Home Hindi आम ग्रामीणों पर सख्ती, रसूखदारों की ‘भक्ति’

आम ग्रामीणों पर सख्ती, रसूखदारों की ‘भक्ति’

आम ग्रामीणों पर सख्ती, रसूखदारों की ‘भक्ति’

सैलाना, रतलाम, मध्य प्रदेश: हाल ही में अनुविभागीय अधिकारी द्वारा कोरोना से बचाव हेतु गाइड लाइन जारी की गई थी। जिसमे नागरिकों व व्यवसायियों हेतु दिशा निर्देश थे। जिनमे व्यापारियों हेतु बिना मास्क लगाए पाए जाने पर प्रथम बार 100 रुपए व दूसरी बार 500 रुपए के अर्थदंड का प्रावधान किया गया था।

वैसे, प्रशासन के निर्देशानुसार कुछ दिनों पहले से ही मास्क ना पहनने पर आमजन हेतु निर्धारित अर्थदण्ड की कार्यवाही की जा रही थी।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई व उन पर अर्थदण्ड भी किया व अभी भी कर रहा है। लेकिन, लगता है कि यह सख्ती सिर्फ आसपास के गांवों से आने वाले आम जन पर ही दिखाई गई।

मास्क ना पहनने पर अर्थदण्ड सम्बन्धी दिशानिर्देश मिलने के बाद नगर परिषद के सहायक राजस्व निरीक्षक दौलत राम मकवाना अपने सहयोगी कर्मचारी के साथ वाहन चालको व राहगीरों से मास्क ना पहनने पर उन लोगों से भी अर्थदंड वसूल रहे है जिन्होंने अपने मुंह को रुमाल या गमछे से अच्छी तरह ढ़ंका हुआ होता है।

(वैसे उक्त कर्मचारी स्वयं ठीक से मास्क नहीं लगाए हुए होते हैं)

लेकिन लगता है उनका ध्यान नगर के ही रेस्टोरेंट व्यावसायियों पर नही गया जो कि मानव स्वास्थ्य से सीधे जुड़े खानपान सम्बन्धी व्यवसाय बिना मास्क लगाए धड़ल्ले से कर रहे हैं।

नगर में नाश्ता दुकान संचालक कोरोना से बचाव हेतु जारी की गई गाइड लाइन की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं व बेखौंफ होकर बिना मास्क के ही खाद्य पदार्थो का निर्माण व विक्रय कर रहे हैं जो कि जन सामान्य के लिए कभी भी नुकसान देह साबित हो सकता है।

लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले आमजन पर सख्ती दिखाकर छाती फुलाने वाला प्रशासन नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायियों विशेषकर नाश्ता दुकान संचालकों से ही बचाव सम्बन्धी गाइड लाइन का पालन करवाने में असमर्थ क्यों हैं?

यदि इस लापरवाही की वजह से कुछ होता है, तो इसके प्रति कौन जिम्मेदार होगा? प्रशासन को इस ओर शीघ्र ध्यान देना चाहिए।

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