बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं के बीच बेटीओं का बलात्कार

हमारी सरकार है चाहे कोई भी हो लेकिन काम वही है मौजूदा सरकार ने नारा दिया कि “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।” पर मैं पूछना चाहता हूं क्यों बताऊं मैं अपनी बेटी और बहनों को इसलिए कि कोई दरिंदा उसका बलात्कार कर दें, गाड़ी से कुचल दें, आग लगा दे या किसी मंजिले मकान के ऊपर से फेंक दे।

NCRB के दिए रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 में ही लगभग 3,59,849 बलात्कार केस दर्ज हैं। अभी तो इनसे अलग कई और भी होंगे जो इस डर के मारे कि उन्हें समाज क्या कहेगा, रिश्तेदार क्या कहेंगे या परिवार कैसे रहेगा की वजह से किस दर्ज ही नही हुआ हैं। आए दिन बलात्कार बढ़ रहे हैं। लोग कहते हैं, सोच बदलिए। हम आज इतने सालों से सोच ही तो बदल रहे हैं, जिसका नतीजा आए दिन बलात्कार बढ़ते जा रहा है। क्या बलात्कार रुकेगा?

अब और नहीं, सरकार को इस पर कड़ा कदम उठाना चाहिए। सरकार हर एक काम के लिए एक विशेष संगठन का निर्माण करती है, इस कारण को जड़ से उखाड़ने के लिए क्यों नहीं कर सकती। हमारे यहां राम मंदिर और मस्जिद बनाने के लिए तो संगठन बन सकते हैं। पर बलात्कार और शोषण जैसे घटनाओं को रोकने के लिए क्यों नहीं। हम क्यों भूल जाते हैं, कि हमारे सीने पर चलने वाली गोली हमारे धर्म या मजहब का पता नहीं करती, वह सिर्फ अपना काम करती है। हमारे बहन और बेटियों पर होने वाले यह शोषण और बलात्कार उनका धर्म जानकी तो नहीं करते। हम धर्म और मजहब के नाम पर तो करते ही रहते हैं क्या एक बार इंसान बनकर नहीं लड़ सकते हैं इन बलात्कारियों और शोषणकारीयों के खिलाफ।

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