एक स्वर्णकार की याचिका : एक्साइज ड्यूटी पर हड़ताल बंद करो

आज 31 दिन हो गए है मुझे अपना व्यवसाय excise duty के विरोध में बंद किये हुए| देखा जाये तो, विरोध केवल शुरुआत के 15 दिन के लिए था, उसके बाद ये विरोध राजनितिक साजिश का हिस्सा बन गया|

ये विरोध हमारे वित्तीय मंत्री द्वारा सोने के गहनों पर 1 % excise duty के खिलाफ है|

पहले ये समझ लेते है कि ये विरोध किसके खिलाफ है| स्वर्णकार और गहनों के व्यापारी excise duty के खिलाफ नहीं, excise department के खिलाफ है| एक ऐसा department जो अपने Inspector Raj, अनगिनत forms और paperwork के लिए जाना जाता है| इसके अलावा इस department के पास अनगिनत अधिकार भी है जिससे व्यापारी भयभीत है|

इसी भय की वजह से हम व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन की शुरूरत की (जिस तरह 2012 में excise duty लगाने पे किया था)

इसके बाद अलग अलग संघटनों ने सरकार से बातचीत करना शुरू किया और अपनी मांगे उनके सामने रखी| सरकार ने धैर्य से हमारी सारी मांगे सुनी और एक सिरे से excise duty हटाने से मना कर दिया, लेकिन ये सांत्वना दी कि हमारी jewellery industry के तहत कानून में बदलाव किया जा सकता है, जिससे व्यापार और व्यापारी को किसी प्रकार की मुश्किलात ना हो|

सरकार ने अपनी तरफ से ये सफाई दी:

Excise Duty आने वाले GST का हिस्सा होंगी, सोने के आभूषणों पर उत्पाद शुल्क भी इसमें समाहित हो जायेगा|

सोना, Crude Oil के बाद भारत में सबसे ज्यादा आयात किये जानेवाली वस्तु है| Crude Oil पर 100 % से ज्यादा शुल्क लगाया जाता है, जबकि सोने पे सिर्फ 10 से 12 % शुल्क लगाया जाता है| Crude Oil एक आवश्यक वस्तु है जबकि सोना एक विलासिता वाली वस्तु है| भारत में ऐसा नहीं हो सकता कि आवश्यक वस्तु पर tax हो और luxury पर ना हो|

हर साल लगभग 1000 टन सोना भारत में आयात किया जाता है जिसका मूल्यांकन 35 अरब डॉलर है| इसमें से बहुत कम सोना वापस निर्यात किया जाता है और बाकी का सोना घरेलु बाजार में खप जाता है| इसकी वजह से विदेशी राजस्व का घाटा होता है और वित्तीय घाटा बढ़ जाता है|

काफी विचार विमर्श के बाद सरकार ने हमारी कुछ मांगे मान ली:

• एक समिति का गठन जिसमे विभिन्न ज्वेलरी संघटन के प्रतिनिधि, excise department के अफसर और सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे| यह समिति 60 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी. सभी संघटनों को इस समिति के समक्ष अपनी बात रखने का मौका मिलेगा|

• समिति के शिफारिश आने तक excise अफसर किसी भी प्रकार तलाशी और अधिग्रहण,  raid, गिरफ्तारी और अभियोजन जैसी कार्यवाही नहीं कर सकता, स्वर्णकारों द्वारा जारी किये हुए बिल को भी challenge नहीं कर सकता|

सरकार ने इसके तहत एक सर्कुलर 21 मार्च को जारी भी किया|

जब मांगे मान ली गयी और notify भी कर दिया गया तो ऐसा क्या बदल गया जिससे जूलर्स असंतुष्ट है और विरोध जारी रखे हुए है? क्या इसके पीछे कोई और सच्चाई है? आइये एक नज़र डालते है|

लगभग 30 लाख रुपये एक किलो सोने में आसानी से तब्दील हो जाती है| इससे काले धन को बढ़ावा मिलता है. हम सब जानते है Real Estate और Bullion काले धन के सबसे बड़े स्रोत है|

जब किसी व्यवसाय पर excise duty लगायी जाती है तब व्यापारी को stock declare करना पड़ता है| यह बात jewelers को हजम नहीं हुई| jewelers  यह सोच के परेशान हो गए कि उन्हें अपना स्टॉक declare करना पड़ेगा| ऐसा स्टॉक जो ज्यादातर ब्लैक में है या जिनका कोई हिसाब किताब नहीं है| Stock दिखाने के चक्कर में व्यापारी को अपना turnover बढ़ाना पड़ेगा जिसकी वजह से वो tax bracket में आ जायेगा| एक ऐसा डर की वर्षों से इकठ्ठा किया हुआ काला धन एक झटके में उजागर हो जायेगा व्यापारी को अंदर से खाये जा रही है| इसके अलावा और कोई वजह नहीं दिखती जिसके तहत व्यापारी विरोध करते रहें|

सरकार और Excise Department ने विभिन्न न्यूसपेपर में इस बारे में सफाई दी है| सरकार excise duty के वापसी के अलावा हर शर्त मान गयी है|

पर कुछ संघटनों के मुखियाओं और राजनीतिज्ञों ये बाते उनके सदस्यों को कभी नहीं बताएँगे.

• सभी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जिनमे छोटे कारीगर job work पे काम करते हैं excise duty के बाहर है.
• सभी रिटेलर्स जो ट्रेडिंग करते हैं वो excise duty के बाहर है.
• सभी wholesalers जो ट्रेडिंग करते हैं वह excise duty के बाहर है.
• स्वर्णकार जो bullion खरीद के कारीगर से मैन्युफैक्चरिंग करवाते हैं excise duty के तहत आते हैं जब उनका turnover 6 करोड़ रुपये ( लगभग 20 किलो ) के ऊपर जायेगा.
• बुलियन मर्चेंट excise duty के बाहर है.
• 80 % से ज़्यादा इंडस्ट्री excise duty के बाहर है. कोई भी इस सत्य से अवगत नहीं है क्योंकि उनका संघटन उनसे ये सच्चाई छुपा रहा है.

Excise Duty से अवगत होने के लिए ये FAQ शीट ज़रूर पढ़ें. http://gjf.in/excise_faq. php

क्रमशः, इन सब में एक ईमानदार जूलर का सबसे ज्यादा नुक्सान हो रहा है| उसकें पास कोई खरीदार ना होने की वजह से परिचालन व्यय बढ़ता जा रहा है. ऐसा रहा तो कारीगरों को निकालने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं रहेगा| इस वजह से भारी मात्रा में बेरोज़गारी बढ़ेगी|

बैंकों द्वारा जिन व्यापारियों ने क़र्ज़ लिया है वह विजय मालया की तरह बाहर आएंगे|

मेरा सभी स्वर्णकार संघटनों से ये अनुरोध है कि वह एक बार पुनर्विचार करें और strike खत्म करें| सरकार ने हमारी अधिकांश मांगे मान ली है, हमें कुछ स्वार्थी राजनेताओं और लोगों की बातों में आकर अपनी आजीविका पर लात नहीं मारनी चाहिए|

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