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क्या शिवलिंग की इस महिमा से आप परिचित है? जानने योग्य तथ्य…

क्या शिवलिंग की इस महिमा से आप परिचित है? जानने योग्य तथ्य…

भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठाएं, हैरान रह जाएंगे आप! भारत सरकार की परमाणु भट्टी के बिना सभी ज्योतिर्लिंग स्थलों में सर्वाधिक विकिरण पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं परमाणु भट्टे हैं, इसीलिए उन पर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वे शांत रहें।

महादेव के सभी पसंदीदा भोजन जैसे बिल्वपत्र, अकामद, धतूरा, गुड़ आदि सभी परमाणु ऊर्जा सोखने वाले हैं। क्योंकि शिवलिंग पर पानी भी रिएक्टिव होता है इसलिए ड्रेनेज ट्यूब क्रॉस नहीं होती।

भाभा अनुभट्टी की संरचना भी शिवलिंग की तरह है। नदी के बहते जल के साथ ही शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल औषधि का रूप लेता है। इसीलिए हमारे पूर्वज हमसे कहा करते थे कि महादेव शिवशंकर नाराज हो गए तो अनर्थ आ जाएगा।

देखें कि हमारी परंपराओं के पीछे विज्ञान कितना गहरा है। जिस संस्कृति से हम पैदा हुए, वही सनातन है। विज्ञान को परंपरा का आधार पहनाया गया है ताकि यह प्रवृत्ति बने और हम भारतीय हमेशा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में केदारनाथ से रामेश्वरम तक एक ही सीधी रेखा में बने महत्वपूर्ण शिव मंदिर हैं। आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसी कौन सी विज्ञान और तकनीक थी जो हम आज तक समझ नहीं पाए? उत्तराखंड के केदारनाथ, तेलंगाना के कालेश्वरम, आंध्र प्रदेश के कालेश्वर, तमिलनाडु के एकम्बरेश्वर, चिदंबरम और अंत में रामेश्वरम मंदिर 79°E 41’54” रेखा की सीधी रेखा में बने हैं।

ये सभी मंदिर प्रकृति के 5 तत्वों में लैंगिक अभिव्यक्ति दिखाते हैं जिन्हें हम आम भाषा में पंचभूत कहते हैं। पंचभूत का अर्थ है पृथ्वी, जल, अग्नि, गैस और अवकाश। इन पांच सिद्धांतों के आधार पर इन पांच शिवलिंगों की स्थापना की गई है।

तिरुवनैकवाल मंदिर में पानी का प्रतिनिधित्व है,
आग का प्रतिनिधित्व तिरुवन्नामलाई में है,
काल्हस्ती में पवन दिखाई जाती है,
कांचीपुरम और अंत में पृथ्वी का प्रतिनिधित्व हुआ
चिदंबरम मंदिर में अवकाश या आकाश का प्रतिनिधित्व!

वास्तुकला-विज्ञान-वेदों का अद्भुत समागम दर्शाते हैं ये पांच मंदिर

भौगोलिक दृष्टि से भी खास हैं ये मंदिर इन पांच मंदिरों का निर्माण योग विज्ञान के अनुसार किया गया है और एक दूसरे के साथ एक विशेष भौगोलिक संरेखण में रखा गया है। इसके पीछे कोई विज्ञान होना चाहिए जो मानव शरीर को प्रभावित करे।

मंदिरों का निर्माण लगभग पांच हजार साल पहले हुआ था, जब उन स्थानों के अक्षांश को मापने के लिए उपग्रह तकनीक उपलब्ध नहीं थी। तो फिर पांच मंदिर इतने सटीक कैसे स्थापित हो गए? इसका जवाब भगवान ही जाने।

केदारनाथ और रामेश्वरम की दूरी 2383 किमी है। लेकिन ये सभी मंदिर लगभग एक समानान्तर रेखा में हैं। आखिरकार, यह आज भी एक रहस्य ही है, किस तकनीक से इन मंदिरों का निर्माण हजारों साल पहले समानांतर रेखाओं में किया गया था।

श्रीकालहस्ती मंदिर में छिपा दीपक बताता है कि यह हवा में एक तत्व है। तिरुवनिक्का मंदिर के अंदर पठार पर पानी के स्प्रिंग संकेत देते हैं कि वे पानी के अवयव हैं। अन्नामलाई पहाड़ी पर बड़े दीपक से पता चलता है कि यह एक अग्नि तत्व है। कांचीपुरम की रेती आत्म तत्व पृथ्वी तत्व और चिदंबरम की असहाय अवस्था भगवान की असहायता अर्थात आकाश तत्व की ओर संकेत करती है।

अब यह कोई आश्चर्य नहीं है कि दुनिया के पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच लिंगों को सदियों पहले एक ही पंक्ति में स्थापित किया गया था।

हमें अपने पूर्वजों के ज्ञान और बुद्धिमत्ता पर गर्व होना चाहिए कि उनके पास विज्ञान और तकनीक थी जिसे आधुनिक विज्ञान भी नहीं पहचान सका।

माना जाता है कि सिर्फ ये पांच मंदिर ही नहीं बल्कि इस लाइन में कई मंदिर होंगे जो केदारनाथ से रामेश्वरम तक सीधी लाइन में आते हैं। इस पंक्ति को ‘शिवशक्ति अक्षरेखा’ भी कहते हैं, शायद ये सभी मंदिर 81.3119° ई में आने वाली कैलास को देखते हुए बने हैं!?

इसका जवाब सिर्फ भगवान शिव ही जानते हैं

आश्चर्यजनक कथा ‘महाकाल’ उज्जैन में शेष ज्योतिर्लिंग के बीच संबंध (दूरी) देखें।

उज्जैन से सोमनाथ – 777 किमी

उज्जैन से ओंकारेश्वर – 111 किमी

उज्जैन से भीमाशंकर – 666 किमी

उज्जैन से काशी विश्वनाथ – 999 किमी

उज्जैन से मल्लिकार्जुन – 999 किमी

उज्जैन से केदारनाथ – 888 किमी

उज्जैन से त्र्यंबकेश्वर – 555 किमी

उज्जैन से बैजनाथ – 999 किमी

उज्जैन से रामेश्वरम – 1999 किमी

उज्जैन से घृष्णेश्वर – 555 किमी

हिंदू धर्म में कुछ भी बिना कारण के नहीं किया जाता है।

सनातन धर्म में हजारों वर्षों से माने जाने वाले उज्जैन को पृथ्वी का केंद्र माना जाता है। इसलिए उज्जैन में सूर्य और ज्योतिष की गणना के लिए लगभग 2050 वर्ष पूर्व मानव निर्मित उपकरण बनाए गए थे।

और जब एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने 100 साल पहले पृथ्वी पर एक काल्पनिक रेखा (कर्क) बनाई तो उसका मध्य भाग उज्जैन गया। उज्जैन में आज भी वैज्ञानिक सूर्य और अंतरिक्ष की जानकारी लेने आते हैं।

Concept of Hindu communism

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You must be perplexed to learn about Hindu Communism. The concept was developed during the liberation struggle, but I believe it is still relevant today. Even in the 21st century, we see our Hindu society divided into multiple caste systems. Some Hindus are so orthodox that they do not want to mix with other Hindu communities. This division gives an undue advantage to the fringe elements of society, particularly the radicals belonging to a non Hindu community who haven’t digested much even after the partition of India on the basis of religion.

Now, this article is not going to emphasise the fringe elements, but creates an awareness on how to create a rigid Hindu ecosystem free of caste, color, language, economy, and so on.

The division of Hindu society has been specifically the varna system has even propounded the rebels who don’t want to count themselves or, i must say, they don’t call themselves Hindu being a Hindu. Politics based on caste, and voting for an MLA from the same caste, is the greatest betrayal a Hindu can commit to his motherland.

See, the Hindus only have Bharat in their hands. Either they can make it as strong as Israel or they can lose it in the hands of atheists and the fringe section of India.

