Thursday, December 3, 2020

TOPIC

selective narrative

हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना कहां तक उचित है??

विज्ञापन में दिखाए गए पात्रों के धर्म एक दूसरे से बदल दिए जाएं तो क्या देश में अभी शांति रहती। क्या तनिष्क के शोरूम सुरक्षित रहते। क्या लिबरल तब भी अभिभ्यक्ती की स्वतन्त्रता की बात करते।

समकालीन मुद्दे और वाम-पंथ

भारतीय संस्कृति के बारे में इतिहासज्ञों एवं विद्वानों के पास एक भी प्रमाण ऐसा नहीं है कि जो इस सनातन संस्कृति को संकीर्ण, परंपरावादी, धर्मांध, नारी विरोधी एवं दलित विरोधी साबित कर सके। किंतु, जब भी कोई दुष्कर्म जैसी घटना होती है तो उसके तमाम संदर्भों को भुलाकर चोट केवल सनातन के प्रतीकों पर होती है।

Taking charge of social media interactions – a guide for the naïve right

In this section, we will try to understand what sources of information can be used to gather the ammunition we need for our social media battles.

नॉटी मत बोलना, भैयाजी

पुरुषवादी सोच वाले मीडिया चैनलों, जनता और तीन तीन सरकारी जांच एजेंसियों ने मिलकर एक निर्दोष अभिनेत्री को ड्रग्स के आरोपों में जेल में डलवा दिया।

An elephant outrage

Now everyone had completely forgotten about the poor elephant and how she died while everyone is focused on which religion the accused turn out to be from. A deliberate attempt was made to whitewash the sins of the accused.

Ajaz Ashraf, of The Scroll, with his WRONG interpretation about a freedom fighter, says Savarkar justified the idea of rape as a political tool

Savarkar quotes Ravana saying, “What? To abduct and rape the womenfolk of the enemy, do you call it irreligious? It is Parodharmah, the greatest duty!” The actual text quotes in Sanskrit as राक्षसांनां परो; धर्म: परदारा विघर्षणम् However, what the Scroll writer conveniently ignores is “राक्षसांनां”. According to the quoted statement, it’s the duty of a demon/monster.

The Wire: An example of tarnished reporting

"An army colonel and a major were among five personnel killed in an encounter in north Kashmir that also saw the death of two alleged terrorists."- is the language of The Wire to describe Hindwara encounter

रविश कुमार- 19 साल की लड़की ने पाकिस्तान जिंदाबाद क्या कहा कि मंच पर घबराहट मच गई

रवीश कुमार का लगभग प्रत्येक प्राइम टाइम "It suites my agenda" वाले मॉडल पर आधारित होता है जिसमें वे उन सभी खबरों को प्राथमिकता देते हैं व बार बार करते है जो उनके राजनीतिक महत्वाकांक्षा को सूट करती हैजबकि हर उन अन्य खबरों पर वाइट वाश करते है जो उनके Selected narrative के अनुकूल नहीं होती है।

The masters of SELECTIVE outrage, who maintain pin drop silence on other issues

Dissent is a part of democracy, destruction is not.

Journalist Faye DSouza’s video on the NMC Bill hides more than it illuminates

To educate all stakeholders regarding the provisions of the Bill, her efforts seem intended to fan discontent among people about the Bill than to actually educate people.

Latest News

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 21

हमारे सनातन धर्म की मूल भावना "जीयो और जीने दो" तथा "सभी जीवो को अपना जीवन अपनी ईच्छा से जीने का अधिकार है" में निहित है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी अपने संपूर्ण जीवन काल मे प्रत्येक जीव के प्राण व दैहिक स्वतंत्रता को अमुल्य व सर्वोपरि मानकर प्रतिष्ठित किया

2020: An unprecedented, unpredictable, and uncertain year

Who could have imagined that the “unique 2020” would ironically turn into the most "unprecedented, unpredictable, and uncertain 2020" of historic proportions, perhaps not even worth remembering and writing about?

Mr. Ahmad Patel, they missed you!

Through the obituaries and condolences written by MSM journalists, one can easily see as to why these power brokers who used to enjoy the access to power corridors are so unnerved as they miss the absence of jugglers and conjurers in current regime.

गुपकार गैंग द्वारा रोशनी एक्ट की आड़ में किया गया 25000 करोड़ रुपए का घोटाला!

व्यवस्था का लाभ उठाकर 2001 से 2007 के बीच गुपकार गैंग वालों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर को जहाँ से मौका मिला वहाँ से लूटा, खसोटा, बेचा व नीलाम किया और बेचारी जनता मायूसी के अंधकार में मूकदर्शक बनी देखती रही।

Death of the farmer vote bank

While in the case of a farmer the reform delivered double benefit but the political class faces double whammy, that of losing its captive vote bank that was dependent on its sops and secondly losing the massive income they earned as middlemen between the farmer and the consumer. Either the farmer is misinformed or wrongly instigated, otherwise it is impossible to conceive that any farmer should be actually unhappy or opposed for being given more choices, as to whom to sell their produce.

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एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

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भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

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वास्तव में सनातन में जिस वर्ण व्यवस्था की परिकल्पना की गई उसी वर्ण व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके समाज में जाति व्यवस्था को स्थापित कर दिया गया। समस्या यह है कि आज वर्ण और जाति को एक समान माना जाता है जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

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Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.