Tuesday, April 16, 2024
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इंटरनेट की दुनिया का मायाजाल

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नई दिल्ली। आज जहाँ इन्टरनेट व्यापार से लेकर बैंकिंग, एजुकेशन, कम्युनिकेशन, टेक्नोलॉजी और मनोरंजन का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है, वहीँ बिना इन्टरनेट के जीवन की कल्पना करना तो आज के युग में बहुत ही कठिन हो गया है। इन्टरनेट ने जहाँ आज हमारी बहुत सी समस्याओं का हल दिया है वहीँ हमारे लिए बहुत सी नयी समस्याओं को जन्म भी दिया है।

आज के समय में हमारी इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ती ही जा रही है। इंटरनेट बेहद तेजी से हमारी जिंदगी का बेहद जरूरी और बड़ा हिस्सा बन चूका हैं। इंटरनेट ने हमारे जीवन को काफी सरल और सुविधाजनक बना दिया है। इंटरनेट ने अपने प्रभाव और विस्तार से जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। दुखद पहलू यह है कि तकनीक के इस आगमन और इसके सकारात्मक-नकारात्मक पहलुओं को समझने या इसके स्वागत की तैयारी करने का वक्त समाज के पास लगभग नहीं रहा है। इससे हालात तेजी से असंतुलित हो रहे हैं।

इसी का नतीजा है कि क्राइम की गतिविधियों में लिप्त रहने वाले लोगों ने इसका इस्तेमाल क्राइम में करना शुरू कर दिया है। आज इंटरनेट फ्राड से लेकर विभिन्न तरीकों से डेटा चुराने तक की घटनाएं आम होती जा रही हैं। साइबर फिरौती और बुलिंग के खतरे का आकार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व में कहीं से भी किसी के द्वारा साइबर अपराध की वारदात को अंजाम दिया जा सकता है। इसी वजह से साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। वही हैकर्स और वायरस रचनाकार जिनका एकमात्र इरादा पूरी दुनिया में अराजकता और / या आपके कंप्यूटर सिस्टम और अन्य कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाना है।

इंटरनेट एक व्यापक नेटवर्क है जो दो या दो से अधिक नेटवर्क उपकरण को एक-दूसरे को संचार करने और वहा जानकारी साझा करने की अनुमति देता है। इंटरनेट ट्रासमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल/इंटरनेट प्रोटोकॉल (टीसीपी/आइपी) के आधार पर काम करता है। इंटरनेट पर लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और सेवाओं का एक जटिल वातावरण है। इंटरनेट दुनिया इतनी बिखरी और व्यापक है कि इसमें किसी भी कमजोर कड़ी को निशाना बनाकर पूरे हिस्से में हलचल मचाई जा सकती है। तकनीक के तेजी बहाव में फिलवक्त इसका इस्तेमाल सतही मनोरंजन और अफवाहों को इधर-उधर करने में ज्यादा हो रहा है। ईमेल, ब्लॉग, वीडियो फोरम, चैट एप से लेकर सोशल कनेक्टिविटी एप तक का इस्तेमाल बेहद सीमित दायरे में सकारात्मक बदलाव के लिए हो रहा है। अधिकांश हिस्सा बड़ी वायरल सूचनाओं के जरिये नियंत्रित है और इसका फौरी तौर पर कोई हल दिखाई नहीं देता है।

कोरोना जैसी भयावह संक्रामक महामारी के समय में इंटरनेट ही एक ऐसा माध्यम है जिसके माध्यम से शिक्षा, चिकित्सा, बैंकिंग एवं बड़ी-बड़ी कंपनियों का कार्य वर्क फ्रॉम होम के तहत इंटरनेट के माध्यम से ही किए जा रहे हैं जिससे देश की जनता को काफी राहत हुई है।

