Wednesday, November 30, 2022
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“जयमा सां युधिस्पति:” “मैं उन लोगों को हराता हूं जो मेरे खिलाफ लड़ते हैं”- आईएनएस विक्रांत

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Nagendra Pratap Singh
Nagendra Pratap Singhhttp://kanoonforall.com
An Advocate with 15+ years experience. A Social worker. Worked with WHO in its Intensive Pulse Polio immunisation movement at Uttar Pradesh and Bihar.

मित्रों कल तक जो असमाजिकता के चादर में सिमटे अर्धपुरुष  और अर्धनारियाँ “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” का मजाक बनाते थे और अभद्र टिप्पणियां करके शान से सीना तान कर चल रहे थे आज तेजस और आईएनएस विक्रांत ने उन्हें कहीं भी मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। आज सम्पूर्ण विश्व में तेजस और आईएनएस विक्रांत की चर्चा जोरों पर है। आज हम आईएनएस विक्रांत की बात करेंगे क्योंकि इसकी उपस्थिति ने सम्पूर्ण विश्व में भारतीय प्रतिभा, शौर्यता, तेजस्विता और ज्ञान और विज्ञान पर पकड़ का डंका बजा डाला है। परन्तु चलिए पहले आपको ९० के दशक में लेकर चलते हैं और बताते हैं की आज का आईएनएस विक्रांत हमारे लिए इतना क्यों महत्वपूर्ण है

मित्रों वर्ष १९८७ की बात है जब देश में स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गाँधी के बेटे स्वर्गीय श्री राजीव गाँधी की सरकार थी। ५०० मिलियन डालर देकर ब्रिटिश सरकार से एक नवल एअर क्राफ्ट खरीदा जाता है, जिसे ब्रिटिश नेवी २५ वर्ष उपयोग करके उसे कबाड़ में डाल चुकी थी। अब ब्रिटिश नौ सेना के पास ३ वर्ष तक यूँ ही कबाड़ के रूप में पड़े रहने के पश्चात जब ये एयरक्राफ्ट भारत आता है तो माननीय राजीव गाँधी जी इस पर अपने पत्नी के परिवार के सदस्यों के साथ १० दिन की छुट्टियाँ मनाने निकल पड़ते हैं। राजीव गाँधी के साथ उनकी पत्नी सोनिया गाँधी, सोनिया  गाँधी की माताजी मायनो, उनकी बहन, उनके जीजाजी, राहुल प्रियंका के चार दोस्त, अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ बच्चन भी छुट्टियाँ मनाने एयरक्राफ्ट पर निकल पड़ते है। आपको बता दे की एयरक्राफ्ट को एक दिन के लिए सचालित करना होता है तो आज के समय करीब १० करोड़ रुपये का खर्चा आता है। और आपको बता दे की किसी भी सूरत में किसी विदेशी नागरिक को एयरक्राफ्ट पर आने की अनुमति नहीं दी जा सकती परन्तु कांग्रेसियो के राजमाता का रिश्तेदार हो तो उनके लिए हर विषय वास्तु से समझौता किया जा सकता है। आपको यह भी बता दे की जब भी एयरक्राफ्ट सचालित होता है तो उसके साथ एक स्पेशल सबमरीन भी भेजनी पड़ती है और एक स्पेसल  सेटेलाईट लिंक भी लेना पड़ता है जो बहुत ही खर्चीला होता है , पर कांग्रेसियो के राजमाता की ख़ुशी के लिए पूरा देश खतरे में आ जाये तब भी इनको कोई फर्क नहीं पड़ता।

मित्रों आपको यह भी याद दिला दे की अंग्रेजो के जाने के पश्चात भी भारतीय नौ सेना के झंडे में उनकी झलक दिखाई पड़ती थी वो लाल रंग का “जार्ज क्रास” आज भी गुलामी के प्रतीक के रूप में भारतीय नौ सेना के झंडे पर मौजूद था, जिस पर सबसे पहला प्रहार स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के सरकार में किया गया और झंडे से उस मनहूस लाल रंग के जॉर्ज क्रॉस को हटा दिया गया| परन्तु राष्ट्रवादियों की सरकार जाते ही अंग्रेजो की चाटुकारिता करने वाले नंगे भूखो ने फिर से गुलामी की चादर ओढ़ ली और उस मनहूस क्रॉस को पुन: झंडे से चिपका दिया | परन्तु एक बार फिर राष्ट्रवादियों की सरकार के अस्तित्व में आने के पश्चात पूरी उम्मीद है की इस गुलामी के प्रतीक जार्ज क्रास  के अस्तित्व को झंडे से हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जायेगा।