In China, Communism has produced results by robbing civilians of much of their freedom and running the country in such a way that everyone is treated equally.

I am not proposing communism like that of China, but rather that this concept has to be accepted by every Hindu in India. This is not a rebel concept but rather a concept that shall promote unity of third largest religion in the world.

Let come back to our title, what does this model say? Its basically an instrument of class rule that serves to protect the legacy of Sanatan culture in coming generations.

A Draft Symbol of Hindu Communism

Being not too liberal and not too radical it has some standards where it lies.
Let’s find out some of those –

1- Hindu Communism takes your caste from your body to believe that you are only a Hindu. Nothing more, and nothing less than that.
2- Hindu communism punishes those who go against the concept of One India.
3- Hindu communism believes in the importance of education and the country to each and every citizen.
4- Women should be respected, motivated and made aware of the intention of non-Hindu radicals.
5- Crime committed by a woman or man has to be treated equally without any sense of emotion.
6- People should never adopt western culture.
7- Hindu communism promotes regional languages and prohibits English, Urdu, or any language that never originated in India.
8- Hindu communism believes in the existence of a brotherhood of Hindus.
9- Prayers are an important part of your routine.
10-End of category appeasements.
11-It’s a crime to abuse and mock the Sanatan culture.
12-Strict laws against traitors, criminals and atheists should be there.
13-Death penalty on conversion to non-Hindu community and rewards to accept Hinduism.
14-Ban anyone and anything who/which talks about one-sided brotherhood.
15-Reject anyone who is forcing you to believe in their faith.
16-Filter the propaganda information consumed in India through a development of a firewall as it is done in China

Such pointers under the model will promote and strengthen unity among all the Hindus under an umbrella of Hindu Unity.
There is still lot to modify and a lot to add in this model. But the main agenda was to introduce you to this unprecedented but surely effective concept specially in this era of instability created by some section of the society which doesn’t care and mocks the existing democratic system of India.

Courts and laws are a complete failure as seen in the recent case of Shri Nupur Sharma Case.
Though those were the personal views of the judges but we are not far behind the day when such attacking personal views are written in the court order too.
People joining the judiciary need a complete scrutiny of their background under the President of India.

This country has to follow major steps to unity Hindu through new the model of Hindu communism.

The not-so-curious case of Mohua Moitra

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So some Leena Manimekalai makes a film on LGBTQ in Canada and decides to publicize it by coming up with a poster of Maa Kaali, the Hindu goddess smoking & carrying the Rainbow Flag on the other hand.

The ploy worked, a relatively unknown filmmaker who has been unsuccessfully selling her Dalit identity in a “patriarchal ~feudal society” for years finally got her place under the sun. She’s suddenly an agenda to defend and the global anti-Hindu(~tva) brigade went into overdrive. Too bad that most of the leftists in India are Bengalis and found it safer to steer clear of the controversy which can make them very unpopular in Bengal.

Commenting on the poster controversy, Mohua Moitra, the flamboyant MP from TMC justified the “art” saying the Goddess Kaali is known to consume meat & liquor and the same is offered to her during the Puja. So the demon~destroying incarnation of Maa Durga who kills Raktabeej by sucking his blood before it can reach the ground, and eating his numerous clones was now just a step away from being declared a junkie with a joint in one hand and an LGBTQ flag in another.

The controversy which would have gone unnoticed except for a few tweets in response, got the adrenaline it needed as the investment banker from New York tried milking the issue to reaffirm her liberal, secular credentials. The Twitter following of Leena Manimekalai was barely in three figures but her cause received a shot in the arm with the endorsement of a politician followed by nearly seven hundred thousand people. It also provoked the desired outrage with people lodging FIRs all over the country.

But this is where you see the difference between the cautious leader and the over-enthusiastic foot soldiers. Mamata’s party immediately distanced itself from the views of its star campaigner and the CM even went on to suggest “rectification of the mistake”.

So with the exception of a couple of keyboard warriors who tweeted “more power” to her, she is now basically on her own with NDTV and The Wire keeping her company in these isolated times.

She did try backing out of the debate claiming that she never said anything about “smoking”, but it was too late to go back on her endorsement of Freedom of Speech and Art she has been ironically denying another lady politician accused of similar charges. In fact majority of her tweets last few days are devoted to crucifying Nupur Sharma and calling for her arrest.

Interestingly she also tried justifying her stand by quoting scriptures. And she’s denying the same privilege to Nupur Sharma claiming that in her own case it is a Hindu commenting on Hinduism while Nupur dared to criticize another religion. So her much flaunted norms of truth & freedom are case-specific, rather religion-specific. That makes her just another politician deriving political juice out of a situation that can throw the country down a spirally turmoil.

But what prompted Mohua Moitra to take the plunge in the first place! Well, growing up in India in the 70s and 80s (as she did) gave us a certain rule book on our own brand of secularism. This was precisely the time when the magic words “secular & socialist” were added to amend our otherwise sacred Preamble of the Constitution. And we were under pressure to demonstrate the success of the revolutionary step.

Simple minority appeasement was not enough, ridiculing the faith of the majority community coupled with branding it as an evil manifestation of a “patriarchal ~ Brahminical” order became the norm. Bollywood became the bandwagon for such secular~socialist propaganda where the greedy Brahmin symbolized the faith and the lusty Thakur represented the co-conspirator, the upholder of everything that is wrong with the universe.

So MF Hussain drawing Hindu goddesses in nude became art and cartoons on Muhammad ensured a sar-tan-se-juda verdict. And we saw the liberal brigade unapologetic about the sheer hypocrisy involved.

This is precisely what Mohua was doing when she ridiculed the majority faith by defending what was clearly a cheap provocation and this is again exactly what she’s doing in her defense by making it a Brahminical agenda, a North Indian invasion of the Bangla religious order, a patriarchal society bent upon subjugating a female crusader.

This one~way secular street has been trampled away by too many for too long. Mohua will have to come up with better arguments to defend her brand of beliefs where her own utterances on religion are classic examples of Freedom of Expression even as she leads the pack witch-hunting Nupur Sharma for her “blasphemous comments”.

Anupam Mishra

200 करोड़ वैक्सीनेशन भारत के आत्मनिर्भरता व बढ़ते सामर्थ का प्रतीक: अनुराग ठाकुर

17 जुलाई 2022, हिमाचल प्रदेश: केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल व युवा कार्यक्रम मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने भारत सरकार के सघन कोविड टीकाकरण अभियान के अंतर्गत 200 करोड़ वैक्सीनेशन की उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते सामर्थ व आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण बताया है।

श्री अनुराग ठाकुर ने कहा “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व व प्रभावी रणनीति की छत्रछाया तले आज भारत ने वो कर दिखाया जो कल तक अकल्पनीय था। रिकॉर्ड समय में 200 करोड़ कोविड वैक्सीन लगा कर भारत ने दुनिया के सामने आत्मनिर्भरता, देश के सामर्थ, हमारी असीमित क्षमता का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज का दिन 140 करोड़ हिंदुस्तानियों के लिए गर्व का दिन है कभी ना भूलने वाला दिन है। कोविड महामारी के शुरुआती दौर में जब दुनिया आशंकाओं के बादल से घिरी थी, यह समझ से परे था कि कैसे इस से लड़ें, कैसे इस बचें उस समय मोदी जी के आह्वाहन पर उनके मार्गदर्शन में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नहीं बल्कि दो दो कोविड वैक्सीन बनाने का भगीरथ कार्य भी किया और एक प्रभावी व सुनियोजित तरीक़े से देशवासियों के मुफ़्त टीकाकरण का महाअभियान शुरू किया।

आगे बोलते हुए श्री अनुराग ठाकुर ने कहा “बीच-बीच में विपक्ष के नेताओं द्वारा हमारी मंशाओं पर और देश के सामर्थ पर प्र्श्नचिन्ह लगाने का, वैक्सीन के दुष्प्रचार का कार्य भी किया गया मगर देश की जनता किसी बहकावे में आए बिना इनके आशंकाओं व दुष्प्रचार को निर्मूल साबित करते हुए आज भारत को उस स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया जहां दुनिया का कोई देश आस पास भी खड़ा नहीं होता । कोविड संकट काल के उस दौर में मोदी जी ने सबको वैक्सीन तो उपलब्ध कराई ही साथ ही साथ कोई भारतवासी भूखा ना सोए इसकी भी चिंता की, इसी काल में देश हमारे कोरोना वारियर्स के यशोगान का साक्षी भी बना”

श्री अनुराग ठाकुर ने कहा “ये ऐतिहासिक क्षण है और हमारा सौभाग्य है कि हम इसके प्रत्यक्षदर्शी हैं। आइए इस उपलब्धि को एक उत्सव की तरह मनाएँ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि आजादी का अमृत महोत्सव के एक के अंतर्गत 15 जुलाई 2022 से अगले 75 दिनों तक सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को नि:शुल्‍क कोविड-19 टीके की सुरक्षा खुराक दी जाएगी”।

क्या आपत्तिजनक पोस्ट को रीट्वीट करना, साझा करना या अग्रेषित करना आपराधिक दायित्व को आकर्षित करता है?

