Wednesday, October 20, 2021
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जय भीम

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मैं कोई ब्लॉगर या लेखक नहीं हूँ लेकिन अंबेडकर जयंती है और सब कुछ ना कुछ लिख बोल रहे हैं तो मैने सोचा मैं भी हाथ पाँव मार लूँ, कोई शीर्षक नहीं सूझा तो ‘जय भीम’ लिख के काम चला दिया। लिखने के लिए कलम उठाई तो ध्यान आया फ़ोन में टाईप करना है कलम नहीं की-पैड उठाना चाहिए। उठने-उठाने की बात से याद आया कि आज मैं ज़ल्दी उठ गया था, आदरणीय राहुल के शब्दों में कहूँ ‘this morning i got up at night’ क्योंकि कन्याभोज करवाना था माँ सुबह सुबह ही दहाड़ने लग गई थी।

चलो मुद्दे पर आते हैं, अंबेडकर को सामान्य जनमानस ने कभी समझा ही नहीं या यूँ कहे कि समझने दिया ही नहीं गया। दलित-गैर दलित, नीला झंडा लाल झंडा आदि में ही उलझाए रखा। हमें पूरी ज़िंदगी स्कूल में नेहरू का समाजवाद, गाँधी का समाजवाद, लोहिया का समाजवाद और साम्यवाद ही पढ़ाया जाता रहा कभी किसी ने अंबेडकर का पूँजीवाद नहीं पढ़ाया। जब गाँधी ने कहा ‘भारत गाँवों का देश है’ तो अंबेडकर ने जवाब दिया ‘तो क्या हमेशा गाँवों का ही रहना चाहिए कभी अमेरिका या युरोप नहीं बनना चाहिए’। ज़बरदस्ती स्कूलों में हमें समाजवादी बनाया जाता रहा, अंबेडकर का उतना ही हिस्सा पढ़ाया जितने में समाजवादी विचार था। हमें कभी नहीं बताया गया कि उनकी पार्टी RPI पूँजीवादी थी। यहाँ तक कि USSR की गोद में बैठी तत्कालीन नेहरू सरकार उनके पूँजीवादी विचारों की वजह से उनको अमेरिका का एजेंट बता रही थी।

अंबेडकर ने कहा पूँजीवाद के बिना हमारी कई पीढ़ियों के जीवनकाल में दलितों का उत्थान नहीं हो सकता, जबतक उद्योग नहीं आएंगे तबतक दलित भूस्वामियों का दास रहेगा। जिसदिन उद्योग होंगे तो वह उन ज़मीनदारों की दासता से अाज़ाद होगा वह पैसे कमाएगा, वह माँगने वाले से खरीदने वाला बन जाएगा।

बहुत कुछ है कहने को लेकिन फ़ोन की स्क्रीन पर उंगली रगड़ रगड़कर और लिखने का मन नहीं है लेकिन अब इतना लिख ही दिया है तो अगले पहरा में बात का सार लिख दूँ। कम लिखुंगा ज़्यादा समझना

हमें देश को अमेरिका बनाना है या क्यूबा? हमें देश को उत्तर कोरिया बनाना है या दक्षिण कोरिया? हमें देश को 1978 से पहले का साम्यवादी चीन बनाना है या उसके बाद का पूँजीवादी विश्वशक्ति चीन? हमें देश को नेहरू का भारत बनाना है या PV नरसिंहा राव का भारत? यह आपके विवेक का फ़ैसला है और मैं आपके विवेक पर ही छोड़ता हूँ लेकिन एक बात ज़रूर कहुंगा अपनी मनपसंद पार्टी का संविधान नहीं तो कम से कम wikipedia पर ideology ज़रूर पढ़ना अगर वह आधिकारिक रूप से Left या center-left हो तो मान लेना वह अंबेडकर के विचारों से सहमत नहीं है और उनके नेताओं द्वारा अंबेडकर का ज़िक्र छद्म अंबेडकरवाद है।

धन्यवाद

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