नए सामाजिक क्रांति की वाहक बनेगी आयुष्मान भारत योजना

स्वतंत्रता के पश्चात देश में सरकारों ने आम आदमी को केंद्र में रखकर तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की और कई नारे दिए। मगर सरकारों की नीति और नियत साफ ना होने के कारण तमाम योजनाएं ढकोसला ही साबित हुई हैं। इन योजनाओं ने आम आदमी के बजाय योजनाकारों को ही लाभ पहुंचाया और उनकी संपन्नता में बढ़ोतरी की।

स्वास्थ्य के क्षेत्र की ही चर्चा की जाए। देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इलाज महंगा होने के कारण गरीब आदमी की पहुंच से बहुत दूर है। अनेकों लोग संसाधनों के अभाव में बिना इलाज के ही दम तोड़ जाते हैं। गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आम आदमी अपना घर-बार, जमीन, जेवर आदि तक बेच डालता है। देश की विशाल व विविधता भरी जनसंख्या को सस्ता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बनी रही है।

इसका प्रमुख कारण यह रहा कि नीति-नियंताओं ने इस चुनौती से निबटने के सरसरी प्रयास ही किए। इस गंभीर समस्या की ओर पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार ने ध्यान दिया। मोदी सरकार ने गरीबों को मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के लिए “आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना” के रूप में एक क्रांतिकारी पहल की है। यह विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जिसे आम बोलचाल में “मोदी केयर” बोला जा रहा है, को केंद्रीय कैबिनेट ने 21 मार्च, 2018 को स्वीकृति दी थी। इसे मोदी सरकार की मजबूत संकल्प शक्ति कहना चाहिए कि योजना की स्वीकृति के छह माह के भीतर 23 सितंबर, 2018 को यह पूरे देश में लागू हो गई। मोदी केयर में देश के निर्धन/निर्बल वर्ग के 10 करोड़ से अधिक परिवारों अर्थात पचास करोड़ की आबादी को प्रतिवर्ष पांच लाख तक का इलाज सरकारी व निजी अस्पतालों में मुफ्त मिलेगा। यानि देश की 40 प्रतिशत जनसंख्या कैशलेस उपचार का लाभ उठाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी व्यक्ति खासकर महिलाएं, बच्चे व वृद्ध योजना से वंचित न हो जाएं, सरकार ने परिवार के आकार व आयु पर किसी तरह की सीमा निर्धारित नहीं की।

मोदी केयर में 1350 से अधिक बीमारियों को शामिल किया गया है। योजना में सर्जरी, डे केयर, दवा, जांच आदि की सुविधा प्रदान की गई है। रोगियों की सुविधा के लिए अस्पतालों में आरोग्य मित्र तैनात किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत कवर लाभार्थी को पैनल में शामिल किए गए देश के किसी भी सरकारी/निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति होगी। योजना की जरूरत व उसके प्रभाव का आंकलन करने के लिए यह तथ्य पर्याप्त है कि मोदी केयर के लागू होने के मात्र 100 दिन के भीतर देश भर में 6.85 मरीजों का मुफ्त इलाज किया गया।

निष्कर्ष रूप में यह कहना उचित होगा कि मोदी केयर के प्रभावी क्रियान्वयन से देश के स्वास्थ्य परिदृश्य में गुणात्मक परिवर्तन होगा। सामाजिक असंतुलन को समाप्त कर सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सकेगा। दूसरे अर्थों में कहा जाए तो मोदी केयर एक नई सामाजिक क्रांति लाने के लिए इतिहास में दर्ज होगी। हमारे ऋषियों-मुनियों ने “सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:” की जो कल्पना की थी, उसको साकार करने में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।

इसके साथ ही यहां उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार की “अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना” की चर्चा करना प्रासंगिक होगा। टीएसआर सरकार मोदी सरकार से प्रेरणा लेकर एक कदम और आगे बढ़ गई। उत्तराखंड सरकार ने योजना में प्रदेश के सभी वर्गों के नागरिकों को लाभार्थियों की श्रेणी में ले लिया। उत्तराखंड के सभी 23 लाख परिवार इस स्वास्थ्य बीमा में कवर होंगे। यूरोप के कई देशों में सरकार अपने सभी नागरिकों को मुफ्त में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। उसी तर्ज पर उत्तराखंड देश का पहला एकमात्र ऐसा राज्य होगा जो अपने सभी नागरिकों को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करेगा।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना की प्रासंगिकता अधिक है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता न होने और निजी अस्पतालों में मंहगे उपचार के कारण आम आदमी को अपने इलाज के लिए मन मसोस कर रह जाना पड़ता था। मगर प्रदेश सरकार ने निर्धन वर्ग के साथ अन्य सभी वर्गों के लोगों को भी एक बड़ी राहत दी है। प्रदेश के सभी नागरिक पांच लाख तक का इलाज 150 से अधिक सरकारी व निजी अस्पतालों में करा सकेंगे। प्रदेश सरकार ने सामान्य बीमारियों में मरीज को पहले सरकारी अस्पताल में भर्ती करने और रेफर करने पर निजी अस्पताल में भर्ती करने की सुविधा दी है। इसके विपरीत आपातकालीन मामलों में मरीज को सीधे निजी अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है। साथ ही राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को कुछ मासिक अंशदान के साथ असीमित इलाज की सुविधा की सौगात दी है। प्रदेश सरकार ने पूर्व में संचालित मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना समेत कुछ अन्य योजनाओं को इसमें समाहित किया है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की असफलता का एक बड़ा कारण राज्य सरकार द्वारा बीमा कंपनी के साथ करार किया जाना था। मगर नई बीमा योजना में राज्य सरकार ने खुद ट्रस्ट बना कर इस योजना को अमली जामा पहनाया है।

बहरहाल, राजनीतिक आलोचना-प्रत्यालोचना को छोड़ दिया जाए तो किसी के लिए भी यह नकारना कठिन होगा कि अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के रूप में टीएसआर सरकार ने अपने समकालीनों के समक्ष एक लंबी लकीर खींच दी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य बीमा का कवच देकर न केवल ज्वलंत व जरूरी मुद्दे पर अपनी संवेदनशीलता प्रदर्शित की है, अपितु प्रदेशवासियों खासकर पर्वतीय क्षेत्र के जनमानस को महंगे इलाज की दुश्वारियों से चिंता मुक्त कर दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सबके लिए स्वास्थ्य बीमा के रूप में “टीएसआर कवच” एक नए परिवर्तन का कारक बनेगा।

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