Thursday, December 3, 2020

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#RamMandir

Ram Mandir, Supreme Court and Munawwar Ranas of India: Decoding Ayodhya verdict

he great Urdu poet questioned Ex CJI Ranjan Gogoi’s honesty and credibility and refused to believe Supreme Court’s Ayodhya verdict as “justice”.

अयोध्या के बाद मथुरा मेंं भी मंदिर बनाने के मांग के बीच आया HeTA के नये कैंपेन का बिलबोर्ड, कहा इस जन्माष्टमी चमड़ा मुक्त...

रक्षाबंधन की तरह ही जन्माष्टमी पर भी HeTA के नये कैंपेन का बिलबोर्ड सामने आया, कहा कृष्ण का अनुसरण करते हुए गाय को अपना दोस्त मानें और इस जन्माष्टमी चमड़ा मुक्त बनें।

मंदिरों के देश में न्याय मांगते मंदिर

आइए जानते हैं कुछ प्रमुख मंदिरों के बारे में जो आज मस्जिद का रूप लिए हुए हैं और न्याय मांग रहे हैं।

राम मंदिर निर्माण से राम राज्य की ओर

सच्चे लोकनायक के रूप में प्रभु श्री राम ने जन जन की आवाज को सुना और राजतंत्र में भी जन गण के मन की आवाज को सर्वोच्चता प्रदान की। राजनीति में शत्रु के विनाश के लिए कमजोर, गरीब और सर्वहारा वर्ग को साथ जोड़ कर सोशल इंजीनियरिंग के बल पर उस युग के सबसे बड़ी ताकत को छिन्न- भिन्न कर दिया। ज्ञात इतिहास में अनेकों पराक्रमी, परम प्रतापी, चतुर्दिक विजयी और न्यायप्रिय राजा हुए लेकिन सही शासन का पर्याय रामराज्य को ही माना गया।

Rise of a new era

Modern generations will never know how much it cost to our ancestors, Karsevaks and the ones who have struggled for this since decades.

Ram Janmabhoomi- A political and legal history

From 1885, Ramlala was denied his literal BIRTH RIGHT (place)!

Ram Mandir in Ayodhya: Symbol of Indian renaissance

The building of Lord Ram in Ajodhya is not a symbolic. It is revival and accentuation of concept of Lord Ram.

History re-written

There is total polarisation. Either you are Left or Right. The middle path is lost. Perhaps now another Buddha or Krishna is required to show the way where none exists.

JNU and Indian history research

Biggest blunder to Indian history begun with elimination of Hindu Literature from historical value.

Dear people, vote is a collective responsibility!

In this election season being world’s largest democracy we need to understand what vote meant for voter not the nominated candidate.

Latest News

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 21

हमारे सनातन धर्म की मूल भावना "जीयो और जीने दो" तथा "सभी जीवो को अपना जीवन अपनी ईच्छा से जीने का अधिकार है" में निहित है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी अपने संपूर्ण जीवन काल मे प्रत्येक जीव के प्राण व दैहिक स्वतंत्रता को अमुल्य व सर्वोपरि मानकर प्रतिष्ठित किया

2020: An unprecedented, unpredictable, and uncertain year

Who could have imagined that the “unique 2020” would ironically turn into the most "unprecedented, unpredictable, and uncertain 2020" of historic proportions, perhaps not even worth remembering and writing about?

Mr. Ahmad Patel, they missed you!

Through the obituaries and condolences written by MSM journalists, one can easily see as to why these power brokers who used to enjoy the access to power corridors are so unnerved as they miss the absence of jugglers and conjurers in current regime.

गुपकार गैंग द्वारा रोशनी एक्ट की आड़ में किया गया 25000 करोड़ रुपए का घोटाला!

व्यवस्था का लाभ उठाकर 2001 से 2007 के बीच गुपकार गैंग वालों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर को जहाँ से मौका मिला वहाँ से लूटा, खसोटा, बेचा व नीलाम किया और बेचारी जनता मायूसी के अंधकार में मूकदर्शक बनी देखती रही।

Death of the farmer vote bank

While in the case of a farmer the reform delivered double benefit but the political class faces double whammy, that of losing its captive vote bank that was dependent on its sops and secondly losing the massive income they earned as middlemen between the farmer and the consumer. Either the farmer is misinformed or wrongly instigated, otherwise it is impossible to conceive that any farmer should be actually unhappy or opposed for being given more choices, as to whom to sell their produce.

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एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

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भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

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वास्तव में सनातन में जिस वर्ण व्यवस्था की परिकल्पना की गई उसी वर्ण व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके समाज में जाति व्यवस्था को स्थापित कर दिया गया। समस्या यह है कि आज वर्ण और जाति को एक समान माना जाता है जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

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Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.