Wednesday, November 30, 2022
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मैं समुन्दर हूँ वापस लौट के आऊँगा: श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस!

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Nagendra Pratap Singh
Nagendra Pratap Singhhttp://kanoonforall.com
An Advocate with 15+ years experience. A Social worker. Worked with WHO in its Intensive Pulse Polio immunisation movement at Uttar Pradesh and Bihar.

जब श्री उद्धव ठाकरे जी ने कांग्रेस और NCP कि सहायता से अपने पारम्परिक गठबंधन को त्याग कर सत्ता प्राप्त की थी, तो महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय युवा नेता और मुख्यमंत्री पड़ के सबसे प्रबल दावेदार श्री देवेन्द्र गंगधरराव फडणवीस ने कहा था “मैं समुन्दर हूँ वापस लौट के आऊँगा”! उस समय किसी ने भी नहीं सोचा था की देवेन्द्र वापस आएगा पर त्याग और अनुशासन की मिशाल कायम करते हुए सभी पार्टी के कार्यकर्ताओ के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन जाएगा।

जिस समय लोग सत्ता के लिए अपने पिता के आदर्शों, उसूलों और जीवन शैली को त्यागकर नापाक गठबंधन कर लेते हैं, जब पार्टी में वर्चस्व स्थापित करने के लिए चाचा भतीजे, भाई और भाई, माँ और बेटी इत्यादि आपस में लड़ पड़ते हैं। जिस समय सत्ता के प्राप्ति हेतु लोग भय, भ्रष्टाचार, साम, दाम, दंड, लोभ और मोह इत्यादि किसी भी प्रकार के हथकन्डो को आजमाने से बाज़ नहीं आते, ऐसे समय में देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद अपने हाथ में होने के पश्चात भी जिस प्रकार बिना एक पल गवाए श्री एकनाथ शिंदे के हाथो में सौप दिया, उसका उदाहरण मिलना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल अवश्य है।

इसी सत्ता के शक्ति का उपभोग करने के लिए औरंगजेब जैसे क्रूर शाशक ने अपने सगे भाईयो का कत्ल कर डाला और यही नहीं अपने पिता को पूरा जीवन कारागार में भूखा प्यासा रखकर मार डाला। पर यंहा तो व्यक्ति और व्यक्तित्व हि सनातन चरित्र का है, इसने जिस प्रकार एक अनुशासित कार्यकर्ता की भांति अपनी भारतीय जनता पार्टी से मिले निर्देशों के आधार पर सत्ता के शक्ति का त्याग किया वो अप्रतिम है। आज श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी ने अपने त्याग, संघर्ष, अनुशासन और तपस्या से ये मिशाल स्थापित किया कि एक कार्यकर्ता को अपनी पार्टी की विचारधारा और नीतियों के प्रति किस प्रकार समर्पित होना चाहिए।

आइये इनके जीवन यात्रा पर एक दृष्टि डालते हैं।

प्रारम्भिक जीवन:-
श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी का जन्म २२ जुलाई १९७० को महाराष्ट्र के नागपुर जीले के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता श्री गंगाधरराव फडणवीस जी राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के सक्रिय सेवक थे। वे जनसंघ से भी आत्मीयता से जुड़े रहे। वे राज्य विधान परिषद के भी सदस्य रहे। श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी के माता जी का नाम श्रीमती सरिता फडणवीस है।

श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस ने नागपुर में शंकर नगर चौक पर स्थित सरस्वती विद्यालय, से अपनी आरम्भिक स्कूली शिक्षा पूरी की तत्पश्चात पांच साल की एकीकृत कानून की डिग्री के लिए नागपुर के सरकारी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया, और वर्ष १९९२ में स्नातक की उपाधि प्राप्त की इसके पश्चात बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिग्री और डीएसई, बर्लिन से परियोजना प्रबंधन में डिप्लोमा प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले श्री देवेंद्र फडणवीस एक्सिस बैंक में शाखा प्रबंधक थे।

श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी वर्ष २००६ में श्रीमती अमृता रानाडे से विवाह के बंधनो में बंध गए। इनकी एक बेटी है जिनका नाम दिविजा फडनवीस है। श्रीमती अमृता रानाडे नागपुर के एक्सिस बैंक में एसोसिएट उपाध्यक्ष हैं तथा इनके माता और पिता चिकित्सक हैं, जो नागपुर जीले में हि निवास करते हैं।

