Friday, December 9, 2022

TOPIC

Cultural diversity in India

पृथक-पृथक संस्कृतियों का विकास एवं उत्थान, पारस्परिक सहिष्णुता एवं समन्वय से ही संभव

भारत सिर्फ एक देश ही नहीं अपितु एक राष्ट्र भी है। जिसकी संस्कृति, ज्ञान एवं विचार का अनुशीलन, अनुपालन और अनुसरण संपूर्ण विश्व प्राचीन काल से ही करता आया है।

विविधता या विभाजन

आज देश को बोस के विचारों को और गम्भीरता से पढ़ने और समझने की ज़रूरत है, भगत सिंह के सारे लेखों को पढ़ने समझने की ज़रूरत है, ज़रूरत है कि सावरकर और अम्बेडकर के विचारों को भी खुले दिमाग़ से समझा जाए और विभाजनकारी सोच को पूरी तरह ख़त्म किया जाए।

Nationalism and spirit of one India is not against diversity and plurality – Let us support Prime Minister Narendra Modi

Nationalism when we invoke and the ethos of one India when we kindle, such a move is only meant to protect and encourage the diversity and not to destroy it.

Diversity and quality can’t co-exist

It so stupid to see that people who advocate for equality among all castes, creeds, races, religions and gender, are the same people who say we should uphold India's diversity

काश, इस कुम्भ के बहाने ही इंडियन स्टेट को विविधता की समझ आ जाती

यदि इंडियन स्टेट के कर्ताधर्ताओं (चाहे नेता हों या प्रशासन या न्यायालय) को हिंदुत्व की इन विविध सुंदरताओं की रत्ती भर भी समझ होती तो सबरीमाला जैसे मूर्खतापूर्ण निर्णय न आते।

Why being a Hindu is an integral part while being an Indian

What is my idea of India? Can I negate the fact that it is my religion that identifies me as an Indian? A curious colleague influenced me to explore it.

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