जी हाँ मित्रोंअक्सर देखा जाता है कि कई ट्विटर यूजर्स अपने बायो में ‘रीट्वीट नॉट एंडोर्समेंट’ डिस्क्लेमर डालते हैं प्रश्न ये है कि क्या क्या यह अस्वीकरण किसी को आपराधिक दायित्व से बचा सकता है?

हाल ही में, दिल्ली पुलिस के उपायुक्त केपीएस मल्होत्रा ​​ने कहा कि एक व्यक्ति को स्वय के द्वारा किये गए रीट्वीट की जिम्मेदारी लेनी होती है और सोशल मीडिया पर किसी दृश्य का समर्थन भी इसे साझा करने या रीट्वीट करने वाले व्यक्ति का विचार बन जाता है।

मित्रों याद रखिये “यदि आप सोशल मीडिया पर एक विचार का समर्थन करते हैं, तो यह आपका विचार बन जाता है। रिट्वीट करना और यह कहना कि मैं नहीं जानता, मैं इसके साथ खड़ा नहीं हूँ मायने नहीं रखता। ज आप् किसी भी पोस्ट के शोशल मिडिया जैसे टवीटर इत्यादि पर रिट्विट या रिपोस्ट करते हैं तो वो आपकी जिम्मेदारी बन जाती है। आपको केवल रीट्वीट करना है और यह नया हो जाता है।

सोशल मिडिया पर का उपयोग झूठे तथ्य (अफवाह) या झूठी घटना का जिक्र करके और उसे बड़े स्तर पर फैला (वायरल) करके समाज और देश को किस प्रकार अस्थिर किया जा सकता है, ये हम सब जानते हैं। अमेरिका जैसे बड़े देशों में तो सरकार बदलवा दी जाती है। इसलिए यदि सोशल मिडिया जैसे ट्विटर, व्हाट्सप, फेसबुक इत्यादि पर किये गए पोस्ट को रिट्विट या रिपोस्ट करते समय उस पोस्ट में दि गई सुचना (चाहे वो किसी भी रूप में हो),की सच्चाई को जानना अति आवश्यक हो जाता है।

चलीये आइये देखते हैं क्या कहता है भारतीय कानून?

हालांकि भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रावधान नहीं है जो सोशल मीडिया पर पोस्ट को रीट्वीट करने, फॉरवर्ड करने या साझा करने को एक आपराधिक अपराध घोषित करता है, परन्तु ऐसे कई प्रावधान हैं जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक दायित्व प्रदान करते हैं।
१:-आईटी अधिनियम, २००० की धारा ६७ में अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने या प्रसारित करने के लिए दंड का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत अपराधी को ३ वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती और जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार पून्: वहीं अपराध करने पर कारावास कि सजा ५ वर्ष तक हो सकती है और जुर्माना भी बढ़ाया जा सकता है।

आइये देखते हैं धारा ६७ क्या प्रदान करती है – इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए दंड। – कोई भी हो, जो प्रकाशित या प्रसारित करता है या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित होने का कारण बनता है,

कोई भी सामग्री जो कामुक है या वास्तविक हित के लिए अपील करती है या यदि इसका प्रभाव ऐसे लोगों को भ्रष्ट और भ्रष्ट करने के लिए है, जो सभी प्रासंगिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, इसमें निहित या सन्निहित मामले को पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना रखते हैं,

पहली बार दोषी ठहराए जाने पर दोनों में से किसी एक अवधि के कारावास से, जिसे ३ वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और ५ लाख रुपए तक के जुर्माने से दण्डित किया जाएगा और दूसरी बार दोषसिद्धि की स्थिति में किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जो ५ वर्ष तक और जुर्माना के साथ जो १० लाख रुपये तक हो सकता है।

अब यदि हम इसके एक एक शब्दों का विश्लेषण करें तो निम्न निष्कर्ष निकलते हैं:-
१:- कामुक सामग्री: यह कुछ ऐसा है जो किसी व्यक्ति में काम वासना को उत्तेजित करता है और उसमे सेक्स के प्रति आकर्षण पैदा करता है;
२:- अपील: यहाँ इस शब्द का अर्थ कुछ ऐसा है जो किसी व्यक्ति में रुचि जगाता है अर्थात प्रेरित करता है;
३:-प्रूरिएंट इंटरेस्ट : यहाँ इस शब्द का अर्थ है जो कामोत्तेजक विचारों से खींचा हुआ है अर्थात जिसकी इन्द्रियों पर काम वासना का नियंत्रण है;
४:-प्रभाव: यहाँ इस शब्द का अर्थ है कारण या परिवर्तन या कोई घटना;
५:-भ्रष्ट और भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति: यहाँ इस शब्द का अर्थ है किसी व्यक्ति को नैतिक रूप से अनैतिक या बुरा बनने की ओर आकर्षित करना अर्थात उसको उसके चरित्र् हनन करने वाली क्रिया के लिए प्रेरित करना;
६:-व्यक्ति: यहाँ इस शब्द का अर्थ पुरुषों, महिलाओं, बच्चों सहित प्राकृतिक अर्थात सजीव व्यक्तियों से है, इसमें कोई कृत्रिम व्यक्ति शामिल नहीं है;
७:-प्रकाशित: यहां इस शब्द का अर्थ है कोई भी जानकारी जो औपचारिक रूप से आम जनता के लिए उसी की प्रतियां जारी और बेचकर वितरित और प्रसारित की जाती है;
८:-ट्रांसमिशन: यहां इस शब्द का अर्थ है ट्रांसफर, पास, कम्युनिकेट, ट्रांसमिटिंग का माध्यम, सिग्नल आदि;
९:-सार्वजनिक होने के कारण: यहाँ इस शब्द का अर्थ है कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ जानकारी प्रकाशित करने का प्रभाव देना। इसमें किसी इंटरनेट सेवा प्रदाता या वेबसाइट सर्वर द्वारा निश्चित जानकारी का प्रकाशन भी शामिल है।

तो कामुकता को जगाने वाली, नैतिक मूल्यों का त्यागकर अनैतिकता के जाल में फसाने वाली सामग्री का इलेक्ट्रानिक माध्यम से सार्वजनिक प्रकाशन या प्रसारण करना एक दंडनीय अपराध है।

इसी प्रकार, आई टी अधिनियम की धारा ६७अ इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्पष्ट यौन कृत्य में बच्चों का चित्रण करने वाली सामग्री को प्रकाशित करने या प्रसारित करने के लिए दंड का प्रावधान करता है। इसमें ५ वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। दूसरी या बाद में दोषसिद्धि की स्थिति में ७ वर्ष और विस्तारित जुर्माना।

