Friday, April 23, 2021

TOPIC

Leftists against Hinduism

भारत में वामपंथी उग्रवाद: बदलता स्वरूप

आइए इस लेख के माध्यम से नक्सलवाद से जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझने की कोशिश करते हैं. और इस विषय पर आंतरिक सुरक्षा के जानकार और स्वयं सरकार का क्या रवैया था, क्या है और क्या होना चाहिए ; इस पर विस्तार से बात करते हैं.

The myth of mythology

Civilization’s ultimate goal is flourishing and thriving in all its glory including science, culture and philosophy. But if survival of a civilization becomes an end in itself, it is beginning of the ultimate decay So, if we as the inheritors of this great Santana civilization don’t act now in reestablishing our connections to the past, our future is doomed like all other civilizations that have perished so far.

वामपंथ: “अ” से लेकर “ज्ञ” तक (दूसरा भाग)

आज बात करेंगे कि "साम्यवाद" और "वामपंथ" आखिर किस तरह काम करते हैं, किस तरह भारत देश की व्यवस्था में ये लोग सेंधमारी कर चुके हैं और इनका "नक्सलियों" से क्या संबंध है?

पितृसत्तात्मक समाज से वामपंथी नारीवादियों का महायुद्ध

यदि समाज इतना ही पितृ सत्तात्मक था तो ब्रह्म वादिनी स्त्रियाँ कहाँ से आयीं? यदि समाज इतना ही पितृ सत्तात्मक था तो शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का निर्णायक भारती को क्यों बनाया गया?

Left, not so left

Historically the left- liberals or communists maintained aloofness form religion, but as there is always an Indian touch to everything this is not the case in India.

लेफ़्टिस्ट और लिबरल लोग

लेफ्ट और लेफ्टिस्ट तो थे ही पर ये अलग से जमात पैदा हो गयी लिबरल- ये ना घर के है ना घाट के इन्हें बस लाइम लाइट में रहने की आदत है इसके लिए ये कुछ भी कर सकते है।

Ayan invasion theory- A myth

What’s shocking to me is that a certain section of India holds up to the AIT and consistently tries to prove it right despite many genetic/ archeological/ historical evidences. Now who is that section that I am referring to ? The “left” of India.

भगवान का धर्मंतार्ण हिन्दोस्तान में

हिंदुत्व धर्म से ज्यादा एक जीवन पद्धति है, जिसे कोई भी गैर-हिन्दु अपने धर्म में आस्था रखते हुए भी सिर्फ़ श्रधाभाव, सहिष्णुता और अच्छे आचरण से अपना सकता है।

धर्मो रक्षति रक्षितः, परन्तु कैसे?

नरेन्द्र मोदी एवं अन्य उच्च-स्तरीय नेता जैसे माननीय राजनाथ सिंह, अमित शाह आदि का गर्व के साथ अपनी हिन्दू आत्मता को सार्वजनिक जीवन में रखने से सामान्य हिन्दू को यह आत्मविश्वास एवं साहस मिला कि वह जिन बातों को निजी कक्षों में साथियों और मित्रों के बीच ही कहता था, अब उन्हें अभय होकर कर सड़कों तक पर कह पा रहा है।

Moronic inferno ft. Pankaj Mishra

Sullen faced leftist liberals especially the NDTV anchors covering the elections must know by now that Indian public no longer trusts their view or prescriptions.

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