Thursday, June 20, 2024

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Judicial system

क्या ये न्यायिक प्रणाली (Judicial System) है?

देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में १०% न्यायधीशों को छोड़ दे तो बाकी बचे सभी कालेजियम सिस्टम की हि उपज हैँ। यदि आप अंग्रेजों की मानसिकता और सोच रखने वाले सिस्टम का हिस्सा हैँ, तो आप कुछ भी बन सकते हैँ, परन्तु आप सिस्टम में नहीं है तो आप कुछ भी करने लायक़ नहीं है।

भारत में न्याय का महत्व

भारत में न्यायपालिका एक महत्वपूर्ण संस्था है जो लोगों को न्याय देती है। न्यायपालिका का मुख्य उद्देश्य न्याय के माध्यम से समाज में संतुलन बनाए रखना होता है। इसके लिए न्यायपालिका के न्यायाधीशों का काम होता है दोषियों को सजा देना और निर्णय देना।

The Supreme Court is out of order

Unsurprisingly, the Court has never taken notice of numerous instances where Hindu Gods & Goddesses have been insulted and religious sentiments of the Hindu community have been grievously hurt.

न्यायालय या कानून के आधार पर फैसले देने वाले सरकारी कार्यालय

हर आदमी ये सोचता है कि न्यायालय से उसे न्याय मिलेगा परन्तु क्या न्यायालय कि शरण में जाने पर उसे वाकई न्याय मिलता है या फिर न्याय कि आस में वर्षो न्याय के दरवाजे पर दस्तक देते देते उसकी उमर निकल जाती है पर उसका केस उसके मरने के बाद भी जिंदा रहता है और कोर्ट या अदालतो में वैसे हि अकारण तारीखें पड़ती रहती हैं।

Courts are the battlefield of legal mercenaries

Justice is costly, it comes with a price. It comes with a price tag that some simply cannot afford.

The sacred thread of Rakhi and our Hon’ble Justices

Dear hon’ble keepers of law, are Hindu traditions synonyms to the iron shackles in your books, which are used to restrict criminals from committing crimes?

समान नागरिक संहिता- देश की जरूरत

जब एक देश –एक टैक्स लागू किया जा सकता है, और एक देश –एक चुनाव की बात चल रही है, तो समतामूलक समाज निर्माण के उदेश्य की पूर्ति हेतु एक देश एक कानून क्यों नहीं लागू किया जा सकता है।

The bar of being at “The Bar”

The present structure of the Indian judicial system is a continuation of what was left to us by the colonial rulers.

Justice Anand Venkatesh’s strong vaccine for medical college admission taint virus

Justice Anand Venkatesh deserves our commendations for his ruthlessly cold and objective orders sticking to the letter of the law and spirit of it as well.

Jury is still out on the Babri demolition verdict

t would make robust common, logical and legal sense to de-clutter the maze to appreciate and possibly understand that it would be unfair and unjust to accuse the Judiciary of forsaking its duty or even allude to any unseen hand of the executive.

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