All posts by Nilay Mishra

budget, money, rupees

पैसा और आप- भाग 1

ये सत्य है की भारतियों में बचत करने की फितरत बचपन से ही रहती है लेकिन बचत से ज्यादा अगर महंगाई हो जाये तो फिर ऐसा बचत किसी काम का नहीं रह जाता। पैसा हमेशा समय के साथ बढ़ना चाहिए और इसकी वृद्धि दर महंगाई के दर से अधिक होनी चाहिए।

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मोदी से बाजार की उम्मीदें

इस बार की सरकार पर उम्मीद कम भरोसा ज्यादा है क्यूंकि देश की जनता ने पिछले पांच सालों का कार्य देख लिया है।जिस तरीके के प्रचंड बहुमत से सरकार दोबारा आयी है इससे अगर हम यह निष्कर्ष निकाले की ये मोदी जी के कार्यों के ऊपर जनता का मुहर है तो यह गलत नहीं होगा।

अभिनेता की राजनीती

हालिया दिनों में लोकसभा चुनाव के कारन बहुत सारे लोगों ने अपना वक्तव्य व्यक्त किया जिसमे कई अभिनेता भी हैं। स्वरा भास्कर, जावेद अख्तर का कन्हैया कुमार को समर्थन करना, कमल हसन का हिन्दू आतंकवाद को लेकर नाथूराम गोडसे को आतंकवादी कहना, अनुराग कश्यप का सरकार के खिलाफ अपने विचार रखना, रणवीर शोरी का सरकार के साथ खड़े होना ऐसे कई उदाहरण हैं।

क्या प्रेम ही समाधान है?

अभी लोकसभा चुनाव में नफरत की राजनीती के काफी चर्चे हैं, राहुल गाँधी जी द्वारा कई बार ऐसे वक्तव्य दिए गए हैं जिसमे उन्होंने कहा है की वो नरेंद्र मोदी जी से प्रेम करते हैं। राहुल गाँधी जी का प्रेम दिखाना जायज है लेकिन चुनाव प्रेम से नहीं लड़ के जीते जाते हैं।

चुनाव: जाति और धर्म का

प्रत्याशी की जाति क्या है इसे देखकर टिकट का बटवारा भी किया जाता है। अगर किसी प्रत्यासी ने विकास के नाम पर, अपने कार्य के नाम पर वोट मांगने की जुर्रत दिखाई तो हो सकता है उसे मुँह की खानी पड़े।

Rising Intolerance

असहिष्णुता और देश

असहिष्णुता देश में नहीं बढ़ी है बल्कि यह जवाब न देने का और सवाल करने वालों से बचने के लिए एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किये जाने वाला एक हथियार है और कुछ नहीं।

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