Thursday, April 22, 2021
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राफेल: खोदा पहाड़ -निकला “रॉबर्ट वाड्रा”

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RAJEEV GUPTAhttp://www.carajeevgupta.blogspot.in
Chartered Accountant,Blogger,Writer and Political Analyst. Author of the Book- इस दशक के नेता : नरेंद्र मोदी.

कांग्रेस पार्टी और इसके नेताओं को सत्ता से बाहर रहने की आदत नहीं है- इन लोगों ने अपने ६० सालों के कुशासन में देश को इस कदर लूटा है कि सत्ता से बाहर जाते ही जैसे ही इनकी लूट बंद हो जाती है तो इन सबके पेट में जबरदस्त दर्द होने लगता है. पहले तो यह लोग दुष्प्रचार इस तरह से करते हैं कि कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आ ही नहीं पाती है और अगर कोई पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ अपनी सरकार बना भी ले तो यह लोग अपने षड्यंत्रों का सिलसिला तब तक जारी रखते हैं, जब तक वह सरकार सत्ता से बाहर ना हो जाए.

पिछले लगभग साढ़े चार सालों से राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी इसी तरह के षड्यंत्रों को अंजाम दिए जा रहे हैं, सोशल मीडिया की जागरूकता के चलते, इनके हर षड्यंत्र का भंडाफोड़ हो जाता है लेकिन यह लोग हार माने बिना किसी नए षड्यंत्र के जरिये देश में चुनी हुई सरकार को बदनाम करना शुरू कर देते है.

हिटलर ने अपने एक बयान में यह कहा था कि अगर आप चाहते हैं कि आपके सफ़ेद झूठ को  भी लोग सच मान लें तो उस झूठ को बार-बार तब तक दोहराते रहो, जब तक लोग उस झूठ को एकदम सच न मान लें. कांग्रेस के DNA  में ही हिटलरशाही घुसी हुई है और इसीलिए वह हिटलर की बताये गए इसी फॉर्मूले पर काम करके लगातार झूठ बोल बोल कर मोदी सरकार को बदनाम कर रही है.

रोहिल वेमुला दलित नहीं था लेकिन कांग्रेस लगातार आज भी उसे दलित कहती है, जज लोया के घरवाले कह कह कर थक गए हैं कि जज लोया की मौत स्वाभाविक रूप से हुई है लेकिन कांग्रेस उसकी मौत को हत्या साबित करने पर तुली हुई है. मोदी ने हर देशवासी को १५ लाख देने का वादा किया था, यह झूठ भी कांग्रेस आज तक फैला रही है और यह झूठ भी कि नेहरू-गाँधी परिवार ने देश की खातिर बलिदान दिया है. आधार कार्ड को कांग्रेस आज तक खतरनाक बता रही है और नकली दलित आंदोलन और नकली किसान आंदोलनों का भंडाफोड़ तो पहले ही सोशल मीडिया पर किया जा चुका है.

अब जो सबसे नया झूठ कांग्रेस निकाल कर लाई है वह  लड़ाकू जहाज़ राफेल की खरीद को लेकर है. राहुल गाँधी और उनके सुर में सुर मिलाकर गाने वालों का यह कहना है कि मोदी सरकार ने इस सौदे में कोई भ्रष्टाचार किया है. क्या भ्रष्टाचार किया है, कितना भ्रष्टाचार हुआ है, भ्रष्टाचार हुआ कैसे है और अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो उसका पैसा कितना कितना किसके खाते में गया है, इसके बारे में न राहुल गाँधी कुछ बता रहे हैं और न मीडिया में बैठे उनके चाटुकार बताने की स्थिति में हैं. हर छोटी मोटी बात पर आधी रात को भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटकाने वाली कांग्रेस पार्टी इस मामले के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों नहीं कर रही है? जाहिर है कोर्ट भी मामले का संज्ञान लेने से पहले वही बेसिक सवाल पूछेगा जो मैंने यहां ऊपर लिखे हैं और जबाब न देने पर मामले को दर्ज़ करने से ही मना कर दिया जाएगा जिससे कांग्रेस पार्टी की किरकिरी होगी वह अलग, मोदी सरकार के खिलाफ एक दुष्प्रचार करने का मुद्दा भी कांग्रेस के हाथ से चला जाएगा.

इसलिए कांग्रेस यह चाहती है कि अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं,मीडिया में बैठे चाटुकारों के जरिये इस मामले में जितना दुष्प्रचार करके मोदी सरकार की छवि को ख़राब किया जा सकता है, उतना कर लो. अगर यह तुक्का भी नहीं चला तो कोई और षड्यंत्र लेकर आ जायेंगे.

इस सारे तमाशे में जो असली खुलासा हुआ है उससे यह बात और निकलकर सामने आ रही है कि कांग्रेस सरकार ने राफेल बनाने वाली कंपनी से सौदे बाज़ी करते समय रोबर्ट वाड्रा के करीबी दोस्त संजय भंडारी की इसी मतलब से बनाई गयी कंपनी “ऑफसेट इंडिया लिमिटेड” को बीच में घुसाने की कोशिश की थी ताकि इस डील में जो भी कमीशन मिले वह इस कंपनी के जरिये वापस आ जाए. संजीव भंडारी ने रोबर्ट वाड्रा पर पहले से ही काफी “मेहरबानियां” भी कर रखी थीं. क्योंकि राफेल बनाने वाली कंपनी ने इस झंझट में पड़ने से मना कर दिया था, लिहाज़ा यह डील कांग्रेस सरकार ने रद्द कर दी.

लेख मेरे हिसाब से कुछ बड़ा हो गया है लेकिन चलते चलते इस डील को भी समझने की कोशिश करते हैं. मान लीजिये एक कांग्रेसी एक कार के शोरूम में कार लेने जाए और वहां मारुती आल्टो को खरीदने का सौदा इन शर्तों पर कर ले कि प्रति कार कीमत २ लाख रुपये होगी और उसमे से २०००० रुपये प्रति कार कमीशन अलग से किसी व्यक्ति या कंपनी को दिया जाएगा. कंपनी २ लाख रुपये में कार देने को सहमत हो गयी लेकिन उसने कमीशन देने से मना कर दिया और कांग्रेसी आदमी वापस आ गया.

अब सरकार बदल गयी और भाजपा का एक आदमी शोरूम में पहुंचा. उसे लगा कि मारुती आल्टो से कुछ काम बनने वाला नहीं है क्योंकि देश  की जरूरत से हिसाब से मर्सिडीज़ गाड़ी ठीक रहेगी. मर्सिडीज़ गाड़ी की कीमत मान लीजिये १२ लाख रुपये बताई गयी जिसे मोल भाव करके भाजपा के आदमी ने उसे ८ लाख रुपये में सौदा कर लिया. जब यह सौदा हो गया तो कांग्रेसी आदमी जो पहले ही अपने कमीशन मारे जाने की वजह से खिसियाया हुआ था, उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया कि देखो मैं जिस गाड़ी को २ लाख रुपये में ला रहा था, उसे भाजपा के आदमी ने ८ लाख रुपये में ख़रीदा है.

न खाता न कोई बही- जो राहुल गाँधी कहें, बस वही सही!

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