Thursday, March 4, 2021

TOPIC

Lies of Arvind Kejriwal

Defogging Delhi’s budget claims

This article is not about evaluating Delhi’s performance. This is merely a check about the tax collection claim.

6 सालों में ही केजरीवाल का राजनीतिक पतन और राष्ट्रीय राजनीति का अंत

केजरीवाल के पिछले कुछ सालों की राजनीति और फैसलों को देखें तो स्पष्ट होता है कि केजरीवाल ने खुद को दिल्ली तक सीमित रखने का फैसला कर लिया है। वरना केजरीवाल की शख्सियत रही है आरोप- प्रत्यारोप, मोदी विरोध, और फ्री आधारित राजनीति।

दिल्ली के मालिक का डैमेज कंट्रोल?

टीवी पर आकर रोज भाषण देना और जमीन पर काम करना दोनो ही अलग बात है; खुद गाजियाबाद में थे और मालिक बन बैठे दिल्ली के अब दिल्ली में बस दिल्ली वालों का इलाज होगा।

Hysteria and corona: Two viruses killing Delhi

Distress accounts of struggle, misery, and ordeal have emerged on social media narrating ordeal of Delhiites in battling the coronavirus

Delhi: Is Arvind Kejriwal doing enough?

Delhi has a CM who is only busy in doing press conferences, spreading extravagantly on his PR who even in this crisis instead of coming out and battling this pandemic is enjoying all the comforts of luxuries.

यक्षप्रश्न: अरविंद केजरीवाल की उस रसोई तक आजतक मीडिया क्यों नहीं पहुँच पाया?

यह विचारणीय है कि झण्डेवालान में सेवा भारती की रसोई को वही मीडिया दिल्ली सरकार की रसोई बना कर पेश करता है। जबकि वही दिल्ली का मालिक रोज चैनल्स पर आकर खुद का गुणगान करता नहीं अघाता।

दिल्ली में बनी “टुकड़े टुकड़े गैंग” की सरकार

केजरीवाल को जो ३७ प्रतिशत वोट मिले हैं उनमे से ३० प्रतिशत वोट तो रोहिंग्या बांग्लादेशी घुसपैठियों और मुस्लिम कट्टर पंथियों के हैं जो पिछले काफी समय से नागरिकता कानून का विरोध भी इसीलिए कर रहे थे  कर रहे थे क्योंकि कानून लागू होते ही इन लोगों को धक्के मारकर बाहर निकला जाना तय है.

Mission Buniyaad: A mission to weaken the foundation

Kejriwal has killed the careers and future of at least one third of Delhi's government school students and their parents have no clue about it. In fact, they are very happy about it "today" but are going to regret it pretty soon.

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