Thursday, November 26, 2020
Home Hindi कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी

कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी

Also Read

वैश्विक महामारी कोरोना ने पूरी दुनिया बदल दी है इस तथ्य को कोई नकार नहीं सकता। आपके ध्यान्नार्थ किंग्स कॉलेज – लन्दन के शोधकर्ताओं के विश्लेषण का निष्कर्ष यही रहा था कि कोविद-१९ छह तरह से हमला कर रहा है और यही कारण है की कोरोना संक्रमितों की संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है। अभी कुछ दिन पहले ही सुप्रसिद्ध नारायणा हृदयालय के डॉ देवी शेट्टी ने बताया कि स्थिति भयावह होने वाली है।डॉक्टरों की भी कमी पड़ जायेगी इसलिये  सरकार से अविलम्ब 5000 डॉक्टरों की भर्ती करने का आग्रह किया है और जनता को सलाह दी है कि हर हालात में भीड़ से बचें। जाँच व इलाज में देरी घातक हो सकती है।

इन बढ़ते हुए संक्रमितों के कारण आज अस्पतालों में पलंग उपलब्ध नहीं हैं। अपना कमाया धन भी काम नहीं आ रहा है। अस्वस्थ सदस्य की हम ईच्छा होते हुए भी सेवा नहीं कर पा रहें हैं यानि चाहते हुए भी सेवा करने से घबराहट हो रही है। और तो और स्थिति यह हो गयी है कि परिवार के सदस्य अंतिम क्रिया में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। जिन घरों में गमी हुई है, उनको भी हम  दिलासा / संवेदना फोन पर ही दे रहे हैं। यानि हमें  इन सबको ख़ामोशी से देखने के अलावा कोई उपाय नज़र नहीं आ रहा है।

इसलिये हमें विगत दिनों की तरह लॉक डाउन के समय में जो नियम पालन करते थे, वह अब और कठोरता से पालन करना पड़ेगा, नहीं तो हम जीवित नही बच पायेंगे। हमारे सामने परिवार को सुरक्षित बचाये रखने की एक खुली चुनोती है।हम रहेगें तभी हमारा व्यापार, पैसा, परिवार और समाज सुरक्षित रहेगा ।
उपरोक्त लिखा हुआ अवश्य ही चुभता होगा लेकिन क्या यह कटु सत्य नहीं है ?

अब हमें बिना समय गँवाये “एक कठोर निर्णय लेना” पड़ेगा।

और अब हमें इसी परिस्थिति में सुझाये गये उपायों का कठोरता से पालन करते हुये जीने की आदत डालनी होगी क्योंकि सभी विशेषज्ञों ने बता दिया है कि २०२१ तक हमें इस महामारी से छुटकारा मिलना मुस्किल है इसलिये सरकार भी धीरे धीरे सभी चीजें खोल रही है। याद रखें यह साल कमाने का नहीं है बल्कि पूरे परिवार के साथ सुरक्षित रहने का है।

और सुरक्षित रहने के लिये जैसा पाठकगण आप जानते हैं कि सभी विशेषज्ञों ने कोरोना महामारी से बचने के लिये चार मुख्य उपाय बताये हैं और हम सभी उन उपायों से भलिभांति परिचित भी हो गए हैं।  फिर भी आप की जानकारी के लिये वे चार मुख्य उपाय यहाँ नीचे प्रस्तुत कर दे रहा हूँ –

1) इम्यूनिटी मजबूत बनाये रखें।

2) हर तरह से सामाजिक दूरी की पालना करें।

3) फेस मास्क का निरन्तर प्रयोग।

4) हाथ या तो साबुन से धोते रहें या सैनेटाईज कर लें।

मानसून सत्र के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “कोरोना भी है और कर्तव्य का पालन भी करना है”। साथ ही उन्होंने देशवासियों को चेताते हुये यह भी सन्देश दिया कि “जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं”। इससे पहले उन्होंने “दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी” की पालना का आह्वान किया हुआ है ही।

एकबार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने 17 सितंबर यानी गुरुवार को अपने 70वां जन्मदिन के दिन रात 12.38 मिनट पर ट्वीट किया, ‘चूंकि कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपने जन्मदिन पर क्या चाहता हूं, इसलिए मैं यहां वो चीजें बता रहा हूं जो मैं अभी चाहता हूं।’ इसके बाद पीएम मोदी ने अपनी विश लिस्ट गिनाई जो इस प्रकार है-