आइये देखते हैं धारा ६७अ क्या प्रदान करती है- इलेक्ट्रॉनिक रूप में यौन स्पष्ट कार्य आदि वाली सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए दंड। -“जो कोई भी इलेक्ट्रॉनिक रूप में ऐसी सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करता है या प्रसारित या प्रकाशित करने का कारण बनता है,जिसमें यौन स्पष्ट कार्य या आचरण शामिल है,”
पहली बार दोषी ठहराए जाने पर किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे ५ वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना के साथ दंडित किया जाएगा और दूसरी या बाद में दोषी ठहराए जाने की स्थिति में दोनों में से किसी एक अवधि के लिए कारावास जो ७ वर्ष तक हो सकता है और जुर्माना जो १० लाख रुपये तक हो सकता है।

आईटी अधिनियम के अलावा, भारतीय दंड संहिता की धाराये १५३ अ, १५३ बी, २९२, २९५ अ, ४९९ आदि कुछ प्रावधानों को निर्दिष्ट करती है जो उस व्यक्ति के खिलाफ लागू हो सकते हैं जो अपमानजनक या आपत्तिजनक संदेश साइबर स्पेस में भेजता या साझा करता है। इन धाराओं के अंतर्गत आने वाले अपराध सांप्रदायिक घृणा को बढ़ावा देने, अश्लीलता, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और मानहानि से संबंधित हैं।

आईपीसी की धारा २९२ के अनुसार, हर उस चीज को चाहे वो कोई पर्चा हो, कलात्मक प्रस्तुति हो, आकृति या पुस्तक हो, जो कामुक पाए जाते हैं, उन्हें अश्लील माना जाएगा। आगे कहा गया है कि इनमें से कोई भी चीज कामुक रुचि के लिए अपील करती हो, तो उसे भी अश्लीलता की श्रेणी में रखा जाएगा। कानून के मुताबिक, अगर इसका प्रभाव उन व्यक्तियों को भ्रष्ट करता है, जो ऐसी सामग्री को पढ़ने व देखने या सुनने की संभावना रखते हैं, तो ये अश्लीलता की श्रेणी में ही आएगा। साथ ही अश्लील सामग्री की बिक्री, संचालन, आयात व निर्यात और विज्ञापन के साथ साथ इसके माध्यम से लाभ कमाना भी अपराध है।

आईपीसी की धारा २९३ लोगों के उम्र से संबंधित है। इससे मुताबिक बीस साल से कम आयु के लोगों में ऐसी सामग्री की बिक्री या प्रसार और सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्यों और गीतों को भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। राज कुंद्रा के मामले में भी ऐसा ही किया गया है. आरोप है कि अश्लील सामग्री को ऐप पर अपलोड किया गया था।

भारतीय अदालतों ने क्या कहा है?

१. वर्ष २०१७ में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा की एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा दायर मानहानि मामले में उन्हें जारी किए गए समन को चुनौती दी गई थी, जबकि “क्या रीट्वीट करने पर आईपीसी की धारा ४९९ (मानहानि) के तहत आपराधिक दायित्व आकर्षित होगा” इस मुद्दे का निस्तारण ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया गया ।

याद रखना चाहिए की एक रीट्वीट मूल ट्वीट की सामग्री को रीट्वीट करने वाले उपयोगकर्ता के अनुयायियों (Followers) के तत्काल ध्यान में लाता है।

२. मद्रास उच्च न्यायालय ने २०१८ में फैसला सुनाया कि सोशल मीडिया में किसी संदेश को साझा करना या अग्रेषित करना संदेश को स्वीकार करने और उसका समर्थन करने के बराबर है।
पत्रकार से बीजेपी नेता बने एस वी शेखर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए ये टिप्पणियां की गईं, जिन्होंने कथित तौर पर महिला पत्रकारों पर एक अपमानजनक फेसबुक पोस्ट साझा की थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि “किसी को भी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने का कोई अधिकार नहीं है और यदि ऐसा किया जाता है तो यह अधिकारों का उल्लंघन है। जब किसी व्यक्ति को समुदाय के नाम से पुकारना अपने आप में एक अपराध है, तो ऐसे गैर-संसदीय शब्दों का उपयोग करना अधिक जघन्य अपराध है।” शब्द कृत्यों से अधिक शक्तिशाली होते हैं, जब कोई सेलिब्रिटी जैसा व्यक्ति इस तरह के संदेशों को फॉरवर्ड करता है, तो आम जनता यह मानने लगती है कि इस तरह की चीजें चल रही हैं”।

फैसले के खिलाफ शेखर की विशेष अनुमति याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने १ जून, २०१८ को निपटा दिया था क्योंकि राज्य ने कहा था कि मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है।इसलिए शीर्ष अदालत ने कहा कि शेखर निचली अदालत में पेश होंगे, जहां वह नियमित जमानत की मांग कर सकते हैं। इसलिए किसी पोस्ट को अग्रेषित करने के लिए आपराधिक दायित्व से संबंधित बड़ा प्रश्न कम से कम इस मामले में अनिर्णीत रहा।

३:- महाराष्ट्र में ओशिवारा पुलिस ने अजय हटवार के खिलाफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ अपमानजनक बयान देने और २०११-२०१२ में अपने परिवार के साथ छुट्टी का आनंद लेने वाले सीएम की तस्वीर पोस्ट करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की। उस पर मानहानि का मामला दर्ज किया गया है और आईटी अधिनियम की धारा ६७ (अ) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

४:-मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और कारोबारी राज कुंद्रा को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने अश्लील फिल्म मामले में गिरफ्तार किया। मुंबई पुलिस का दावा है कि राज कुंद्रा की कंपनी लंदन स्थित एक कंपनी के लिए भारत में अश्लील सामग्री का निर्माण कर रही थी। शिल्पा शेट्टी के पति और कारोबारी राज कुंद्रा के खिलाफ जिन आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है, उनमें धारा ४२०, धारा ३४, २९२ और २९३ और आईटी एक्ट की धारा ६७, ६७अ व अन्य संबंधित धाराएं शामिल है. जिनमें उन्हें आरोपी बनाया गया है। इनमें आईपीसी की धारा ४२० और आईटी एक्ट की धारा ६७अ गैर जमानती हैं। दोषी करार दिए जाने पर राज कुंद्रा को ५ से ७ वर्ष तक कैद की सजा हो सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय निर्णयों पर एक नजर:-

यद्यपि इस विषय पर भारतीय न्यायालयों द्वारा कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है फिर भी कुछ अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों ने इसका उत्तर देने का प्रयास किया है।

एक):- वर्ष २०१४ में जोस जीसस एम. डिसिनी बनाम न्याय सचिव के मामले में फिलीपींस गणराज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने फेसबुक और ट्विटर जैसी माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइटों सहित ऑनलाइन बातचीत और जुड़ाव के विभिन्न आयामों के बारे में चर्चा की।

न्यायालय ने इस सवाल पर भी फैसला सुनाया कि क्या ऑनलाइन पोस्टिंग जैसे कि मानहानिकारक बयान को पसंद करना, टिप्पणी करना या दूसरों के साथ साझा करना, फिलीपींस के कानून के तहत सहायता या प्रोत्साहन के रूप में माना जाना चाहिए। न्यायालय ने पाया कि हमलावर बयान के मूल लेखक को छोड़कर, बाकी (लाइक, कमेंट और शेयर करने वाले) अनिवार्य रूप से पाठकों की “घुटने की भावना” हैं, जो मूल पोस्टिंग के बारे में अपनी प्रतिक्रिया के बारे में बहुत कम या बेतरतीब ढंग से सोच सकते हैं।

अदालत ने पाया कि जब तक विधायिका अपनी अनूठी परिस्थितियों और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए एक साइबर-मानहानि कानून नहीं बनाती है, तब तक ऐसा कानून उन लाखों लोगों पर एक ठंडा अर्थात अप्रभावी प्रभाव पैदा करेगा जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकार का उल्लंघन करते हुए संचार के इस नए माध्यम का उपयोग करते हैं। , “

दो):- वर्ष २०१७ में, स्विट्जरलैंड में ज्यूरिख डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने एक ४० वर्षीय व्यक्ति पर जुर्माना लगाया, जिसने एक पशु रक्षक पर यहूदी-विरोधी और नस्लवाद का आरोप लगाते हुए एक फेसबुक पोस्ट पर ‘लाइक’ किया। न्यायलय ने पाया कि ‘लाइक’ बटन पर क्लिक करके, प्रतिवादी ने स्पष्ट रूप से अनुचित सामग्री का समर्थन किया और उसे अपना बना लिया।

तीन):- ओएलजी फ्रैंकफर्ट (जर्मनी में कोर्टहाउस) ने वर्ष २०१५ में इस सवाल का फैसला किया कि क्या एक शेयर साझा सामग्री का इस तरह से समर्थन करता है कि इसे उसका अपना बयान माना जा सकता है?

