Thursday, December 3, 2020

TOPIC

Bihar Politics

Poll 2020, thumbs up to BJP’s Corona management & Tejaswi politics

This result has reduced the grand old party to the level of political pariah not only in Bihar but also in all over India, meaning any party before going to forge alliance with Congress-Gandhi has to think twice before forging alliance as benefit is doubtful.

What Bihar election results teaches to Hindus

BJP won 74 seats in Bihar election while RJD won 75 seats But the problem why Owaisi party won 5 seats needs to be examined.

What do the Bihar elections 2020 exit polls say?

The exit polls are out and it looks pretty clear that Bihar is going to see Tejaswi Yadav become its youngest-ever chief minister at the age of 31. Looking at the way the NDA media representatives reacted to the poll is a clear indication that they knew the results long back. Unlike the left ecosystem, the people who oppose the politics of the Congress or the RJD will not go out crying that the EVMs were hacked or 'the death of democracy' because of this result. Everyone will accept the verdict and will actually work towards getting ahead of it and winning the next election. And that is how a democracy should work.

बिहार चुनाव और महिलाएं

यह जानकारी उत्साह जनक है और उससे भी ऊपर यह सुखद है कि बिहार के राजनीति में लालू के जाति गोलबंदी और और तुष्टीकरण से ऊपर महिला विकास और सशक्तिकरण की एक स्वस्थ और बहुप्रतीक्षित विमर्श शुरू हुई जो अब तब बिहार के राजनीतिक पृष्टभूमि से नदारद थी!

नए आत्मनिर्भर बिहार का रोडमैप

इस लेख में मैं लालू यादव जी के 15 वर्षों के शासन का तुलनात्मक अध्ययन एनडीए के 15 वर्षों के शासन से भी करना चाहता हूँ, ताकि यह तथ्य स्थापित हो सके की भाजपा अपने घोषणापत्रों में जो कहती है उसे पूरा करती है.

बिहार चुनाव फैसला किसके पक्ष में?

नीतीश कुमार जो कि वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं और सुशासन बाबू के नाम से जाने जाते हैं उन्होंने जेडीयू की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा जो कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं उन्हें टिकट देकर अपने सुशाशन की पोल खोल दी है।

बिहार में का बा

ये एक ऐसा सवाल है जो चुनाव ख़त्म होने के बाद अगले पांच साल हम जरुर पूछते है पर जब वोट डालने का समय आता है तब हम बिहार को भूल कर जातिवाद जैसे विभाजनकारी मानसिकता को चुन लेते है। इस मानसिकता को बदले बिना हम बिहार के विकास की कल्पना भी नहीं कर सकते।

बिहार: कोरोना,बाढ़ और चुनाव

मौर्यकालीन बिहार जो उस समय देश का सबसे शक्तिशाली और समृद्ध क्षेत्र हुआ करता था, आचार्य चाणक्य ने कल्पना भी नहीं की होगी कि विदेशी आक्रांता और देशी राजनीति उनके बिहार को गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, अपराध, भ्रष्टाचार और जातिवाद से इस तरह संक्रमित कर देगी।

बिहार की राजनीती और कोरोना वायरस से जंग

आप सोच रहे है इस महामारी की घड़ी के मै राजनीती की बात क्यों कर रहा हूँ तो आप पूछिए अपने आप से, क्या बिहार में राजनीती ही सबसे बड़ी महामारी नहीं है?

२०१९ का चुनाव और लालू परिवार

चुनाव नतीजों के बाद श्री लालू यादव जी अस्वस्थ हैं और चिकित्सक के सलाह के विपरीत अपना दिन का भोजन त्याग दिया है.

Latest News

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 21

हमारे सनातन धर्म की मूल भावना "जीयो और जीने दो" तथा "सभी जीवो को अपना जीवन अपनी ईच्छा से जीने का अधिकार है" में निहित है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी अपने संपूर्ण जीवन काल मे प्रत्येक जीव के प्राण व दैहिक स्वतंत्रता को अमुल्य व सर्वोपरि मानकर प्रतिष्ठित किया

2020: An unprecedented, unpredictable, and uncertain year

Who could have imagined that the “unique 2020” would ironically turn into the most "unprecedented, unpredictable, and uncertain 2020" of historic proportions, perhaps not even worth remembering and writing about?

Mr. Ahmad Patel, they missed you!

Through the obituaries and condolences written by MSM journalists, one can easily see as to why these power brokers who used to enjoy the access to power corridors are so unnerved as they miss the absence of jugglers and conjurers in current regime.

गुपकार गैंग द्वारा रोशनी एक्ट की आड़ में किया गया 25000 करोड़ रुपए का घोटाला!

व्यवस्था का लाभ उठाकर 2001 से 2007 के बीच गुपकार गैंग वालों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर को जहाँ से मौका मिला वहाँ से लूटा, खसोटा, बेचा व नीलाम किया और बेचारी जनता मायूसी के अंधकार में मूकदर्शक बनी देखती रही।

Death of the farmer vote bank

While in the case of a farmer the reform delivered double benefit but the political class faces double whammy, that of losing its captive vote bank that was dependent on its sops and secondly losing the massive income they earned as middlemen between the farmer and the consumer. Either the farmer is misinformed or wrongly instigated, otherwise it is impossible to conceive that any farmer should be actually unhappy or opposed for being given more choices, as to whom to sell their produce.

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Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.