खैर आइये बात करते हैं आत्मनिर्भर भारत में निर्मित  प्रथम युद्धपोत आईएनएस विक्रांत की:-

आईएनएस विक्रांत एक विमानवाहक पोत है जिसका निर्माण  भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा किया गया है। यह भारत में बनने वाला प्रथम  विमानवाहक पोत है। विक्रांत नाम का संस्कृत में अर्थ “साहसी” है। विक्रांत का आदर्श वाक्य है “जयमा सां युधिस्पति:”, जिसका अर्थ है “मैं उन लोगों को हराता हूं जो मेरे खिलाफ लड़ते हैं”।

पृष्ठभूमि:-

स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने वर्ष १९९९, प्रोजेक्ट ७१  एयर डिफेंस शिप (ADS) के तहत एक विमानवाहक पोत ‘INS विक्रांत’ के विकास और निर्माण को मंजूरी प्रदान की। वर्ष २००१  में, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने एक स्पष्ट स्की जंप के साथ ३२००० टन के STOBAR (शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्ट रिकवरी) डिज़ाइन को दिखाते हुए एक ग्राफिक चित्रण जारी किया। विमान वाहक परियोजना को अंततः जनवरी २००३ में औपचारिक सरकारी अनुमोदन प्राप्त हुआ। इसके पश्चात अगले १० वर्षो तक कांग्रेस की सरकार ने उसके निर्माण को किसी न किसी कारण ठंडे बस्ते में डाले रखा।

स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत २६२ मीटर (८६० फीट) लंबा और ६२ मीटर (२०३ फीट) चौड़ा है, और लगभग ४५,000 मीट्रिक टन विस्थापित करता है। इसमें स्की-जंप के साथ STOBAR कॉन्फ़िगरेशन है। ‘INS विक्रांत’ के डेक को मिग-29K जैसे विमान को वाहक से संचालित करने में सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ‘INS विक्रांत’ तीस विमानों  के वायु समूह का सञ्चालन कर सकता है, जिसमें २४-२६ फिक्स्ड-विंग लड़ाकू विमान शामिल होंगे, मुख्य रूप से मिग-२९ के, इसके अलावा १० कामोव का-31 या वेस्टलैंड सी किंग हेलीकॉप्टर ले जाये जायँगे।इसकी डिजाइन में शामिल Ka-31 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग (AEW) भूमिका को पूरा करेगा और सी किंग पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमता प्रदान करेगा।

आईएनएस विक्रांत का एक योजनाबद्ध आरेख:

विक्रांत दो शाफ्ट पर चार जनरल इलेक्ट्रिक एलएम 2500+ गैस टर्बाइन द्वारा संचालित है, जो 80 मेगावाट (110,000 एचपी) से अधिक बिजली पैदा करता है। वाहकों के लिए गियरबॉक्स एलेकॉन इंजीनियरिंग द्वारा डिजाइन और आपूर्ति की गई है। पोत की लड़ाकू प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) के हथियार और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम को टाटा पावर स्ट्रेटेजिक इंजीनियरिंग डिवीजन और मार्स, रूस के सहयोग से विकसित किया गया है। यह भारतीय नौसेना के लिए एक निजी कंपनी द्वारा विकसित पहला सीएमएस है, और इसे २८ मार्च २०१९ को नौसेना को सौंप दिया गया था। विक्रांत भारतीय नौसेना के नौसेना डिजाइन निदेशालय द्वारा डिजाइन किया जाने वाला पहला विमानवाहक पोत है और कोचीन शिपयार्ड द्वारा बनाया जाने वाला पहला युद्धपोत है। इसके निर्माण में बड़ी संख्या में निजी और सार्वजनिक फर्मों की भागीदारी है।

डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी (DMRL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने भारत में DMR 249 ग्रेड स्टील के निर्माण के लिए आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया। कथित तौर पर, बोकारो स्टील प्लांट, झारखंड, भिलाई स्टील प्लांट, छत्तीसगढ़ और राउरकेला स्टील प्लांट, ओडिशा में हल, फ्लाइट डेक और फ्लोर डिब्बों के लिए तीन प्रकार के 26,000 टन  विशेष स्टील का निर्माण किया गया था। इसके कारण, विक्रांत भारतीय नौसेना का पहला जहाज है जिसे पूरी तरह से घरेलू स्तर पर उत्पादित स्टील का उपयोग करके बनाया गया है।

इसके साथ ही मुख्य स्विच बोर्ड, स्टीयरिंग गियर और वाटर टाइट हैच का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो द्वारा मुंबई और तलेगांव में किया गया है। पुणे में किर्लोस्कर समूह के संयंत्रों में उच्च क्षमता वाले एयर कंडीशनिंग और रेफ्रिजरेशन सिस्टम का निर्माण किया गया है। अधिकांश पंपों की आपूर्ति बेस्ट और क्रॉम्पटन द्वारा की गई है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (बीएचईएल) ने इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीएमएस) की आपूर्ति की, जिसे एक इतालवी कंपनी एवियो द्वारा स्थापित किया जा रहा है। गियर बॉक्स की आपूर्ति एलकॉन इंजीनियरिंग द्वारा की गई थी और विद्युत केबलों की आपूर्ति निक्को इंडस्ट्रीज द्वारा की जा रही है। Fincantieri ने प्रोपल्शन पैकेज के लिए परामर्श प्रदान किया जबकि रूस के Nevskoye Design Bureau ने एविएशन कॉम्प्लेक्स को डिज़ाइन किया। और  प्रकार भारत में एक गौरवमय अध्याय की शुरुआत हुई।

आज सम्पूर्ण विश्व में चाहे वो अमेरिका हो, ब्रिटेन हो या जापान हो हर देश में भारत की बढ़ती शक्ति और उसके सामर्थ्य की चर्चा हो  रही है। आज अमेरिका की नौ सेना पहली बार भारत की नौ सेना को चीन के लिए चुनौती के रूप में देख रही है और उसका विश्वास है की एशिया में अब भारत एक महाशक्ति है जो चीन को उसकी भाषा में उत्तर दे सकने पूर्णतया सक्षम है।

धर्मज्ञो धर्मकर्ता च सदा धर्मपरायणः।
तत्त्वेभ्यः सर्वशास्त्रार्थादेशको गुरुरुच्यते॥

अर्थात: धर्म को जाननेवाले, धर्म मुताबिक आचरण करनेवाले, धर्मपरायण, और सब शास्त्रों में से तत्त्वों का आदेश करनेवाले गुरु कहे जाते हैं और हमारा देश इसीलिए विश्वगुरु कहलाता है, जब १५ अगस्त २०२२ को हमारे प्रधानमंत्री अपने भाषण से सम्पूर्ण विश्व को महाशक्ति भारत का  स्पष्ट सन्देश दिया था, तभी ये तय हो गया था कि अतिशीघ्र कुछ बड़ा होने वाला है और हमने देखा की आखिरकार २ सितम्बर २०२२ को  भारतीय आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया के सपनो को साकार करता आईएनएस विक्रांत पुरे दमखम के साथ सागर की लहरों के साथ अठखेलियां करने लगा, जिसे देखकर दुश्मनो के हौसले पस्त हो गए। मित्रों याद रखिये इस प्रकार के वाहक युद्धपोत बनाने की क्षमता केवल कुछ (२ या चार) देशो के पास है और अब हमारा देश भी उनकी श्रेणी में सम्मिलित हो चूका है।

नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने।
विक्रमार्जितसत्त्वस्य स्वयमेव मृगेंद्रता।।

शेर को जंगल का राजा नियुक्त करने के लिए न तो कोई राज्याभिषेक किया जाता है, न कोई संस्कार। अपने गुण और पराक्रम से वह खुद ही मृगेंद्रपद प्राप्त करता है। यानि शेर अपनी विशेषताओं और वीरता (‘पराक्रम’) से जंगल का राजा बन जाता है। इसी प्रकार आईएनएस विक्रांत भी अपने गुणों के कारण मृगेंद्रपद को प्राप्त कर चूका है।

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