न्यायालय ने कहा कि “लाइक” फंक्शन के विपरीत, शेयरिंग फंक्शन में केवल कंटेंट के वितरण के अलावा कोई अन्य महत्व नहीं होता है।

निष्कर्ष
इस विषय पर स्पष्ट आधिकारिक निर्णय या प्रत्यक्ष वैधानिक प्रावधान के अभाव में, यह स्पष्ट है कि वर्तमान प्रश्न (सोशल मीडिया पर पोस्ट को रीट्वीट करना या अग्रेषित करना अपने आप में एक आपराधिक अपराध है) तथ्यों और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने के लिए न्यायालयों पर छोड़ दिया गया है।

राघव चड्ढा के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के तर्क को पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि विचारण न्यायालय को, न्यायालय के रूप में, यह निर्धारित करना होगा कि क्या रीट्वीट करने पर दंड संहिता के तहत मानहानि का आपराधिक दायित्व होगा।

पहले पक्ष और रीट्वीटर या शेयर करने वाले के बीच स्पष्ट अंतर की कमी के कारण, इस बात की संभावना है कि बाद वाले को पूर्व के समान माना जा सकता है।

हमारे देश में पिछले ६ या ७ वर्षो से सरकार के विरुद्ध और देश के विरुद्ध बड़े हि भयानक योजनाओं को सोशल मिडिया (ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सप, इंस्टाग्राम तथा यूट्यूब इत्यादि) के माध्यम से फैला कर अपने अंजाम तक पहुंचाया गया। हाल में हि राजस्थान में एक दर्जी कन्हैयालाल की और महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की गर्दन रेत कर हत्या कर दी गई क्योंकि उन्होंने भाजपा कि राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट किया था। यही नहीं गुजरात में किशन भलवाड की हत्या कर दी गई, क्योंकि उन्होंने फेसबुक पर कोई पोस्ट कर दिया था।

सोशल मिडिया का हि उपयोग करके दिल्ली में भयानक दंगे करवाये गए। किसान आंदोलन को भी सफल बनाने के लिए toolkit बना कर किसानों को भड़काने और दंगे फसाद करवाने का पूरा प्रोपेगेंडा फैलाया गया था। और याद रखिये कोई भी पोस्ट या टवीट् तभी वाइरल होती है जब उसे शेयर, लाइक या रिट्विट किया जाता है। और जब आप किसी पोस्ट को शेयर, लाइक या रिट्विट करते हैं, इसका सीधा सा अर्थ होता है कि आप उस पोस्ट या टवीट् पर विस्वास करते हैं और पूरी जिम्मेदारी से अपने लोगों के मध्य उसे फैलाने का कार्य करते हैं, अत: आप भी उतने हि दोषी और अपराधी हैं, जितना उस पोस्ट या रिट्विट का असली निर्माणकर्ता।

इसीलिए “तेल” से लेकर “सोना” तक बेचने वाले ज्ञानी अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन जी कहते हैं कि “ज्ञान जंहा से मिले बटोर लो” पर उस पर विश्वास करने से पहले ज़रा टटोर लो”

लेखन और संकलन :- नागेंद्र प्रताप सिंह (अधिवक्ता)
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मॉल जिहाद…. लखनऊ में लुलु माॅल की सच्चाई

केरल में मलयाली मेगा मॉल की एक प्रसिद्ध श्रृंखला है, जो केरल में बहुत लोकप्रिय है और कर्नाटक में फैल रही है। इस माॅल का नाम लुलु (Lulu) है। इस माॅल के मालिक का नाम युसुफ है। यह कन्नूर, कासरगोड, कोझीकोड और मलप्पुरम आदि में ऐसे मॉल स्थापित नहीं करना चाहता है, क्योंकि वहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, किन्तु यह एर्नाकुलम, तिरुवनन्तपुरम या किसी अन्य क्षेत्र में माॅल खोलना चाहता है जहाँ काफिर बहुसंख्यक हैं। इसका पहला कारण यह है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में यदि वह अपना माॅल खोलेगा तो मुसलमानों द्वारा चलाई जा रही छोटी छोटी दुकानों को हानि होगी। यह उन क्षेत्रों में अपना मॉल स्थापित करना चाहता है, जहाँ काफिर बहुसंख्यक हैं ताकि काफिरों के छोटे व्यवसाय नष्ट हो जायें।

इसका दूसरा कारण यह है कि वह एक मॉल में 20000 कर्मचारियों की भर्ती करता है। इनमें से 15000 मलप्पुरम के मुस्लिम युवा होते हैं और 5000 काफिर महिलायें होती हैं। इस प्रकार 15000 मुस्लिम पुरुष 5000 युवा काफिर लड़कियों के साथ बातचीत करते हैं। इस तरह से लव जिहाद भी जोरों पर चल रहा है। उनमें से अधिकांश लड़कियाँ और उनके परिवार वाले चुप हैं, क्योंकि विरोध करने पर उपर्युक्त लड़कियों की नौकरी को खतरा है।

इसका तीसरा कारण यह है कि ऐसा करने से 15000 वफादार मुस्लिम युवाओं को एक परिवार के रूप में काफिरों की भूमि पर प्रवास करने का अवसर मिलता है।
कम से कम एक विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार की जीत का निर्धारण करने के लिए 30000 लोग पर्याप्त होते हैं। इसलिए लुलु मेगा मॉल्स सदा काफिर बहुल क्षेत्रों में ही बनाये जाते हैं। इसके लिए इसका मालिक वैश्विक स्तर पर आतंकी फंडिंग के लिए कुख्यात अरब देश कतर से पैसे जुटा रहा है।

उपर्युक्त प्रकार का मूक मॉल जिहाद इस माॅल के बहिष्कार से ही समाप्त होगा। लुलु मॉल का मालिक युसूफ है और इस माॅल के लिए पैसा, तालिबान के लिए सबसे अधिक सहायक देश कतर से आ रहा है। कतर लम्बे समय से जिहादियों का समर्थन भी करता आ रहा है। इसलिए सभी गैर मुस्लिमों के लिए अच्छा होगा कि वे रिलायंस, सेंट्रल, बिग बाजार और मॉल ऑफ जॉय का समर्थन करें और उन्हें प्रोत्साहित करें।

एडापल्ली में लुलु के आगमन के कुछ ही वर्षों के बाद, वहाँ व्यापार करने वाले गैरमुस्लिमों के लगभग 50 छोटे व्यवसाय बन्द हो गये और वहाँ कई नये होटल, जूस सेंटर, बैग की दुकानें और ऑप्टिकल दुकानें खुल गईं थीं, जिनमें से लगभग सभी के मालिक मुस्लिम थे। देखिये कि कैसे किसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बदल दी गई। इसका एक उदाहरण, अब एडापल्ली से पुकट्टुपदी तक के क्षेत्र में देखा जा सकता है। त्रिक्काकारा नगर निगम में हुए परिवर्तन को सभी स्पष्ट रूप से देख सकते थे।

यूपी के लखनऊ शहर में भी लुलु माॅल खुल गया है, अत: वहाँ भी सावधानी की आवश्यकता है।

हमारी आबादी 75 फीसदी, तो नियम भी हमारे हिसाब से बनें’, मुस्लिम समाज ने स्कूल में बदलवा दी सालों से चली आ रही प्रार्थना

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झारखंड के गढ़वा में स्थानीय ग्रामीणों के दबाव के बाद स्कूल की प्रार्थना बदल दी गई. साथ ही छात्रों को प्रार्थना के समय हाथ जोड़ने से भी मना किया गया है.

