Monday, March 1, 2021

TOPIC

Indian pseudo feminism

‘Their’ Feminism is limited; ‘ours’ is not!

Bharat has always offered women equal and at times superior opportunities, be it the archery division of army in Chanakya’s time, performing a yagna, conferring degrees like Ganini, Mahattara,etc; or mastering the 64 Kalas that was a must for a woman that included art of solving riddles, mechanics, knowledge of foreign languages, etc.

Feminism movement- helping or hurting Bharatiya women?

Articles are written, conferences are organised, special programs and advertisements are on television and there are celebrations on women’s day all over the world, Sounds cool, doesn’t it?

Is application of western feminist logic to Indic practices justifiable?

Self styled feminists eagerly wait for occasions like Navaratri and Durgostsava to slander Indic virtues. But to what extent does this criticism holds ground is a matter of question which we need to address.

Western feminism विष, नारी शक्ति अमृत है

विश्व के मुख्य तीन बड़े धर्म इस्लाम, क्रिश्चियनिटी और सत्य सनातन हिंदू धर्म में से हिंदू धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जिसमें परमेश्वर के स्त्री रूप को समान मान्यता दी गई है। भगवान शिव को कई अलग-अलग रूप में पूजा जाता है। जिनमें से एक है उनका अर्द्धनारीश्वर रूप। शिव का यह अवतार स्त्री और पुरुष की समानता दर्शाता है।

सुनो तेजस्विनी, सिगरेट, शराब, ड्रग्स, गाली गलौच “कूल” नहीं है

पिछले लगभग ढाई दशकों में कुछ अपवादों को छोड़कर स्त्री विकास या स्त्री सशक्तीकरण पर बाज़ार और उपभोक्ता संस्कृति का प्रत्यक्ष प्रभाव रहा है, जिसके कारण उसका संघर्ष शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, निर्णय क्षमता और अधिकार, आध्यात्मिक विकास जैसे मूल विषयों से भटक कर, “मैं जो चाहूं वो करूँ” पर सिमट कर रह गया है।

A case of conditional feminism

Why is the definition of feminism so shallow that a woman would support another woman ONLY if her agenda is met? Are we giving the right environment to our future generations?

Religious secularism

With the hypocritical standards which are followed in this country, a person is looked down upon to celebrate an historical moment in his religion.

सुनो तेजस्विनी, ब्रा स्ट्रैप में मत उलझो..

उदारवादी और वामपंथी महिला समूहों ने ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास किया मानो, ब्रा स्ट्रैप छुपाने के लिए टोका जाना ही आज की लड़की के जीवन की सबसे बड़ी समस्या है।

फेमिनिज्म वायरस की भारतीय सेना में घुसपैठ

सेना शायद राजनीतिक, मीडिया या सामाजिक दबाव में महिलाओं को रियायत दे भी दे, मगर क्या मुश्किल समय और सेना की कठोर नौकरी में आने वाली कोई आपातकालीन स्थिति हमको कोई रियायत देगी?

पितृसत्तात्मक समाज से वामपंथी नारीवादियों का महायुद्ध

यदि समाज इतना ही पितृ सत्तात्मक था तो ब्रह्म वादिनी स्त्रियाँ कहाँ से आयीं? यदि समाज इतना ही पितृ सत्तात्मक था तो शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का निर्णायक भारती को क्यों बनाया गया?

Latest News

Recently Popular