सांसों को रोकता-लव जिहाद

पुणे में हाल ही में हुए एक हत्या ने कुछ पुराने ज़ख्मो को कुरेद दिया. खुशी परिहार नाम की 20 वर्षीय एक लड़की को उसके बॉयफ्रेंड अशरफ़ शेख ने बड़े ही बेरहमी से मार दिया. वजह खुशी की किसी अन्य लड़के के साथ दोस्ती बताई जा रही. अपराध की हद तो ये थी अशरफ़ ने ख़ुशी के चेहरे को बुरी तरीके से बिगाड़ दिया, अपने आप को बचाने के लिए उसने खुशी के कलाइयों पर अपने नाम के टैटू को मिटाने के लिए उसकी कलाइयों को भी क्षत-विक्षत किया. अब आप कहेंगे की हां ये तो हिंदुस्तान में अक़्सर होता रहता है घरेलू कलह में और मामूली झगड़े अक्सर बड़े हो जाते हैं लेकिन सोचने से पहले थोड़ा रुकिए और फिर सोचिये क्या खुशी की ये गलती थी की उसका अन्य लोगों से भी दोस्ती थी, या फिर ये गलती थी की वो अशरफ से इस कदर प्यार में थी की उसने अपना नाम तक बदल रखा था – जायरा शेख. अब आप कहेंगे ऐसे एक प्रगतिशील हिन्दू लड़की अपना नाम क्यों बदलेगी. और यही वो जगह है जहां लव जिहाद का सवाल उठाते हैं।

इससे पहले की मै इस केस और लव जिहाद के बारे में आगे बात करूँ आपको थोड़ा पीछे ले जाना चाहूंगा।

साल था 2011 केरल की अखिला अशोकन नाम की 18 वर्ष की एक हिन्दू लड़की जो की पढाई के लिए अपने घर से दूर जाती है वहां उसके रूम में उसकी मुलाकात 2 लड़कियों से होती है जो की मुस्लिम समुदाय से आती थी, समय जैसे बढ़ा दोस्ती बढ़ती गयी, उन दोनों लड़कियों को देख अखिला का भी मन नमाज़ और कुरान पढ़ने में हुआ ये था उसका इस्लाम के साथ पहली मुलाक़ात. फेसबुक के जरिए उसकी मुलाकात जहां नाम के एक मुस्लिम युवक से हुई, दोस्ती बढ़ी, प्यार हुआ और दोनों ने शादी का फैसला किया अब दिलचस्प बात ये थी की जहां ने अखिला का नाम बदल कर हादिया कर दिया यानि धर्म परिवर्तन इस बात से के.एम अशोकन जो की अखिला के पिता थे बिल्कुल तैयार नही हुए… उन्होंने जब जहां के बारे में पता किया तो उसके तालुकात इस्लामिक स्टेट से हैं इसकी खबर पता चली वो कोर्ट में गए और कोर्ट ने ये कहते हुए यह शादी ख़ारिज की कि जहां के तालुक्क इस्लामिक स्टेट से जो की फंडिंग कर ऐसे युवकों को हिन्दू लड़कियों से बात कर उनसे शादी करते हैं।

केरल के ही कोर्ट ने पहली बार लव जिहाद शब्द का इस्तेमाल किया, तनिक भी आश्चर्य नही है की लव जिहाद का पहला केस केरल से था आखिर केरल से ही हर साल बड़ी संख्या में कुछ कथित भटके हुए नौजवान इस्लामिक स्टेट में भर्ती होते हैं।
2011 के बाद लव जिहाद के ऐसे कई किस्से आते हैं और कहीं खो जाते हैं।

खुशी परिहार की मौत मात्र एक हत्याकांड नही एक सोची समझी साज़िश जिसे कुछ बुद्धजीवी ये कह के दबा रहें की प्यार में अक्सर ऐसे लोग कर जा रहें. हालांकि मैंने सच्चे प्यार में लोगों को ह्रदय परिवर्तन करते देखा है धर्म परिवर्तन करते नही।

लव जिहाद सिर्फ अखिला, खुशी और उनके जैसे कई लड़कियों का ही मुद्दा नही है ये देश का मुद्दा हमारे और आपके बहन बेटियों का मुद्दे है।

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