राजनितिक जीवन:-
छात्र जीवन से हि श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे।वे अपने कॉलेज के दिनों में एबीवीपी के एक सक्रिय सदस्य थे। एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में उन्होने जमीनी स्तर पर राजनेताओं के लिए कार्य किया।वर्ष १९८९ में उनका भारतीय जनता युवा मोर्चा में बतौर वार्ड अध्यक्ष के रूप में चयन किया गया। और देखते हि देखते अपने सात्विक प्रयासों, समर्पण और अनुशासन के कारण वर्ष १९९२ में २१ वर्ष की छोटी उम्र में हि नागपुर नगरपालिका कॉरपोरेशन के सबसे युवा मेयर बन गए। वर्ष १९९४ में उनको भारतीय जनता युवा मोर्चा की तरफ से राज्य उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया। वर्ष १९९७ में उन्होंने इतिहास को दोहराते हुए दूसरी बार नागपुर नगरपालिका कॉरपोरेशन के मेयर पद पर कब्जा किया। वह दूसरी बार लगातार मेयर बनने वाले पहले राजनेता थे।

वर्ष १९९९ में श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी ने विधायिका कि ओर कदम बढ़ाया और पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े और जीत हासिल की। वर्ष २००१ में देवेंद्र को भारतीय जनता युवा मोर्चा की तरफ से राष्ट्र उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया।

उनके समर्पण और अनुशासनप्रियता ने एक बार पुन: उन्हें सफलता का स्वाद चखाया और वर्ष २०१४ के आम चुनावों के दौरान देवेंद्र के हाथो में महाराष्ट्र में पार्टी का नेतृत्व आ गया और उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन की सरकार बनी और श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी के रूप में महाराष्ट्र को दूसरा सबसे युवा मुख्यमंत्री मिला। ये महाराष्ट्र के १८ वे मुख्यमंत्री थे।

व्यक्तित्व:-
जब देश आपातकाल के काले भयानक और दमनकारी बादलो से दहका हुआ था तो उस समय श्री देवेंद्र फडणवीस के पिता श्री गंगाधर राव फडणवीस को भी जेल भेज दिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसले से नाराज होकर श्री देवेंद्र फडणवीस जी ने लोकल इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने से मना कर दिया और आरएसएस द्वारा संचालित सरस्वती विद्यालय में दाखिला ले लिया।

श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस महाराष्ट्र की राजनीति का वो नाम है जिसने अपने पिता से राजनीति विरासत मिलने के बावजूद भी अपनी अलग पहचान बनाई।

वह अपने बौद्धिक कौशल और पेशेवर अखंडता के लिए जाने जाते हैं।वर्ष २००२-०३ में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ द्वारा श्री देवेंद्र फडणवीस जी को सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।स्वर्गीय प्रमोदजी महाजन की स्मृति में उन्हें सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार मिला।उन्हें प्रणव परिवार, नासिक द्वारा राजयोगी नेता पुरस्कार से सम्मानित किया। श्री देवेंद्र फडणवीस एक अच्छे लेखक भी हैं। वो अब तक मराठी भाषा में 3 किताबें लिख चुके हैं उनकी किताब ‘How to understand and Read the Budget’ काफी चर्चित रही।

श्री देवेन्द्र गंगाधरराव फडनवीस जी का व्यक्तित्व अत्यंत हि प्रेरणादायक है। एक राजनितिक पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ता का आचरण किस प्रकार का होना चाहिए, ये देवेन्द्र के व्यक्तित्व से आसानी से समझा जा सकता है। सत्ता और उसकी शक्ति को त्यागने का साहस, अपनी पार्टी के द्वारा लिए गए निर्णय पर अपनी महत्वकांक्षा को तिलांजलि देने का साहस और अनुशासन युक्त राजनितिक जीवन को जीने का सामर्थ्य केवल और केवल देवेन्द्र जैसे विरले नेताओं में ही होता है।

श्री एकनाथ शिंदे जी के लिए सहर्ष मुख्यमंत्री का पद त्याग देने वाले देवेन्द्र आप धन्य हैं। आज आप सभी राजनितिक पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श के रूप में स्थापित हो चुके हैं।

संकलन और लेखन:- नागेंद्र प्रताप सिंह (अधिवक्ता)
[email protected]

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