झारखंड के गढ़वा (Garhwa) में धर्म के नाम पर शिक्षण संस्थानों में मनामानी का मामला सामने आया है. यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा सालों से चली आ रही प्रार्थना को भी सांप्रदायिकता का रंग दिया जा रहा है. (Muslim Community) यहां मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर ग्रामीणों ने दबाव देकर कहा कि स्थानीय स्तर पर मुस्लिम समाज की आबादी 75 प्रतिशत है, इसलिए नियम भी हमारे अनुरूप ही बनाने होंगे. स्कूल की प्रार्थना भी हमारे हिसाब से होगी (School Prayer). मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रधानाध्यापक को वर्षों से स्कूल में चली आ रही प्रार्थना को बदलने के लिए विवश कर दिया.

अब दया कर दान… प्रार्थना को बंद करवा कर तू ही राम, तू ही रहीम है…प्रार्थना शुरू करा दी गई है. इतना ही नहीं प्रार्थना के दौरान बच्चों को हाथ जोड़ने से भी मना कर दिया गया है. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक ग्रामीणों की जिद के आगे विवश प्रधानाध्यापक अब यहां बदले रूप में प्रार्थना करवा रहे हैं. उन्होंने इसकी जानकारी कोरवाडीह पंचायत के मुखिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी है. प्रधानाध्यापक युगेश राम का कहना है कि पिछले चार महीने से मुस्लिम लोगों ने स्कूल में जबरन प्रार्थना को बदलवा दिया है. कई बार मुस्लिम समुदाय के युवक इस मुद्दे पर स्कूल में आकर हंगामा कर चुके हैं.

स्कूल संचालन में हस्तक्षेप न करने को समझाया पर नहीं माने ग्रामीण

प्रधानाध्यापक द्वारा सूचना दिए जाने पर मुखिया शरीफ अंसारी ने हंगामा करने वाले मुस्लिम समुदाय के युवकों को स्कूल संचालन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किए जाने के लिए समझाया लेकिन ग्रामीण जब नहीं माने तो मुखिया ने गांव वालों के अनुसार ही प्रधानाध्यापक को स्कूल संचालन की सलाह दी. मामले में प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार मयंक भूषण का कहना है कि स्कूल में प्रार्थना सभा को अपने हिसाब से कराने को लेकर विद्यालय के शिक्षकों को मजबूर किए जाने की सूचना मिली है. इसकी जांच कराई जाएगी.

सरकारी आदेश की अवहेलना करने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी. इधर मुखिया शरीफ अंसारी ने सोमवार को कहा कि मुझे इसकी जानकारी आज ही मिली है. मैं मंगलवार को विद्यालय प्रबंधन समिति एवं ग्रामीणों की बैठक कर इसका समाधान करने का प्रयास करूंगा. किसी भी कीमत पर गंगा-जमुनी तहजीब को बरकरार रखा जाएगा.

Nupur Sharma in the Supreme Court: Enlighten us more, My Lords!

Hon’ble Judges,

A few days ago, you heard Nupur Sharma’s request in the Supreme Court. That was her plea to club at least nine FIR’s filed against her in police stations across four States, with the one at Delhi. My Lords, I am a law-abiding citizen wanting to speak for ordinary people. Please enlighten us more on what you said in open court to Nupur’s lawyer.

Nupur Sharma was facing threats to her life from hardcore Muslims. That was because, while speaking in a TV debate a few weeks ago she made some statements about Prophet Mohammed that were factually correct and acknowledged in Islam as facts. Equally important, she spoke so on being provoked in that debate by a Muslim participant who made cheap remarks about a Hindu God. As judges who see more and hear more – but should speak less – you would know this was what happened in that TV debate. My Lords, please enlighten us more on what you said in court.

If Nupur Sharma felt she was exposing herself to violent physical attacks by visiting magistrates’ courts across States to answer those FIR’s, that would be natural. Three days before you heard her lawyer in court a tailor in Udaipur, Kanhaiya Lal, who shared his support to Nupur Sharma on social media had been killed in a knife attack by two hardcore Muslims in retaliation, with one of them making a video of the gruesome event – which he later circulated. If Nupur Sharma were my sister I would deeply feel for her on her apprehension about her safety. Would you not feel likewise My Lords, if she were your sister?

Oh, sorry My Lords. We understand that judges must discharge their functions fairly according to law, without personally or unreasonably feeling for Nupur Sharma – or of course for the other side. So the court may accept or decline her request for clubbing of FIR’s as it considers right. That is not the issue now. What My Lords said in open court against her is what we wish to understand. Some quotes of what My Lords said that day, as found in newspapers, are here:

“She has threat or she has become security threat? The way she has ignited emotions across the country, this lady is single-handedly responsible for what is happening in the country.” “It is so disturbing …… The outcome is what happened at Udaipur…… Please do not compel us to open our mouth …..”

“The petition smacks of her arrogance, that the Magistrates of the country are too small for her.”

“She should have gone to the TV and apologised to the nation.”

Look at it this way, My Lords.

Imagine that Nupur Sharma kept silent in the TV debate without reacting to the cheap remarks made by a Muslim about a Hindu God.

Also assume that another Muslim man had tweeted his support for those hurting remarks on TV and then two Hindus, wielding knives, killed that man for his tweet.

Now, should we expect that My Lords will likewise severely criticise in open court the Muslim who spoke so ill of a Hindu God on TV, and seemingly suggest – in this imaginary story – that the dastardly crime of the two Hindu killers was caused by that culprit mocking a Hindu God on TV?

What do we understand, My Lords, in your strong condemnation of Nupur Sharma? Especially in the background of the horrific Udaipur murder?

Should we believe that Nupur had no provocation from a Muslim in a TV debate to say instantly what she said?

In any case, is it not true that Nupur’s statement is acknowledged in Islam as a historical fact?

Should we believe that two men with knives may be fairly provoked enough to kill a person who merely voiced his support to Nupur Sharma?

Should we believe that the real villains here are not the man who first spoke basely about a Hindu God on TV drawing Nupur Sharma’s instant reaction, and perhaps not also the two Udaipur killers, but that Nupur Sharma is the villain?

And finally, if a judge of a district court or high court – not the supreme court – had expressed himself likewise in open court, should we believe that the supreme court will stand by that?

Sure, My Lords, minorities may be passionate about their religion. Sure also, My Lords, that the majority too could be passionate about their religion.  But neither should be allowed to intimidate or subdue the other, that too abusing any special rights law may give them – right or wrong?

And may we know: If the contempt law protects judges against individuals who act in disrespect or denigration of judges – no doubt, judges need such protection – is there protection for an individual from a judge who overspeaks?

My Lords, we are so confused. Please pardon us for any limited understanding. And for wanting to understand more on happenings that trouble our hearts and minds to a limit when we cannot hide our aches. So we speak out – that’s perhaps our safety valve.

We must say this too. We are anguished that the most outstanding defender and saviour of our democracy has to face some questions now. We hope time is a corrective and a healer.

Most Respectfully,

A law-abiding citizen

Why the cabal is against Modi & Hindu India?

What we are seeing is a set pattern of continuous anti-Modi and anti-Hindu propaganda in media and social media, both at Indian and international levels, after 2014. From The Wire to Al Jazeera to Twitter to The Washington Post to BBC; – the story remains monotonously the same. The dominating USA, megalomaniac Europe, Communist China and Islamist Ummah are after the Hindu India. It is the fear of rise of Hindu India, as a global power after 2014, that has disturbed the sleep of all these monsters.

Since 2014, India has refused to live with British colonial hangover, political pressure of USA, economic and territorial dictums of China and religious dominance of Islamist Ummah (India has second largest Muslim population). India had started its own journey in 2014 as a proud civilizational nation with at least 5000 years of rich and glorious Hindu heritage.

