Sunday, November 27, 2022
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कांग्रेस द्वारा २२८४२ करोड़ के घोटाले का महापाप

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Nagendra Pratap Singh
Nagendra Pratap Singhhttp://kanoonforall.com
An Advocate with 15+ years experience. A Social worker. Worked with WHO in its Intensive Pulse Polio immunisation movement at Uttar Pradesh and Bihar.

मित्रों जैसा कि आप जानते हैं कि भारतीय स्टेट बैंक की एक शिकायत पर, सीबीआई ने हाल ही में एबीजी शिपयार्ड, उसके निदेशकों और एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड पर २८ बैंकों के एक संघ को कथित तौर पर २२८४२ करोड़ रुपये का नुकसान करने के लिए मामला दर्ज किया है और ये घोटाला इस समय सुर्ख़ियों में है और इसी के साथ एक बार फिर कांग्रेस का भ्रष्टाचारी काला और भयानक चेहरा सामने आ गया है, आइये देखते हैं कि ये घोटाला कैसे और किस प्रकार किया गया।

ABG shipyard :-

अहमदाबाद में कंपनी रजिस्ट्रार के साथ पंजीकृत, एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड को मार्च १९८५ में मगदला शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड के रूप में शामिल किया गया था। इस्  कंपनी के नाम मे परिवर्तन किया गया और यह मई १९९५ में एबीजी शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड और जून १९९५ में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड बन गया। इसके मुख्य प्रवर्तक (प्रोमोटर) श्रीमान ऋषि अग्रवाल हैं।

१९९० के मध्य ,इस कंपनी ने अपने पहले जहाज का निर्माण किया था और २०१३ तक, इसने १६५ से अधिक जहाजों का निर्माण किया, जिनमें से ८०% अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए थे। अब कांग्रेस की नज़र इस पर पड़ गई और यही से शुरू हुआ घोटाले का अनवरत सिलसिला। वर्ष २००० में इस कंपनी को, इसे तटरक्षक बल के लिए दो इंसेप्टर नौकाओं के निर्माण का पहला सरकारी आदेश मिला और् इसके  बाद कांग्रेस के मेहरबानी का सिलसिला चल पड़ा। २०११ में, केंद्र ने इस कंपनी को पनडुब्बियों सहित रक्षा जहाजों के निर्माण का लाइसेंस दे दिया। फरवरी २०१२ तक एबीजी शिपयार्ड के पास १६६०० करोड़ रुपये के  ऑर्डर बुक की गयी थी। इसका मुख्य शिपयार्ड सूरत के मगदल्ला में तापी के तट पर 35 एकड़ में फैला हुआ था।  बाद में इसने गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के साथ भूमि और वाटरफ्रंट उपयोग के दीर्घकालिक पट्टे के लिए एक समझौता ज्ञापन निष्पादित होने के बाद, मगदल्ला से 150 किलोमीटर दूर (दहेज) भरूच में एक दूसरा शिपयार्ड स्थापित किया।कंपनी ने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में बड़ी परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापनों (MOU) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें एक तीसरे शिपयार्ड के लिए २५०० करोड़ रुपये का MOU शामिल है।

कंपनी का विस्तार।

एबीजी शिपयार्ड ने २२ जनवरी, २००६ को संयुक्त अरब अमीरात स्थित क्रॉसोसियन शिप रिपेयर लिमिटेड, एफजेडई, फुजैरा का अधिग्रहण किया, लेकिन मार्च २००८ में इसे बेच दिया। २००७-०८ में, एबीजी ने अपने मगदला शिपयार्ड से सटे विपुल शिपयार्ड का अधिग्रहण किया। आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक और अन्य उधारदाताओं के साथ एक सौदे के माध्यम से वेस्टर्न इंडिया शिपयार्ड लिमिटेड (डब्ल्यूआईएसएल) नामक, गोवा के एक प्रमुख शिपयार्ड का अधिग्रहण किया। ABG के पास WISL में ६०.१५% नियंत्रण हिस्सेदारी थी, जिसने नौसेना, तटरक्षक बल और निजी खिलाड़ियों के जहाजों की मरम्मत के कार्य करती थी। इसने २०१०-११ में अपना उच्चतम कारोबार ११४ करोड़ रुपये दर्ज किया।

