Thursday, July 9, 2020
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हैशटैग #NYAY

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भारत की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने इस देश की बागडोर को दशकों तक संभाला है लेकिन फिर भी अपने वादों को पूरा नहीं कर पाने के लिए ये पार्टी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की आलोचना व उन्हें जिम्मेदार ठहराने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। और इस प्रयास में जो सबसे बड़ा मुद्दा कांग्रेस ने उठाया है वो है गरीबी हटाओ व धर्म की राजनीति।

ये वही पार्टी है जिसने एक वर्ग को खुश रखने के लिए अखंड भारत को कई हिस्सों में बाँट दिया। ये वही पार्टी है जिसने विदेशी ताकतों को खुश रखने के लिए सुभाष चंद्र बोस जैसी शख्सियत के योगदान को ही भुला दिया। ये वही पार्टी है जिसने वोटों की खातिर अपने चिन्ह को गाय और बछड़ा के रूप में दर्शाया। ये वही पार्टी है जिसने सत्ता की भूख में हमें इमरजेंसी के दौर में फेंक दिया। ये वही पार्टी है जिसने अपने ही घर के सदस्य फिरोज गाँधी को भी गुमनामी के अँधेरे में ढकेल दिया। ये वही पार्टी है जिसने गरीबी हटाओ का नारा तो दिया लेकिन गरीबी की बजाय गरीबों को ही हटा दिया। और अब एक बार फिर अपनी असफलता को छिपाने के लिए राहुल गाँधी NYAY लेकर आये हैं। तो NYAY को लेकर मैं राहुल जी से पूछना चाहता हूँ कि-

१. राहुल जी अगर सच में NYAY देना चाहते हैं तो १९८४ में हुए नरसंहार के पीड़ितों को NYAY दें, क्या राहुल जी ऐसा करेंगे?
२. १९७१ में जब आपकी पार्टी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया तो क्या वजह है कि देश में आज भी गरीबी अपना जाल बिछाए बैठी है, क्या राहुल जी बताएँगे ऐसा क्यों हुआ?
३. क्या आपके नए नारे ‘NYAY’ की सफलता का बोझ मिडिल क्लास उठाएगा? और अगर उठाएगा तो क्यों?
४. क्या आप और आपके नेताओं के पास प्रधानमंत्री को गाली देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है?

और शायद इसीलिए आज कांग्रेस का जमीन पर रहने वाला कार्यकर्ता गुणवत्ता की कमी व वंशवाद को देखकर हताश और निराश है। कांग्रेस और राहुल गाँधी अब भी नहीं समझ पाए हैं कि वो जितना प्रधानमंत्री को गाली दे रहे हैं आम जनता कांग्रेस से उतना ही दूर जा रही है। इस चुनाव ने कांग्रेस के पुराने और नए नेताओं के बीच की खाई को और ज्यादा चौड़ा कर दिया है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का मानना है कि कांग्रेस में गुणवत्ता के आधार पर कोई जगह नहीं है। राहुल जी चाहे कुछ भी करें, गाली दें या पार्टी की छवि को ख़राब करें, उनसे सवाल पूछने वाला कोई नहीं है। दुर्भाग्य है कि वरिष्ठ नेताओं के होने के वावजूद राहुल जी आये दिन एक नया बखेड़ा कर देते हैं, और एक बार फिर उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

क्या राहुल जी ऐसे नेताओं की बात सुनकर पार्टी के साथ NYAY करेंगे? अपनी इन्हीं गलतियों को लेकर आज कांग्रेस के वर्चस्व को बड़ी चुनौती मिल रही है और यदि ये गलतियां सुधारी नहीं गयीं तो २३ मई के बाद विपक्ष की जगह सिर्फ एक नाम रह जाएगा। क्या राहुल गाँधी वंशवाद की धुरी से अलग हटकर देश के साथ NYAY करेंगे?

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