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26/11 हमला: पहला विदेशी नागरिक जिसे भारत में दी गई फांसी

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26/11 हमला: पहला विदेशी नागरिक जिसे भारत में दी गई फांसी

नई दिल्ली,(प्रीतम शर्मा): देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुम्बई या यूं कहें सपनों की नगरी मुंबई में हुए आतंकवादी हमले ने ना सिर्फ पूरे देश को दहला दिया था बल्कि पूरे विश्व को भयभीत भी कर दिया था। मुंबई में हुए इस आतंकवादी घटना में 26 से लेकर 29 नवंबर के बीच कुल 166 बेगुनाह लोग मारे गए और वहीं करीब 300 लोग घायल हुए थे।

मुंबई हमले के पीछे कोई और नहीं बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान का हाथ ही था। आतंक का गढ़ कहा जाने वाला पाकिस्तान अपने नापाक मंसूबे से देश में इस तरह के जघन्य अपराध को अंजाम देकर पूरे इंसानियत को शर्मशार करने का काम किया था। मुंबई हमले का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था.

पहला विदेशी नागरिक जिसे दी गई फांसी

आपको बता दें कि आतंकी कसाब ने जब इस जघन्य कृत्य को अंजाम दिया था तब उसकी उम्र महज 21 साल ही थी। अजमल कसाब स्वतंत्र भारत में पहला विदेशी नागरिक है जिसे फांसी दी गई। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उस वक्त के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा 5 नवंबर को अजमल कसाब की दया याचिका खारिज किए जाने के बाद ही उसे फांसी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।

इसके लिए एक विशेष टीम का चयन किया गया, जिसे 25 वर्षीय अजमल कसाब को गुप्त तरीके से पुणे की यरवडा केंद्रीय कारागार लाने और यहां फांसी देने तथा उसे दफ्न करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ऐसे में कसाब को चोरी छिपे फांसी देने के लिए मुम्बई के आर्थर रोड जेल से पुणे लाया गया। राष्ट्रपति कार्यालय से मिली फाइल पर उस वक्त के तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने 7 नवंबर को हस्ताक्षर कर दिया, जिसके बाद अगले ही दिन उस फाइल को महाराष्ट्र सरकार के पास भेज दिया गया।

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बेहद ही कम लोगों को थी कसाब के फांसी की जानकारी

अजमल कसाब को 21 नवंबर की सुबह फांसी दी जाने वाली है इस बात की जानकारी बेहद ही कम लोगों को थी। जिन अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी गई थी उनमें महाराष्ट्र के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजीव दयाल, मुम्बई के पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह, यरवडा जेल के प्रमुख मीरान बोरवंकर मुख्य रूप से शामिल थे। इसके अलावा राज्य में कानून-व्यवस्था एवं खुफिया विभाग के बड़े अधिकारियों, मुम्बई सीआईडी और पुणे के कुछ बड़े पुलिस अधिकारियों को भी इस बात की जानकारी दे दी गई थी।

कसाब को 12 नवंबर को दी गई फांसी की जानकारी 

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में नागपुर केंद्रीय कारागार के अलावा पुणे स्थित यरवडा जेल में ही दोषियों को फांसी दिए जाने की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में मुम्बई से पुणे की दूरी कम होने के कारण अजमल कसाब को पुणे लाया गया और फांसी देने के लिए एक विशेष जल्लाद को बुलाया गया। जानकारी के मुताबिक जेल के अधिकारियों ने कसाब को 12 नवंबर को बताया कि उसे फांसी दी जानी है। महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के अनुसार यह जानकारी सामने आई कि अजमल कसाब को मुम्बई की आर्थर रोड जेल से 19 नवंबर को एक विशेष विमान द्वारा पुणे के यरवडा जेल लाया गया।

कसाब की आखिरी इच्छा 

फांसी दिए जानेंसे पहले जैसा कि हमेशा से होता आया है कि दोषियों की अंतिम इच्छा पूछी जाती है। ऐसा ही अजमल कसाब के साथ हुआ। अजमल कसाब से उसकी आखिरी इच्छा पूछी गई। तब उसने बताया कि उसकी कोई आखिरी इच्छा नहीं है। पर हां उसने यह जरूर कहा कि उसके फांसी दिए जाने की जानकारी उसकी मां को दे दी जाय। इसके अलावा उसने यह साफ कर दिया कि वह फांसी से पहले किसी भी तरह का कोई बयान जारी नहीं करेगा ना ही उसकी कोई अंतिम इच्छा थी।

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