Monday, March 1, 2021
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Author_Rishabh

भारतीय संस्कृति, विज्ञान और अध्यात्म में अटूट आस्था रखता हूं। अजीत भारती जी जैसे लोगों को ध्यान से सुनना पसंद करता हूं। पुस्तकें पढ़ने का बहुत शोषण है‌। मूलतः कवि हूं लेकिन भारतीय संस्कृति, धर्म और इतिहास के बारे में की जा रही उल्टी बातों, फैलाई जा रही अफवाहों, न्यूज चैनलों की दगाबाजियों, बॉलीवुड द्वारा हिंदू धर्म और उसके लोगों पर किए जा रहे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष हमलों से आहत होकर लोगों को जागरूक करने के लिए स्वतंत्र वैचारिक लेख लिखता हूं और ट्विटर पर वैचारिक ट्वीट करता रहता हूं। जन्मभूमि भारत और मातृभाषा की बुराई असहनीय है। जय हिन्द।

लक्ष्मी बॉम्ब: हम पे ये किसने हरा रंग डाला?

जैसा कि सर्वविदित है, इस दुनिया में एक ही धर्म है, और वह धर्म ही दुनिया की सभी बुराइयों की जड़ है। वह धर्म पटाखों से प्रदूषण फैलाता है, गरीब के हिस्से का दूध और अन्न मूर्तियों पर चढ़ाता है अथवा यज्ञ में जलाता है। इस दुनिया में एक ही ऐसा धर्म है जो कट्टर है, अंधविश्वासी है और पता नहीं क्या क्या?

यह चुप बैठने का वक्त नहीं है, उठो और अपनी अस्मिता के लिए स्वयं लड़ो

अर्नब के साथ जो हुआ वह इन सात दशकों में न जाने कितनी बार हुआ है। सवाल यह नहीं कि कौन किस पार्टी का है, सवाल यह है कि यहाँ इस देश में पत्रकार, सब पत्रकारों जैसी पत्रकारिता क्यों नहीं कर सकता।

समकालीन मुद्दे और वाम-पंथ

भारतीय संस्कृति के बारे में इतिहासज्ञों एवं विद्वानों के पास एक भी प्रमाण ऐसा नहीं है कि जो इस सनातन संस्कृति को संकीर्ण, परंपरावादी, धर्मांध, नारी विरोधी एवं दलित विरोधी साबित कर सके। किंतु, जब भी कोई दुष्कर्म जैसी घटना होती है तो उसके तमाम संदर्भों को भुलाकर चोट केवल सनातन के प्रतीकों पर होती है।

व्यंग्य कविता: ऑपइंडिया पर एफआइआर कराने वाली विचारधारा की मृत्यु का शोकसंदेश

अगर राइट विंग वाले भूल जाएँगे की प्रेस की आज़ादी के लिए सिर्फ़ वामपंथी ही रो सकते हैं, तो हम आपको याद दिलाते रहेंगे, जब भी आप कुछ ऐसा करेंगे की जो हमारे नरेटिव को सूट ना करें! आपको अपने दायरें में रहना होगा.

महाराष्ट्र में मजदूरों की मृत्यु और माननीयों की राजनीति पर लिखी एक ग़ज़ल

गरीब मजदूरों को अपने राज्य से भगाने और केंद्र पर बेवजह के आरोपों तथा अन्य समकालीन घटनाओं पर लिखित एक गजल।

दलाल धूर्त मीडिया और नासमझ लोग!

रियाज़ टेलर का बेटा था। टेलर का बेटा तो हमारे भी गांव में है। लेकिन वह तो आतंकी नहीं बना। उसकी भूख ने तो उसे हथियार उठाने के लिए मजबूर नहीं किया। वह क्यों पढ़लिखकर आईएएस बना।

भारत का संदिग्ध विपक्ष

हमारे देश का विपक्ष रचनात्मक और नैदानात्मक राजनीति करने के वजाय अवरोध और प्रतिरोध की राजनीति कर रहा है जो कि किसी देश के शासन को तानाशाही में बदल सकता है।

बॉलीवुड जगत की अशोभनीय धूर्तता

हिंदुओं के लिए बॉलीवुड में एक ही प्रिय चरित्र है और वह है विलेन। विलेन भी ऐसा-वैसा नहीं, सदैव ब्राह्मण (आर्टिकल 15, केदारनाथ, मदर इंडिया) अथवा ठाकुर/ऊंची जाति क्षत्रिय (अनगिनत फिल्में जैसे कलंक) और ब्राह्मण/ठाकुर केवल विलेन ही नहीं दिखाए जाते बल्कि विशुद्ध धार्मिक प्रतीकों के साथ दिखाए जाते हैं।

सनातन धर्म के दुश्मन बनाम रक्षक: राम मंदिर फैसला

प्रभु ने अपने भक्त तुलसीदास जी की इन चौपाईयों को सच करते हुए अनंत शरीर धारण किए जिन्होंने आज प्रत्येक भारतवासी को गौरवमय संस्कृति और अपने देश के वास्तविक पिता को समझने और उनको उचित स्थान देने के महती कार्य का शुभ अवसर दिया।

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