मास्क पहनते रहिए और इसे ठीक से पहनिए।
सोशल डिस्टैंसिंग का पालन कीजिए। 
दो गज की दूरी को हमेशा ध्यान में रखिए। 
भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचिए। 
अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाइए।
इसके बाद अंत में पीएम मोदी ने कहा आइए हम अपनी दुनिया को स्वस्थ बनाएं।

उपरोक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अन्त में यही निवेदन रहेगा कि कोरोना पर विजय पाना है तो जरूरी हो तभी घर से सुरक्षा नियमों का पालन करते हुये निकलें।सुरक्षित होकर पुन: स्वतः को अनुशासित करें। 

तभी हम कॅरोना पर विजय पा सकेंगे। सरकार ने तो सब कुछ खुला छोड़ रखा है,अब केवल व केवल हमे और आपको अपने आप को बचाना है।

आशा है आप सभी बतायी गयी सारी सावधानीयां बरतते हुए स्वस्थ व प्रसन्न जीवन का आनंद उठाते रहेंगे ।

गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू”

  Support Us  

OpIndia is not rich like the mainstream media. Even a small contribution by you will help us keep running. Consider making a voluntary payment.

Trending now

Latest News

संवैधानिक मूल्यों और कर्तव्यों के प्रति जागरुकता आवश्यक

संविधान की अब तक की सफलता एक महान उपलब्धि है किंतु आगामी समय में चुनौतियां भी कम नहीं है आवश्यकता है कि हम संवैधानिक व नैतिक मूल्यों को सहेजें और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, अन्यथा संविधान हीलियम के बक्से में बंद एक पुरानी पोथी से बढ़कर कुछ नहीं रहेगा।

लव जिहाद अध्यादेश और कॉंग्रेस का विरोध

से तो संघ और विहिप के द्वारा ये मुद्दा अनेक वर्षों से उठाया जा रहा है लेकिन अभी हाल ही के दिनों में ये देश का एक चर्चित मुद्दा बन गया, जब मध्यप्रदेश ने इस पर कानून बनाकर इसे लागू कर दिया तथा सभी भाजपा शासित राज्य इस पर कानून बनाने की प्रक्रिया में है।

Review of Indian democracy by departed leaders

As per the determined demand of highly annoyed departed souls of freedom fighters, who had dreamed that their mother land to be a vibrant global democratic power but as they lately noticed the progress was not to their expectation, the FoN convened a meeting of Working Committee of freedom fighters for review of the progress: A satirical take

The crisis of the Mongol narrative in India

To constantly set our humanity aside and claim that a Turkic-Mongol king was a poet or had courtiers of different religions ignores the victims absolutely, and is a rather horrifying narrative, taking the agency away from these dead sultans who have definitely claimed to affect their cruelty on the basis of their religion.

हिंदूफोबीया ग्रस्त बॉलीवुड और वेब सीरीस

आजकल भारतीय फ़िल्मों में हिंदू देवी देवताओं का, हिंदू धर्मगुरुओं का उपहास बहुत ही सहजता से आ जाता है। कई सिरीज़ में हिंदू बाबा विलेन के किरदार में भी दिखाई देते हैं। कुछ सिरीज़ में ऐसा भी दिखता है कि बॅकग्राउंड में मंत्र बज रहे हैं और कोई हिंदू पंडित हत्या करने जा रहा है या किसी को हत्या का आदेश दे रहा है।

Life ends, Maggie goes on

What explains this phenomenon that has made its place into the Indian food culture that was earlier obsessed with fresh milk and wheat procured from the local farm? Maggie has so seamlessly transited from Switzerland to India.

Recently Popular

गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

The story of Lord Jagannath and Krishna’s heart

But do we really know the significance of this temple and the story behind the incomplete idols of Lord Jagannath, Lord Balabhadra and Maa Shubhadra?

Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.

Did Dr B.R really made the Indian Constitution? Why is this so hyped about in India?

Dr B. R. Ambedkar in his concluding speech in constituent assembly on 25 November 1949 stated that:- The credit that is given to me does not really belong to me. It belongs partly to Sir B.N. Rau the Constitutional Advisor to the Constituent Assembly who prepared a rough draft of the Constitution for the consideration of Drafting Committee.