कंपनी में घाटे का समय २०१२-१३ से शुरू हुआ। कंपनी ने २०१५ में जहाज की मरम्मत का काम बंद कर दिया था। २०१५-१६ में इसके प्रमोटरों ने इसमें से विनिवेश करने का फैसला किया। एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड होल्डिंग कंपनी थी। एबीजी शिपयार्ड की ग्यारहवीं भूमि डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, एबीजी एफपीएसओ प्राइवेट और विपुल शिपयार्ड में नियंत्रण हिस्सेदारी थी। विभिन्न बिंदुओं को लेकर बनाई गई, इसकी ५५ से अधिक सहायक कंपनियां थीं।

जप्ती और परिसीमापन

२००७ में, एबीजी शिपयार्ड ने एक समुद्री विश्वविद्यालय (Marine University) के लिए ५०  करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) ने सूरत के इच्छापुर में विश्वविद्यालय के लिए आवंटित १.२१ लाख वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा कर लिया। जीआईडीसी के उपाध्यक्ष एम थेनारासन ने बताया कि  ‘हमने जमीन का कब्जा वापस ले लिया है क्योंकि इसका इस्तेमाल कंपनी के द्वारा कंपनी को आवंटित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया था।” भूखंड को ७०० रुपये/वर्ग मीटर पर आवंटित किया गया था, जो कि तत्कालीन मौजूदा प्रीमियम मूल्य १४०० रुपये/वर्ग मीटर का ५० % है, २०१४ में विधानसभा में पेश सीएजी (CAG) की रिपोर्ट में एक रियायत लाल झंडी दिखाई गई थी।

२५ अप्रैल, २०१९ को आईसीआईसीआई (ICICI)बैंक बनाम एबीजी शिपयार्ड में एक आदेश में, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने दिवाला और दिवालियापन संहिता की धारा ३३ के तहत कंपनी के परिसमापन का आदेश दिया। दिसंबर २०२० में, NCLT की अहमदाबाद बेंच ने परिसमापक को संपत्ति की निजी बिक्री करने की अनुमति दी, एक नीलामी के बाद कोई बोली लगाने वाला नहीं मिला। पांच जहाजों के अलावा, भरूच और गावियार में ९२००० वर्ग मीटर आवासीय भूमि, मगदल्ला बंदरगाह के पास ४.१४ लाख वर्ग मीटर औद्योगिक भूमि और डायमंड हार्बर, कोलकाता में २७ एकड़ कृषि भूमि का परिसमापन किया जा रहा है।

क्या और कितना है घोटाला?

 मुख्य रूप से कम्पनी ने २८ बैंकों से तीन अलग-अलग तरह के कर्ज लिए। इन ऋणों के माध्यम से जुटाए गए धन को ९८ सहयोगी कंपनियों के माध्यम से बदल दिया गया और मुख्य रूप से व्यक्तिगत संपत्ति बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया। भारतीय स्टेट बैंक की एक शिकायत पर, सीबीआई ने  में एबीजी शिपयार्ड, उसके निदेशकों और एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड पर २८ बैंकों के एक संघ को कथित तौर पर २२८४२ करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए मामला दर्ज किया है।

यंहा पर ध्यान देने वाली बात ये है कि “धोखाधड़ी मुख्य रूप से मेसर्स एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा संबंधित पार्टियों को भारी हस्तांतरण और बाद में समायोजन प्रविष्टियां करने के कारण हुई है। यह भी आरोप है कि बैंक ऋणों को डायवर्ट करके इसकी विदेशी सहायक कंपनी में भारी निवेश किया गया था। जांच की महत्वपूर्ण अवधि 2005-2012 है, ”सीबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में इस तथ्य का रहस्योदघाटन किया।”

यह एक जटिल घोटाला है जिसमें सर्कुलर लेनदेन शामिल हैं और शेल कंपनियों द्वारा उन्हें परत करने के लिए उपयोग किया गया है।  इससे स्पष्ट है कि कर्ज को हमेशा सदाबहार बनाने के लिए या आरोपी के लिए व्यक्तिगत संपत्ति बनाने के मकसद से कर्ज लिया गया था।’

