को स्वीकार करने में संकोच करते हैं कि जिस प्रकार बचपन में एक बालक को माता पिता की आवश्यकता होती है उसी प्रकार औलाद माता पिता की बुढ़ापे की लाठी होती है?

क्यों हम इस सच्चाई से मुँह छिपाते हैं कि बुढ़ापा तो क्या जीवन का कोई भी पड़ाव केवल पैसों के सहारे नहीं गुजारा जा सकता?
क्यों हम अपने बच्चों को बचपन से ही परिवार की मजबूत डोर से बाँध कर रखने में असफल हो रहे हैं?
क्यों माता पिता बच्चों से और बच्चे माता पिता से दूर होते जा रहे हैं?
क्यों आज संयुक्त परिवार तो छोड़िये एकल परिवार भी टूटते जा रहे हैं?
जरा एक पल रुक कर सोचिए तो सही कि यह भौतिकवादी संस्कृति हमें कहाँ लेकर जा रही है?
क्यों हमारे समाज में जहाँ समाज और परिवार एक दूसरे के पूरक थे आज उन दोनों के बिखराव को झूलाघरों एवं वृद्धाश्रमों द्वारा पूरा किया जा रहा है?

शायद इन सभी सवालों के जबाव इन सवालों में ही है।

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

डॉ नीलम महेंद्रhttp://drneelammahendra.blogspot.in/
Writer. Taking a small step to bring positiveness in moral and social values.

Latest News

The historic and hopeful January 20, 2021

Let January 20 serve as a stark reminder for the world at large that the democracy may have been halted temporarily but it has returned with greater hope and not fear.

खालसा पंथ की सिरजना के पीछे का ध्येय और गुरु गोबिंद सिंह जी

गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित खालसा पंथ और उनकी बलिदानी परंपरा के महात्म्य को समझने के लिए हमें तत्कालीन धार्मिक-सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों पर विचार करना होगा।

कश्मीरी हिन्दूओ का नरसंहार और 31 साल का इंतजार

19 जनवरी 1990 का वो दिन कोई भी कश्मीरी हिन्दू कभी नहीं भूल सकता। 19 जनवरी 1990 का वो दिन न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक काला दिन है।

धार्मिक आतंकवाद

समाज का एक धड़ा है जो कि शकुनि और मंथरा से भी लाखों गुना कपटी और क्रूर है, जो धर्मनिपेक्षता, उदारवादिता और बुद्धिजीविता का नक़ली मुखौटा लगाये आपकी मानकिसकता पर क़ब्ज़ा कर आपके आत्मसम्मान और पहचान को अपंग बनाये बैठा है।

Tale of India’s greatest test victory in Australia

Finally the Indian flag hung around one of the unbreached fortresses at Gabba. The haughtiness which Australians displayed on the field was put down to dust by fearless Indians.

USA is now a constitutional relic & not a republic

All the founders of the US Constitution and even our own framers from the Constituent Assembly must be squirming in their graves, on what is playing out in the US.

Recently Popular

Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.

गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

5 Cases where True Indology exposed Audrey Truschke

Her claims have been busted, but she continues to peddle her agenda

Girija Tickoo murder: Kashmir’s forgotten tragedy

her dead body was found roadside in an extremely horrible condition, the post-mortem reported that she was brutally gang-raped, sodomized, horribly tortured and cut into two halves using a mechanical saw while she was still alive.

The story of Lord Jagannath and Krishna’s heart

But do we really know the significance of this temple and the story behind the incomplete idols of Lord Jagannath, Lord Balabhadra and Maa Shubhadra?