कोरोना संकट की चुनौतियों से पार पाने में इकोनॉमी की मदद करने वालों में इंटरनेट की भूमिका सबसे अहम रही। लॉकडाउन के समय इसके बलबूते ही डिजिटल इकोनॉमी ने हालात संभाले। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्मार्ट सिटी, मैन्यूफैक्च¨रग के साथ ही आम जनता की जीवन-शैली में भी भारी बदलाव आया। आज इंटरनेट महत्वपूर्ण उपयोगिता के रूप में उभर कर देश के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कोरोना काल में भारत में इंटरनेट के बाज़ार में गलाकाट स्पर्धा चल रही है। टेलीकॉम इंडस्ट्री में नई तरह की इंटरनेट क्रांति देखने को मिल रही है। कोविड-19 के चलते इंटरनेट के इस्तेमाल में वृद्धि हुई है। इससे इंटरनेट पर भी भारी बोझ पड़ा है। नया इंटरनेट कनेक्शन लेने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी है, कंपनियों का प्रति ग्राहक राजस्व बढ़ा है।

लेकिन भ्रष्टाचारी, आततायी भी अन्दरखाने अपना काम भी करने मे लगे हुये है। जिस पर शासन – प्रशासन को लगाम लगानी ही पडेगी। शासन – प्रशासन को भागीरथ प्रयास करना होगा तभी जीरो टालरेंश की मंशा पूरी हो पायेगी। कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों को देखकर पुरे देश में हर जगह इंटरनेट की सुविधाएं जरूरी रूप से अनिवार्य होने लगी, इसी दौरान अलिखित एवं अघोषित लोगों द्वारा बहु राष्ट्रीय कंपनी का नाम लेकर इंटरनेट कनेक्शन बांटने की प्रक्रिया जनता के बीच प्रस्तुत किया गया, किंतु वास्तविक स्थिति में इसमें सुरक्षा की दृष्टि से हाईटेक हो रहे अपराधियों द्वारा इसका दुरुपयोग भी भरपूर किया जा रहा है। लोगों की गोपनीयता में बड़ी सेंध लगाई जा रही है। लोगों के डाटा की निजता को खतरा पैदा हो चुका है। जिससे लोगों के डाटा पर ‘संभावित दुरुपयोग और गोपनीयता जोखिम’ के संबंध में खतरा हमेशा बना रहता है। साइबर क्रिमिनल आपके इंटरनेट डिवाइस (मोबाइल, टैब, लैपटॉप, डेस्कटॉप, सी सी टीवी, स्मार्ट टीवी, नेटवर्क उपकरण आदि) हैक भी कर सकते हैं। इसके बाद हैकर्स द्वारा आपको ब्लैकमेल भी किया जा सकता है। तमाम गैर रजिस्टर्ड फर्म व लोगों द्वारा इन्टरनेट सेवा मे प्रवेश कर इसका जमकर दुरपयोग भी किया जा रहा है। इसके कारण जनता के अंदर एक दुविधा उत्पन्न हो गई।

हर नागरिक का इंटरनेट पर समान अधिकार है। यानि आप जिस भी इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनी की सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं वह कंपनी आपको सोशल मीडिया, ईमेल, कॉल, ऑनलाइन शॉपिंग जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए इन्टरनेट की एक समान स्पीड और एक्सेस उपलब्ध कराये। अर्थात इन्टरनेट पर हर यूजर के साथ समानता का व्यवहार ही नेट न्यूट्रैलिटी कहलाता हैं। अर्थात नेट न्यूट्रैलिटी वो सिद्धांत है जिसके तहत माना जाता है कि इंटरनेट सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियां; इंटरनेट पर हर तरह के डाटा को एक जैसा दर्जा देंगी। इंटरनेट सर्विस देने वाली कंपनियों अलग अलग डाटा के लिए अलग-अलग कीमतें नहीं लेनी चाहिए।

