Friday, December 9, 2022
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कोरोना से मुक्त होना संभव

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हाल ही में विश्व में कोरोना के कहर के बीच इजराइल से अच्छी खबर आई है। इजराइल में अब सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाना अनिवार्य नहीं है। इजराइल विश्व का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने खुद को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया है। वहां बड़े स्तर पर टीका अभियान के बाद एक बार फिर लोगों की ज़िंदगी पटरी पर लौट रही है। इजराइल स्वयं को कोरोना मुक्त घोषित करना भारत के लोगों को लालायित कर रहा है। भारतवासी यह सोचने लगे हैं कि क्या हम भी इजराइल के तरह कोरोना से छुटकारा पा सकेंगे?

आज हमारा देश कोरोना महामारी के भयानक चपेट में है, गंभीर रूप से संक्रमित लोगों के उपचार हेतु जरूरी दवाओं, औक्सीजन की कमी ने स्वस्थ्य व्यवस्था का बेहाल कर दिया है। हालांकि इन सभी जरूरत की चीजों की आपूर्ति के लिए जहां एक ओर देश में उत्पादन पर ज़ोर दिया जा रहा, वहीं दूसरे देशों से भी मदद ली जा रही है। आज देश के हालात हैं, जो बेहद डरावने हैं। एक ओर लोगों को अपने जान बचाने की जहोजद करनी पड़ रही, दूसरी तरफ मन में यह भाव भी उठ रहे हैं कि किसी तरह इस महामारी का कोई स्थायी इलाज हो सके, ताकि लोग पहले की भांति रोजमर्रा की ज़िंदगी जीने को बेताब हैं। लेकिन मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए यह आशा भी करना बेईमानी होगा कि हम कोरोना से मुक्त कब होंगे? क्या इज़राइल जैसे कब हम यह कह सकेंगे कि अब हमारे देश में कोरोना नहीं है।

परंतु इजराइल जैसा कोरोना मुक्त होने के लिए हमें इज़राइल के विषय में जानना अत्यंत आवश्यक है कि इस छोटे से देश ने अपने परिश्रम, अनुशासन, दृढ़ संकल्प के साथ न सिर्फ अपनी धरती को अवाद किया, बल्कि अनेक मामलों में विकसित देशों के समांतर खुद को स्थापित भी किया है। कोरोना के मामलों के में भी पूरे देश ने ऐसा ही अनुशासन दिखाया है। एक बार मास्क लगाने की घोषणा हो गयी, तो फिर किसी ने प्रश्न तक नहीं उठाया है। लोगों ने सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा, इसके लिए वहाँ की पुलिस को हमारे देश की तरह कसरत नहीं करनी पड़ी। इसी तरह टिकाकरण अभियान का सार्वजनिककरण किया गया। टीका के पहले डोज़ को 100 दिनों का लक्ष्य रखा गया था। 16 से 80 वर्ष तक 81 प्रतिशत लोगों का टिकाकरण हो चुका था, इसके साथ परिस्थितियों का मूल्याकंन करने के बाद यह स्पष्ट किया गया कि देश कोरोना संकट से बाहर है और घोषणा कर दी गयी।

लेकिन हमारे देश में लोग मास्क लगाने के लिए सड़क पर पुलिस वाले से झगड़ने लगते हैं। हाल में ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एक कार से एक दंपति जा रहे थे। सड़क पर ड्यूटी पर लगे पुलिस वाले ने बिना मास्क के होने पर गाड़ी रुकवाई और पूछा कि आपने मास्क क्यों नहीं लगाया है? इसपर वे दोनों पुलिस वाले से ही भीड़ गए और बहुत उल्टा सीधा बात करने लगे। पुलिस वाले को धमकाते हुए कहा –कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारी गाड़ी रोकने की, मैं मास्क नहीं पहनूँगी, यह हमारी मर्जी है। हालांकि फिर बाद में उनलोग ने अपनी गलती स्वीकार की।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इजराइल के जनसंख्या भारत के तुलना में बहुत ही कम है। इजराइल की कुल आबादी 93 लाख के करीब है। ऐसे में अनुशासन पालन और टिकाकरण का कार्य उतना मुश्किल नहीं है। हम मानते हैं कि इन सभी बातों के लिए जनसंख्या एक अहम कारक है, लेकिन मूल बात राष्ट्र के प्रति संकल्प और अनुशासन को कैसे नजरंदाज कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि इजराइल में कोरोना महामारी के समय विरोध करने वाले लोग नहीं थे, इस पर भारत की तरह ही वहाँ भी बहस हुई और आज भी हो रही है, लेकिन इससे उनका लक्ष्य बाधित नहीं हुआ। क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वहाँ के लोग अनुशासन पालन करने के लिए तत्पर हैं।

ऐसा भी नहीं है कि भारत में कोरोना महामारी पर विजय पाने की क्षमता नहीं है, यह बात अलग है कि हम वैसा दृढ़ संकल्प और अनुशासन नहीं अपनाने का भाव को जीवित रखने में अपनी सफलता मानते हैं। हम सरकारी निर्देशों को न मानने की जिद्द को अपना अधिकार मान बैठते हैं। निःसन्देह राज्य सरकारों के कोरोना प्रबंधन में कमियाँ दिखती रहीं हैं, क्योंकि  कोरोना के नए वेरियंट को लेकर देश को आगाह भी किया गया था, पर उसपर ध्यान नहीं देते हुए तैयारी नहीं की गई। और यह कहावत सच हो गयी– ‘जैसी करनी, वैसी भरनी’। हमें काफी हद तक तक इज़राइल से सीख लेनी थी कि आपदा के समय में कैसी आचरण करनी चाहिए, अगर देश को सम्पूर्ण देशवासी का साथ मिले, तो हम जरूर इज़राइल के तरह कोरोना पर विजय पा सकते हैं। निःसन्देह सरकारों के तरफ से प्रबंधन में कमी हुई, लेकिन समाज के तरफ से भी अनुशासनहीनता  के साथ- साथ गैरजिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला।

अब भी देर नहीं हुई है, अगर केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, स्थानीय शासन, सामाजिक –व्यापारिक संगठन सहित हर भारतीय यह ठान ले कि कोरोना से मुक्त होकर ही रहेंगे, तो हमारा देश भी कोरोना मुक्त हो सकता है, इसके लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है।

ज्योति रंजन पाठक–औथर,कंटेन्ट राइटर  व कौलमनिस्ट

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