Monday, June 1, 2020

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Liberals of Bollywood

पाताललोक के बहाने मृत्युलोक पर हिन्दुओं के प्रति सिनेमाई घृणा का पोस्टमार्टम

पाताललोक अपराध की दुनिया पर आधारित एक वेब सीरीज है। यहां अपराधी हैं, पुलिस है, राजनेता और उनके दाएं-बाएं हाथ हैं, आम आदमी है और मुसलमान हैं। आपको लग रहा होगा कि सिर्फ इतना होने पर विवाद क्यों?

New trend of Bollywood: Selling mediocre movies using social issues

The reason behind Bollywood’s propensity for brazen exploitation of stereotypes is their easy acceptability by the audience which lessens the pressure on the filmmaker to be more creative.

Shikara 2: The fillum returns (but not Kashmiri Pandits)

Fillum has no religion, it has only box-office collection: A satirical take!

जेएनयू, ‘छपाक’ और वैचारिक कंगाली पर कांग्रेस

आक्रामकता में इतना नीचे नहीं गिरिये कि आप सावरकर पर भद्दी बातें करना शुरू कर दें। फ्री कश्मीर के बैनरों का समर्थन करना शुरू कर दें। दिल्ली के शाहिन बाग में जिन्ना वाली आजादी का समर्थन शुरू कर दें।

Deepika Padukone has entered into a difficult terrain

Many film stars in Bollywood try to copy Hollywood, not only in acting but also in airing their views and in their behaviour. Here,...

CAA protest is about denying persecuted minorities their livelihood

Current outrage is more about denying the rights to the Hindus who have been persecuted, so as to hold their "Litfest" masters in Rawalpindi in high "Spirits".

बॉलीवुड जगत की अशोभनीय धूर्तता

हिंदुओं के लिए बॉलीवुड में एक ही प्रिय चरित्र है और वह है विलेन। विलेन भी ऐसा-वैसा नहीं, सदैव ब्राह्मण (आर्टिकल 15, केदारनाथ, मदर इंडिया) अथवा ठाकुर/ऊंची जाति क्षत्रिय (अनगिनत फिल्में जैसे कलंक) और ब्राह्मण/ठाकुर केवल विलेन ही नहीं दिखाए जाते बल्कि विशुद्ध धार्मिक प्रतीकों के साथ दिखाए जाते हैं।

Bollywood promoting Islamic Jihadist terrorism

From Mughal-e-Azam to Haider Bollywood always worked on a special agenda to fill tolerance in Hindu minds with fake narrative.

हिंदू आतंक को साबित करने का नया अड्डा नेटफ्लिक्स

किसी ने कहा है कि फिल्में (साहित्य) समाज का दर्पण होती है। अगर यह नॉरेटिव आज सेट हो गया तो आगे आने वाली पीढ़ी हमें सिर्फ हिंदू आतंकवादी के नाम से जानेगी।

लुटियंस दिल्ली को समझ में न आने वाली फिल्म- कबीर सिंह

सोफे पे बैठने वाले सरस शराबी लोग कबीर सिंह का कहीं सिर्फ इसलिए तो विरोध नहीं कर रहे कि बॉलीवुड धीरे-धीरे मोदी के समर्थन में आ रहा है और शाहिद भी मोदी को पसंद करते हैं और ऐसा अर्जुन रेड्डी और कबीर सिंह के रिव्यू को देखकर भी लग सकता है।

Latest News

Action with speed and precision: PM Modi Part II

in second term PM Modi is working speedily with precision and for the aspirations of 130 crore Indians.

Regional Benches of Supreme Court in your Homes?

While reluctantly acknowledging that the resort to Videoconferencing by Supreme Court and High Courts may be the need of the hour, at this moment of time, it ought not to stay beyond a minute of its need.

साउथ कोरिया में संघ जरूरी क्यों

मैं विग़त 8 महीनो से साउथ कोरिया में रह रहा हूँ। यहाँ भारतीय लोगों की संख्या क़रीब 13 हज़ार हैं। पर एच॰एस॰एस न होने के आभाव में मैंने महसूस किया है, कि भारतीय लोग संगठित नहीं हैं। और संगठित नहीं होने के कारण लोग अपनी संस्कृति से दूर जा रहे हैं।

Why is China so aggressive?

The Chinese Ox is in the China shop destroying China itself with it's desperate attempts to fool it's citizenry, and one way or other this will not end well for China.

Media: A stain on democracy

if media houses (considered as fourth pillar of democracy) really want to help migrant workers they should have done that and this crisis was got resolved till now, but what they worried for is just only for their so-called "prime time show reports".

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MNS bares its anti-Hindu fangs

Raj Thackeray’s haphazard attempt to relaunch his party as Hindu outfit has failed, leading to desperation and cheap politics.

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In conversation with Nehru: On Savarkar’s mercy petitions

This conversation is only an attempt to present the comparative study of jail terms served by both Savarkar and Jawaharlal Nehru.

भगवान श्रीराम का वनवास जो 500 वर्षों के बाद समाप्त हुआ: श्रीराम मंदिर निर्माण की अनंत कथा

अंततः श्रीराम विजयी हुए, भारतवर्ष विजयी हुआ, हिन्दू विजयी हुए और इस संघर्ष में दिए गए सहस्त्रों बलिदान सार्थक हुए।

Ajaz Ashraf, of The Scroll, with his WRONG interpretation about a freedom fighter, says Savarkar justified the idea of rape as a political tool

Savarkar quotes Ravana saying, “What? To abduct and rape the womenfolk of the enemy, do you call it irreligious? It is Parodharmah, the greatest duty!” The actual text quotes in Sanskrit as राक्षसांनां परो; धर्म: परदारा विघर्षणम् However, what the Scroll writer conveniently ignores is “राक्षसांनां”. According to the quoted statement, it’s the duty of a demon/monster.