Friday, July 19, 2024
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देवदत्त पटनायक बने मिथ्या-इतिहासकार व रिसर्चर

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मिथ-मिथ्या करने वाले देवदत्त पटनायक जी ने अचानक से जेनेटिक/अनुवांशिक रिसर्च और इतिहास पर बोलने लगे हैं। शायद वो मिथ्यागिरी छोड़ इतिहासकार बनना चाहते हैं लेकिन लगता है कि वो इस चक्कर में मिथ्या-इतिहासकार ज़्यादा बन रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट और नीचे प्रस्तुत ट्वीट किया है कि अतीत में बहुत से प्रवासियों के बसने से आज का भारत बना है।

अब मिथ-मिथ्या करने करने वाले ने रिसर्च बताकर कुछ लिखा है वो भी बिना किसी प्रमाण के तो यह हमने सोचा कि यह काम तो कोई पप्पू भी कर सकता है किन्तु देवदत्त जी के पास तो हज़ारों लिबरल भक्तों की टोली है और हम तो कुछ लाइक्स भी भिक्षा के दान से पाते हैं। इसलिए बिना तथ्य और तर्क के कोई हमें क्यों पढ़ेगा? गूगल पर आपको भी बहुत सी जानकारी मिलेगी इस विषय पर किन्तु २०१६ से पहले की वीडियो न देखें क्योंकि भारतीय डीएनए पर नयी खोज २०१५ में हुई है और देवदत्त जी बुज़ुगों की तरह पुरानी कथा गा रहे हैं। गलती से या जानबूझकर यह आपकी समझ पर छोड़ते हैं। तो पहले बात सात बिंदुओं की और फिर हिंदुत्व-इतिहास की करते हैं।

प्रवासी आगमन के सात बिंदु

  1. वैसे तो पूरी मानव जाति ही अफ्रीका से निकली है इसलिए पहले बिंदु के हिसाब से तो पूरी दुनिया ही प्रवासी है।
  2. बिंदु दो में ईरान के निओलिथिक काल (१२०००-३५०० ई० पू०) के किसानों की भारत आने की बात कही जाती है जोकि हड़प्पा सभ्यता पर हुए २०१५ के अनुवांशिक अनुसन्धान शोध में गलत पायी है। बल्कि पाया यह गया कि जो ईरानी आये भी वो निओलिथिक काल के अंत में आये और वो खेती से पूर्ण रूप से अनिभिज्ञ थे।
  3. आर्य बाहर से आये है यह प्रपंच फैलाने की कोशिश की गयी है जोकि जेनेटिक शोध (एक और लिंक), पुरातत्व शोध और भाषीय शोध दोनों शोधों में गलत पायी गयी है।
  4. तिब्बत वाले तो आज भी वेलकम हैं जी।
  5. हूण, कुषाण आदि आक्रमणकारी २००० साल पहले आये पर वो भारतीय समाज और संस्कृति को अपनाकर मन से भी भारतीय हो गए। हिन्दू संस्कृति को कोई क्षति नहीं हुई।
  6. तुर्क व् मंगोल आक्रमणकारी थे प्रवासी नहीं। इस्लाम को ज़बरदस्ती थोपा गया।
  7. यूरोपीय भी आक्रमणकारी थे। भारी लूट व् ज़बरन धर्मांतरण

सभी लिंक्स देखने के बाद आपको कोई शक नहीं होगा कि केवल मुस्लिम और यूरोपीय आक्रमणकारियों ने ही भारतीय संस्कृति को क्षति पहुंचाई है और यह तथ्य है। कथित ‘हिंदुत्व इतिहास’ अगर ऐसा कहता भी है तो कुछ भी असत्य नहीं है। अगर किसी इतिहासकार यह ट्वीट की होती तो कह सकते थे कि ठेके खुलने का फायदा उठाकर किसी ने ज़्यादा पीकर लिखा होगा किन्तु मिथ-मिथ्या एक्सपर्ट देवदत्त जी की इतिहास के मामले में नासमझी करना समझा जा सकता है।

(अजीत भारती जी से अनुरोध है कि इस विषय पर एक वीडियो बनायें और देवदत्त जी के कच्चे इतिहास को पक्का करके उनके दिमाग में बैठा दें।)

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