From Muslim invaders to British imperialist to Gandhi-Nehru duo; – all had made the majority population of India, that is Hindus, a community of self-loathing and timid people, devoid of self-pride. In post-1947 independent India, Hindus were made to forget their glorious past of kingdoms, state craft, military power, sea voyage, trade, architecture, literature, astronomy, mathematics, medicine, philosophy and spirituality by Nehruvian “Idea of India”. Hindus were made to accept that only Mughals and British had made them civilized and enriched their culture between 1526 AD and 1947 AD. But Modi led BJP’s coming to power in India during 2014 has turned the table on those anti-Hindu vested interests.

In this propaganda war against Modi and Hindu India, the members of Left-Liberal-Islamist cabal (Indian and international) are working overtime as foot soldiers of USA, China, Europe and Ummah. Leftists represent Chinese interest; Liberals represent the interest of USA and Europe, and Islamists represent the interest of Ummah. All three divergent groups have come together, to become a single cabal, on the principle of enemy’s enemy is my friend. The cabal had long back infiltrated the academia, media, policy making and lobbying at Indian and international levels.

To understand the intensity of propaganda of the Indian chapter of the cabal against Modi and Hindu India, one needs to follow the writings, interviews and twits and remarks of persons like Suzanna Arundhati Roy, Barkha Dutt, Hamid Ansari, N Ram, Rana Ayyub, Ramchandra Guha, Swara Bhaskar, Arfa Khanum Sherwani and Ravish Kumar et al.

They are in tens of thousands and spread across India in schools, colleges, universities, NGOs, social groups, government offices, judiciary, vernacular media and channels. The Indian political parties which are active supporters of this propaganda war, are headed by the Congress Party and followed by Samajwadi Party, Aam Aadmi Party, Rashtriya Janata Dal, Trinamool Congress and Nationalist Congress Party etc.

But why this propaganda is mostly against Modi? Because Modi has envisioned and started implementing the makeover of the emerging pride of new and independent Hindu India. Modi has kindled the passion among Hindus of India, who constitute about 78 percent of the country’s population, to challenge the oppressive forces which have been subduing Hindu India for about one thousand years. The boat of Left-Liberal-Islamist cabal has been badly rocked by Modi after 2014. The cabal has become dismayed and frustrated. Hence is so much of anti-Hindu and anti-Modi propaganda.

Before 2014, Indian social dynamics was under the control of Left-Liberal-Islamist cabal. The cabal controlled the narrative and socio-political engineering of India. The cabal used to control even the psyche of Indians and its international image. BJP led NDA ruled India for five years under the Prime Minister Sri Vajpayee from 1999 to 2004.

But that avatar of BJP never dared to push its ‘Hindutva’ politics because of the fear of the cabal. After 2014, Modi has beaten that said pulp into pulp and started pushing BJP’s Hindutva-based agenda of “Cultural Nationalism” and corruption free “Development”.

The international Left-Liberal-Islamist cabal organized a conference in USA during September 2021 on Dismantling Global Hindutva. The conference sought to look into the issues relating to the Hindu supremacist ideology from scholarly perspective. What a joke! Who were those delusional scholars who could find global presence of Hindutva?

Had Hindu ideology been supremacist, there would not be any Muslims in India after 1947. It was the tolerant ideology of Hinduism that allowed Muslims of Indian sub-continent to practice heads (Pakistan) I win, tails (Bangladesh) you lose and the coin (India) belongs to me.

The Left-Liberal-Islamist cabal has been happy with dozens of Islamic and Christian countries in the world, but it develops severe painful posterior in the name of a single Hindu India. When Indian Hindus had never pushed its ‘Hindutva’ to other countries through ‘violent invasion’ or ‘imperialism’, or ‘rice bag trap’ or any other means; when Hindu India’s core philosophy has been “Ekam Sat, Vipra Bahudha Vadanti” (truth is one, wise men call it differently), the Left-Liberal-Islamic cabal should stop fighting against its phantom enemy of Hindu India.

It should understand that anarchic Leftism, one-sided Liberalism and violent Islamism have no place in BJP ruled Modi’s India. Rise of Hindutva and Hindu India is vital for the future peace and co-existence of different human ideologies and nations. The sooner the world community understands this fact is better for all.

अग्निपथ योजना: एक स्वर्णिम युवा भविष्य और शसक्त देश

पृष्ठभूमि:-
संजय के पिताजी सब्जियां बेचकर संजय के पढ़ाई का खर्चा बड़ी मुश्किल से उठाते थे। स्कूल के बाद संजय भी उनके साथ साब्जियां बेचा करता था। किसी प्रकार उसके पिता ने १२ वी तक कि पढ़ाई पूरी करवाई, अब संजय १६ से १७ वर्ष का हो चुका था, परन्तु आगे की पढ़ाई के लिए ना तो पैसे थे और ना दिशा। गरीबी कि मार झेल रहे संजय के पास पढ़ाई छोड़कर छोटे मोटे धंधे में कूदने के आलावा कोई चारा ना था।

जी हाँ मित्रों ना जाने ऐसे कितने संजय हर वर्ष गरीबी कि मार झेलकर अपनी प्रतिभा का गला घोटने को मजबूर हो जाते हैं। वही मध्यम वर्ग के बच्चे भी होते हैं, कुछ हमारी तरह या आपकी तरह जो १२ वी पास करने के बाद कभी मेडिकल की तैयारी, कभी इन्जिनियरिंग की तैयारी तो कभी किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में अपने जीवन का अमूल्य समय १७ से २१ वर्ष का बस यूँ हि खो देते हैं, बिना किसी परिणाम के।

अब कई ऐसे भी बच्चे होते हैं, जो १७से २१ वर्ष की आयु में उचित मार्गदर्शन ना मिलने के कारण भटक जाते हैं और असमाजिकता के दलदल में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर लेते हैं।

मित्रों आप और हम अच्छे तरीके से जानते हैं की आज के युग में देशों के मध्य युद्ध बड़ी बड़ी मशीनों या मिसाइलो के द्वारा नहीं, अपितु आधुनिक तकनीक और मजबूत शारीरिक और तीव्र मानसिक शक्ति वाले युवाओं के बल पर लड़ा जाता है, उदाहरण के लिए:- इजराइल की सेना ने अपने देश में बैठे बैठे हजारों किलोमीटर दूर ईरान में अपने घर जा रहे ईरान के परमाणु वैज्ञानिक को सटीक तकनीक से मार गिराया। द्वारा उदाहरण देखें तो हमारी सेना ने जब पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की तो उस टिम में जो सैनिक थे वो सभी ३० वर्ष की उम्र से कम उम्र के थे और अपने शरीर पर ७० किलो से भी ज्यादा का आयुध लेकर बड़ी चपलता से सीमा में घुसे और आतंकियों को सबक सिखा कर सुरक्षित वापस आ गए।

आप सोच रहे होंगे, आखिर ये सब मैं क्या बता रहा हूँ, पर विश्वास करिये यही तो मुख्य पृष्ठभूमि है जिसने अग्निपथ जैसी खूबसूरत योजना को जन्म दिया।

अग्निपथ योजना:-
इसकी घोषणा १६ जून २०२२ को हमारे देश के रक्षा मंत्री आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी और तीनो सेनाओ के प्रमुख द्वारा की गई।अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों की तीन सेवाओं में (कमीशन अधिकारियों के पद से नीचे के) सैनिकों की भर्ती के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक नई योजना है। इस योजना के तहत सेना में शामिल होने वाले जवानों को ‘अग्निवीर’ के नाम से जाना जाएगा।

योग्यता अथवा मापदंड:-
इस अग्निपथ योजना के लिए १७.५ वर्ष से २१ वर्ष के बीच के देश के उत्साही युवा आवेदन कर सकेंगे। कोरोना महामारी के कारण पिछले २ वर्षो से रुकी हुई भर्ती के कारण अधिक से अधिक युवाओं को मौका देने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा इस योजना के केवल पहले वर्ष की भर्ती में उम्र सीमा में २ वर्ष की छूट दी गयी है। आवेदन करने वाले युवा कम से कम ५० फीसदी नंबरों के साथ १२वीं पास होने चाहिए।