वही इंटरनेट सर्विस कंपनियों द्वारा अवैध रूप से बिजली के खंभों पर इंटरनेट का तार लटकाया जा रहा है। बिजली के खंभों पर इंटरनेट का कनेक्शन बॉक्स भी लगाया जा रहा है। स्थिति यह है कि बिजली के खंभों पर बिजली से अधिक इंटरनेट सर्विस कंपनियों के वायर लटके हुए दिखते हैं। बिजली के खंभों पर इंटरनेट के तारों का मकड़जाल बिछा हुआ है। इन खंभों पर लटके हुए ज्यादातर तार प्रयोग में नहीं हैं, क्योंकि एक बार तार के खराब होने पर ऑपरेटर पुराने तार को वहां से नहीं हटाते हैं और नई तार डाल दी जाती है। इंटरनेट के तार बिछाने के लिये अवैध तरीके से बिजली के खंभों पर शट डाउन भी लिया जाता है। लेकिन, इसकी सूचना बिजली विभाग को होती ही नहीं है। बिजली के खंभों पर किसी तरह का केबल टांगने का प्रावधान नहीं है। इसके लिए बिजली विभाग किसी को अनुमति भी नहीं देता है। अवैध रूप से लगाए गए इन इंटरनेट के तारों के चलते सरकार को राजस्व में लाखों-करोड़ों का नुक़सान होता हैं।

बिजली के खंभों पर इंटरनेट के अव्यवस्थित तारों के कारण आए दिन शॉर्ट सर्किट की समस्याएं आती रहती हैं। इसकी वजह से कभी आग भी लग सकती है। बिजली करंट फैलने से गंभीर दुर्घटना भी हो सकती है। जहां खराबी आने पर बिजली कंपनी के कर्मी काम करने आते हैं। इसके बाद मौके पर बिजलीकर्मियों का अमला आकर सुधारकार्य करता है। इस दौरान इंटरनेट सर्विस के तार के मकड़जाल के बीच खंभे पर चढ़कर सुधार कार्य करने वाले लाइनमैन की जान को खतरा होता है। कई बार बिजलीकर्मी खंभों पर चढ़ने से मना कर देते हैं, जिससे बिजली व्यवस्था बहाल होने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। बिजली खंभों पर इंटरनेट सर्विस के तार होने से कुछ जगह लाइनमैन के साथ गंभीर दुर्घटना हो चुकीं हैं। लेकिन बिजली विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। इसलिए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

बिजली विभाग की तरह नगर निगम की ओर से लगाई स्ट्रीट लाइट का भी यही हाल है। स्ट्रीट लाइटों पर भी इंटरनेट सर्विस कंपनियों ने अपने तार बांधे हुए हैं, जो कि गैरकानूनी है। हैरानी की बात है कि ये तार नगर निगम के अधिकारियों के सामने लगे हैं फिर भी किसी पर कार्रवाई नहीं होती। किसी पर कार्रवाई न करना अधिकारियों को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर काम को डिजीटल से जोड़ने की बात कह रहे हैं, वहीं नगर निगम डिजीटल से फिसड्डी होता दिख रहा है। इंटरनेट सेवा दुरुस्त कराने की अफसरों को फुर्सत ही नहीं है, लिहाजा यहां संचालित आनलाइन सेवाओं का लाभ लेने वाले नागरिकों को दिक्कतें पेश आ रही हैं। इंटरनेट सेवा प्रभावित होने से निगम के ही कई काम पिछड़ते जा रहे हैं।

इंटरनेट के तार सड़क हादसों का कारण भी बन रहे हैं। बड़े वाहनों में फंस कर तार अक्सर टूटकर सड़क पर गिर जाते है। जब भी कोई साइकिल या बाइक सवार वहां से गुजरता है तो पहियों में फंसकर वे नीचे गिर जाते हैं।

इंटरनेट के विकास व सुरक्षा हेतु केन्द्र व प्रदेश सरकारों, न्यायालयों ने तमाम दिशानिर्देश भी जारी कर रखे है। जिनका अक्षरशः पालन न होना भी इंटरनेट के विकास की गति का अवरोधक है। केन्द्र व प्रदेश सरकारों द्वारा इंटरनेट के विकास के लिये लाखो-करोडों रूपया पानी की तरह बहाया जा रहा है लेकिन इतना सब होने के बाद भी अपेक्षित विकास न होना भी अपनेआप मे एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। वर्तमान में सरकार को इंटरनेट के विकास के लिए बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है।

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