Sunday, October 2, 2022
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नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ ने मोदी सरकार से बोस के अवशेषों को भारत लाने की मांग की

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Jitendra Meena
Jitendra Meenahttps://www.jitendragurdeh.in
Independent Journalist | Freelancers .

Subhas Chandra Bose: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) को याद किया। इस बीच जर्मनी में रहने वाली नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ ने मोदी सरकार से बोस के अवशेषों को भारत लाने की मांग की। अनीता ने कहा कि नेताजी के पूरे जीवन में देश की आजादी से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं था। दरअसल, सुभाष चंद्र बोस की मौत एक रहस्य है कई लोगों ने दावा किया कि उनकी मौत एक हवाई दुर्घटना में हुई। उनके अवशेष तब एक जापानी अधिकारी द्वारा एकत्र किए गए थे और टोक्यो में रेनकोजी मंदिर में संरक्षित किए गए। तब से पुजारियों की तीन पीढ़ियों ने अवशेषों की देखभाल की है।

नेताजी की मृत्यु सबसे बड़ा रहस्य :

अनीता बोस लंबे समय से कह रही हैं कि नेताजी के अवशेष रेंकोजी मंदिर में है उनके कई भारतीय रिश्तेदारों ने भी सरकार से कई बार यह पता लगाने का अनुरोध किया कि नेताजी ताइवान से कहां गए थे? ऑस्ट्रिया में जन्मी सुभाष चन्द्र की बेटी अनीता बोस फाफ है व उनकी माता का नाम एमिली शेंकल है। अनीता बोस फाफ केवल चार महीने की थी, जब नेताजी अंग्रेजों से लड़ने के लिए जर्मनी से दक्षिण पूर्व एशिया चले गए।

इंडिया टुडे के दौरान एक इंटरव्यू में अनीता से जब पूछा गया कि क्या वह इस बात को मानती हैं कि 18 अगस्त 1945 को ताइपे के ताइहोकू एयरोड्रोम के पास हुई विमान दुर्घटना में उनके पिता की मृत्यु हो गई थी?

इस पर उनका कहना है ‘मेरा मानना है कि इस बात की काफी आशंका है कि उनकी मृत्यु की वजह विमान दुर्घटना हो ‘लेकिन वह टोक्यो के एक बौद्ध मंदिर में कलश में रखी अस्थियों का डीएनए परीक्षण करवाना चाहती हैं ताकि पता लगाया जा सके कि ये नेताजी की हैं या नहीं।

डीएनए टेस्ट की मांग

79 वर्षीय अनीता बोस ने कहा कि वह टोक्यो में एक मंदिर में संरक्षित नेताजी के अवशेषों के डीएनए टेस्ट के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर के पुजारियों और जापान सरकार को भी मुकदमे से कोई आपत्ति नहीं है। वे अवशेष सौंपने के लिए तैयार हैं।

लोगो से अपील:

अनीता ने अपने बयान में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों से अपील करते हुए कहा कि नेताजी के जीवन में उनके देश की आजादी से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं था। अब समय आ गया है कि कम से कम उनके अवशेषों को भारत की धरती पर लौटाया जा सके।

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