Thursday, April 18, 2024

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Kashi

ज्ञानवापी, इस्लाम हि नहीं, अब्राहम से भी प्राचीन है

जब इस धरा पर ना तो अब्राहम थे, ना यहूदी थे, ना ईसाई थे और ना इस्लाम था और यही नहीं जब ना तो रोमन सभ्यता थी, ना तो बेबिलोनिया की सभ्यता थी, ना तो मिश्र की सभ्यता थी, ना मेसोपोटामिया अस्तित्व में थी और ना माया और यूनानी सभ्यता थी, तब भी हमारे भोले बाबा की काशी थी जिसे आज आप बनारस या वाराणसी के नाम से जानते हैँ।

काशी की धरा अब डोल रही है मुक्ति मुक्ति बोल रही है – कविता

काशी की धरा अब डोल रही है; मुक्ति मुक्ति बोल रही है. बाबा का नंदी जाग उठा है; प्रभु के दर्शन को खड़ा है

Restoration of glory of Sanathan Dharma and true narration of history of Bharat by PM Modi

“For Every Aurangazeb, there has been a Shivaji”- One of the most powerful & meaningful statements reflecting the history of world’s most ancient civilization...

काशी विश्वनाथ का केस: हिन्दू के लिए क्या है इस केस का महत्त्व

जब अब काशी विश्वनाथ का केस आगे बढ़ रहा है, तो कुछ लोग पूछ रहे है की हिन्दुओ के पास इतने हजारो मंदिर है इतने ज्योतिर्लिंग है तो काशी विश्वनाथ में ऐसा क्या है, हिन्दू तो किसी और मंदिर से भी काम चला सकते हैं। उनके लिए ये पोस्ट पढ़ना जरूरी है, और काशी के लोगो के लिए भी जो वहाँ रहते तो है लेकिन उन्हें ये नहीं पता की काशी कितना महत्वपूर्ण स्थल है।

A deliberate attempt of Varanasi

A city beyond imagination, a city where India starts and ends. A city of magical moments and experience of life.

अयोध्या के बाद मथुरा मेंं भी मंदिर बनाने के मांग के बीच आया HeTA के नये कैंपेन का बिलबोर्ड, कहा इस जन्माष्टमी चमड़ा मुक्त...

रक्षाबंधन की तरह ही जन्माष्टमी पर भी HeTA के नये कैंपेन का बिलबोर्ड सामने आया, कहा कृष्ण का अनुसरण करते हुए गाय को अपना दोस्त मानें और इस जन्माष्टमी चमड़ा मुक्त बनें।

A Nandi that’s facing the wall

The original temple of Kashi was demolished by Aurangzeb and there was no Kashi Vishwanath temple for more than 100 years. Later in 1775, Ahalyabai Holkar built a new structure adjacent to Gyanvapi Mosque which we now worship as Kashi Vishwanath Temple.

विकास पथ पर संसदीय क्षेत्र वाराणसी

४ वर्ष में न सिर्फ अनवरत विकास-कार्य हुए अपितु वर्षों से लंबित योजनाओं को भी मुकाम मिला।

आदर्श ग्राम के रूप में ग्राम ककरहिया का चयन

आदर्श ग्राम जयापुर एवं नागेपुर के बाद, प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ग्राम ककरहिया भी विकास पथ पर अग्रसर है।

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