जांच में पाया गया है कि २००७ और २००९ के बीच, ८३ करोड़ रुपये की संपत्ति, नौ संबंधित पक्षों के माध्यम से एबीजी एसएल द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा जमा (Security Deposit) में से खरीदी गई थी। सर्कुलर लेनदेन के बिंदु पर, प्राथमिकी में कहा गया है कि, “१५ और १६ मार्च, २०१६ को, एबीजी एसएल द्वारा क्रमशः १५ करोड़ रुपये और १६ करोड़ रुपये की राशि एबीजी एनर्जी को हस्तांतरित की गई थी। उसी दिन, दो प्रवाह लेनदेन में ३१ करोड़ रुपये की राशि एबीजी इंटरनेशनल से आवास जमा की वापसी के रूप में प्राप्त हुई थी।

संघीय एजेंसी ने सूरत, भरूच, मुंबई, पुणे आदि में निजी कंपनी के निदेशकों/अभियुक्तों के परिसरों सहित १३ स्थानों पर छापे मारे, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए, याद रखिये २००५ से २०१२ तक केंद्र मे कांग्रेस सरकार थी। प्रमोटर ऋषि अग्रवाल के अलावा, एजेंसी ने तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशक अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात के कथित अपराधों के लिए नामित किया है। प्राथमिकी में कहा गया है कि आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इस मामले में आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया गया है।

जांच में “देरी” के आरोपों को स्पष्ट करते हुए, एजेंसी बताया कि कुछ राज्यों द्वारा सामान्य सहमति के लिए वापसी प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के कारणों में से एक थी। एसबीआई ने अगस्त २०२० में सीबीआई को शिकायत दर्ज कराई, हालांकि कुछ राज्यों द्वारा सीबीआई जांच के लिए सामान्य सहमति वापस लेने से बैंक धोखाधड़ी के मामलों का पंजीकरण और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। “लगभग १०० उच्च मूल्य वाले बैंक धोखाधड़ी के मामले हैं जो राज्य सरकारों द्वारा डीएसपीई अधिनियम की धारा ६ के तहत विशिष्ट सहमति के गैर-अनुपालन के कारण दर्ज नहीं किए जा सके, जहां सामान्य सहमति वापस ले ली गई है,”।

तो मित्रो आपने देखा  कि अपने भ्र्ष्टाचारी चाल चलन और चरित्र के अनुरूप ही हावर्ड विश्वविद्यालय से विशेष डिग्री लिए हुए कुछ तथाकथित अंग्रेज परस्त दलाल कांग्रेसियों ने किस प्रकार अपने निम्न कोटि की निकृष्ट मानसिकता का व्यापक परिचय देते हुए २८ बैको को एक साथ लुटाने की घटना को अंजाम दिया। इनके शाशन काल में ही इस सम्पूर्ण घोटाले की घंटी बजना शुरू हो गयी थी पर इन दलालो ने अपने कमीशन के चक्कर में सम्पूर्ण अर्थ व्यवस्था को ही बेचने और उससे दलाली कमाने की थान ली थी। आप को बता दूँ की दुनिया के सबसे भ्र्ष्ट चार प्रमुख पार्टियों में से एक कांग्रेस है और ये ख़िताब उसे ऐसे ही नहीं मिल गया अपितु इसके लिए इन्होने अपने इमान और देश को कई बार बेचा और कमीशन कमाया। कांग्रेस के शाशन काल में ९०% घोटाले हुए जिसकी शुरुआत जवाहर लाल नेहरू के शाशन काल में हुए जीप घोटाले से शुरू हुई थी और आज तक चल रही है। ये लुटेरों के द्वारा बनायीं गयी पार्टी थी जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन के लुटेरों को लूटपाट करने में सहायता पहुंचाना भर था।

इस प्रकार आप एक बार पून: कांग्रेस के काले और भयानक दुष्चरित्र से दो चार हुए, अब देखते हैं कि कब तक इन से हमारे देश को मुक्ति मिलती है।

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