अग्निपथ स्कीम की विशेषता:-

अग्निवीरो का चयन इस योजना के अंतर्गत मेरिट के आधार पर किया जाएगा। इसमें आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं किया गया, अत: मेरिट से चुनकर आने वाले अग्निविर केवल देश पर समर्पित युवा और जोशीले सैनिक होंगे, उनका किसी जात धर्म या सम्प्रदाय से कोई लेना देना नहीं होगा।

चयनित अग्निवीर प्रारम्भ में ६ माह के अति आवश्यक सैन्य प्रशिक्षण के दौर से गुजरेंगे और फिर ४ वर्षो के लिए वो सैनिक के रूप में देश कि सुरक्षा के लिए सैनिक के रूप में सेवा देना शुरू कर देंगे।

इस योजना के अंतर्गत अग्निविरो को प्रथम वर्ष रुपए ३०,०००/- का मासिक वेतन भी दिया जाएगा, जिसमें ३℅ की वृद्धि प्रत्येक वर्ष की जाएगी अर्थात अग्निवीरो को निम्न प्रकार से वेतन दिया जाएगा:-
प्रथम वर्ष:- रुपये ३०,०००/- उनको मिलेगा ₹२१०००/-
दूसरे वर्ष:- रुपये ३३,०००/- उनको मिलेगा ₹२३१००/-
तीसरे वर्ष:-रुपये ३६,५००/-उनको मिलेगा ₹२५५८०/-
चतुर्थ वर्ष:- रुपये ४०,०००/-उनको मिलेगा ₹२८०००/-

केंद्र सरकार सेवा निधि योजना के तहत सरकार वेतन का ३० प्रतिशत हिस्सा सेविंग के रूप में रख लेगी। साथ ही इसमें वह भी इतना ही योगदान करेगी और चार वर्ष बाद सैनिकों को १० लाख से १२ लाख रुपये दिए जाएंगे। ये पैसा टैक्स फ्री होगा।

इसके अतिरिक्त प्रत्येक अग्निवीर को मेडिकल पॉलिसी भी सरकार के द्वारा दी हि जाएगी साथ हि साथ सैनिको को दी जाने वाली समस्त योजनाओं का लाभ भी मिलेगा (पेंशन छोड़कर)। सेवा के दौरान किसी प्रकार की अनहोनी होने की अवस्था को मद्देनज़र अग्निवीरों को ४८ लाख रूपए का बिमा किया जाएगा।

अग्निपथ स्कीम के तहत सेना के जवान अर्थात अग्निवीरों को भी उत्त्कृष्ट प्रदर्शन के एवज में गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। इस योजना के कारण युवाओं के लिए सशस्त्र सैन्य बलों में जाने के अवसर बढ़ेंगे। आज सशस्त्र सेनाओं में जितनी संख्या है, अग्निवीरों की भर्ती इससे तीन गुना होगी।

चार वर्ष के पश्चात क्या?

१:- ४ वर्ष की सेवा के पश्चात, मेरिट के आधार पर २५℅ अग्निविरो को सेना में स्थायी रूप से सम्मिलित कर लिया जाएगा।
२:- जो अग्निवीर ४ वर्ष के पश्चात सेना में सम्मिलित नहीं हो पाएंगे और फिर भी एक सैनिक के रूप में देश कि सेवा करना चाहते हैं, उनके लिए केंद्र सरकार की सभी सुरक्षा एजेंसियो जैसे BSF, CRPF या CISF इत्यादि में १०% का आरक्षण दिया जाएगा।

३:- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश इत्यादि राज्यों ने भी घोषणा कर दी है, अग्निवीरो को राज्य से सम्बन्धित सुरक्षा एजेंसियो इत्यादि में सम्मिलित कर लेंगे।

४:- चार वर्ष की सेवा समाप्ति के पश्चात अग्निवीरों को उनकी कौशलता के अनुरूप स्किल सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जो भविष्य में उनके लिए रोजगार के रास्ते खोलेगा।

५:-जो युवा अग्निवीर उद्यमी बनने के इच्छुक हैं, उन्हें वित्तीय पैकेज व बैंक लोन मिलेंगे।

६:- जो अग्निवीर आगे पढ़ने के इच्छुक हैं, उन्हें १२वीं के समकक्ष प्रमाणपत्र देकर ब्रिज कोर्स करवाया जाएगा
जो जॉब करना चाहते हैं, उन्हें केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों व राज्य पुलिस में प्राथमिकता मिलेगी कई अन्य सेक्टर भी इन अग्निवीरों के लिए खोले जाएंगे।

निष्कर्ष:-
१७से २१ वर्ष के युवाओं के उत्साह, उमंग और शारीरिक व मानसिक मजबूती का उपयोग देश को सुरक्षित रखने में किया जा सकेगा। गरीब से गरीब तबके के युवा इस योजना के अंतर्गत अपने भविष्य को शसक्त और सुदृढ़ बना सकते हैं। देश कि सेना तकनिकी का विशेष उपयोग कर सकती है। युवाओं के भटकाव में कमी आएगी। २१ वर्ष के युवा के हाथ में जब ११ से १२ लाख रुपये की रकम होगी और वित्तीय संस्थाएं उसकी और भी सहायता के लिए तैयार होंगी तो अपनी सोच क्षमता और ज्ञान के आधार पर अपना स्वर्णिम भविष्य का निर्माण कर सकता है।

चुंकि केंद्र सरकार रेजिमेंटल प्रणाली में कोई बदलाव नहीं कर रही है। बल्कि इस योजना के अनुसार वो प्रणाली को और मजबूत बना रही है क्योंकि यहां श्रेष्ठ अग्निवीर चुनकर आएंगे, इससे सेना कि व्यवस्था में सामंजस्य में और भी सुधार आएगा।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि अमेरिका, इजराइल, तुर्की जैसे अधिकतर देशों में छोटी अवधि के लिए सैन्य भर्ती व्यवस्था है, यह युवा और चुस्त सेना के लिए अच्छी मानी जाती है। पहले साल में भर्ती होने वाले अग्निवीर कुल सशस्त्र सैन्य बल के ३% होंगे। उनका प्रदर्शन जांच कर चार साल बाद सेना में फिर शामिल किया जाएगा। इस प्रकार सेना को वरिष्ठ रैंक पर जांचे-परखे सैनिक मिलेंगे।

विश्व की अधिकतर सेनाएं युवाओं पर निर्भर हैं। किसी भी समय सेना में अनुभवी लोगों से युवाओं की संख्या ज्यादा नहीं होगी। बल्कि अग्निपथ योजना से भी धीरे-धीरे ५०-५० प्रतिशत युवा व अनुभवी वरिष्ठ रैंक अधिकारियों का अनुपात कायम होगा। जो युवा ४ वर्ष सेना की यूनिफॉर्म पहनेंगे, वे देश के प्रति समर्पित रहेंगे। सैनिकों की औसत उम्र ३२ से २५ वर्ष करने में मदद मिलेगी

अब ऐसी स्वर्णिम योजना का विरोध करते हुए कुछ भटके हुए लोगों ने देश के ७०० करोड़ की सम्पत्ति को नष्ट कर दिया। और विश्वास मानिये ये संयोग नहीं था अपितु षड्यंत्रकारीयो और देशद्रोहियों द्वारा जानबूझकर किया गया प्रयोग था। खैर सेना, रक्षा मंत्रालय और देश के सुरक्षा सलाहकार ने तो कह दिया कि अग्निपथ योजना कभी वापस नहीं होगी। अब देश का युवा अपना स्वर्णिम भविष्य अपने हाथो से तय कर सकता है।

लेखन और संकलन:- नागेंद्र प्रताप सिंह (अधिवक्ता)
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