Tag Archives: Fashion of abusing Hinduism

मैं और तथाकथित सेकुलरिज्म

मोदी हेटिंग में इतने अंधे हो चुके हैं की ना अपना भला दिख रहा है ना देश का. और अगर ये इनका सेकुलरिज्म है, तो ये सेक्युलरसिम इन्हे मुबारक.

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हिंदुत्व भावनाओं का अधिपतन -क्या यह प्रारब्ध है या निजकर्म

हज़ारो वर्षो से वैदिक सभ्यता,भारतीयता का जो उपहास व निम्नस्तरीयता का जो भाव विदेशी आक्रांताओ द्धारा प्रचलित रहा है वो आज भी जीवित है, तर्क, आलोचना, टिप्पड़ियाँ, कुंठा से ना हमारा भूतकाल पुनः राम राज्य बन जायेगा ना ही हम भारतियों की व्यथा को शांत कर पायेगा।

मोदी जी से ईर्ष्या की पत्र राजनीति

तथाकथित बुद्धिजीवी ऐसी घटनाओं की प्रतीक्षा में रहते हैं जिससे ये राष्ट्र की छवि धूमिल कर सके। ये एक एजेंडे के तहत कार्य करते हैं। नागरिकों को अपने दायित्व को समझना होगा व आवेश में कानून का उल्लंघन करने से बचना होगा।

सती प्रथा: एक समग्र विश्लेषण

विधवा विवाह और सती प्रथा दो विपरीत प्रथाएँ हैं जिनका सह-अस्तित्व कभी भी संभव नहीं। अर्थात अगर विधवा विवाह प्रचलित है तो सती प्रथा का कोई औचित्य ही नहीं है। निस्संदेह सती प्रथा मूल हिंदू धर्म का कोई अंग नहीं था। फिर यह कुरीति समाज में कैसे शुरू हुई?

गुस्सा या आदत?

बाबरी के गुस्से से दंगो को जस्टिफाई करने वालों ये बताओ की जून 1851 में “माइनॉरिटी”-पारसी दंगो को कैसे जस्टिफाई करोगे? बस एक छोटा सा लेख ही तो लिखा था “चित्रा दिनन दर्पण” नामक मैगजीन ने।

अश्वमेध यज्ञ और फैली भ्रांतियाँ

वर्तमान में स्वघोषित बुद्धिजीवी हिंदुत्व की आलोचना कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। धर्मग्रन्थों को बिना समझे उनमें लिखी बातों का मनमाना अर्थ निकलकर दुष्प्रचार करना इन तथाकथित बुद्धिजीवियों का शौक बन गया है।

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