Thursday, March 4, 2021
10 Articles by

Nilay Mishra

Stock Market Trainer with expertise in domain of Trading and Investment.

पैसा और आप- भाग 3

हमें म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करना चाहिए या नहीं चाहिए?: अगर आप अपने पैसे के ऊपर कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते और उस पैसे के ऊपर ज्यादा ब्याज (बैंक जमा से) भी कमाने की इच्छा नहीं रखते हैं तो म्यूच्यूअल फंड्स आपके लिए नहीं है।

पैसा और आप- भाग 2

कितना पैसा अर्जित करना जरुरी है ताकी खुद के साथ साथ अपने अपनों का भी भरण पोषण अच्छे से हो सके।

पैसा और आप- भाग 1

ये सत्य है की भारतियों में बचत करने की फितरत बचपन से ही रहती है लेकिन बचत से ज्यादा अगर महंगाई हो जाये तो फिर ऐसा बचत किसी काम का नहीं रह जाता। पैसा हमेशा समय के साथ बढ़ना चाहिए और इसकी वृद्धि दर महंगाई के दर से अधिक होनी चाहिए।

मोदी से बाजार की उम्मीदें

इस बार की सरकार पर उम्मीद कम भरोसा ज्यादा है क्यूंकि देश की जनता ने पिछले पांच सालों का कार्य देख लिया है।जिस तरीके के प्रचंड बहुमत से सरकार दोबारा आयी है इससे अगर हम यह निष्कर्ष निकाले की ये मोदी जी के कार्यों के ऊपर जनता का मुहर है तो यह गलत नहीं होगा।

अभिनेता की राजनीती

हालिया दिनों में लोकसभा चुनाव के कारन बहुत सारे लोगों ने अपना वक्तव्य व्यक्त किया जिसमे कई अभिनेता भी हैं। स्वरा भास्कर, जावेद अख्तर का कन्हैया कुमार को समर्थन करना, कमल हसन का हिन्दू आतंकवाद को लेकर नाथूराम गोडसे को आतंकवादी कहना, अनुराग कश्यप का सरकार के खिलाफ अपने विचार रखना, रणवीर शोरी का सरकार के साथ खड़े होना ऐसे कई उदाहरण हैं।

India in context of IMF slowdown expectations

2019 Lok sabha election results which is scheduled to be announced on 23rd May will play a key role in growth and development of country, as various economic reform steps were taken by government in previous tenure.

क्या प्रेम ही समाधान है?

अभी लोकसभा चुनाव में नफरत की राजनीती के काफी चर्चे हैं, राहुल गाँधी जी द्वारा कई बार ऐसे वक्तव्य दिए गए हैं जिसमे उन्होंने कहा है की वो नरेंद्र मोदी जी से प्रेम करते हैं। राहुल गाँधी जी का प्रेम दिखाना जायज है लेकिन चुनाव प्रेम से नहीं लड़ के जीते जाते हैं।

चुनाव: जाति और धर्म का

प्रत्याशी की जाति क्या है इसे देखकर टिकट का बटवारा भी किया जाता है। अगर किसी प्रत्यासी ने विकास के नाम पर, अपने कार्य के नाम पर वोट मांगने की जुर्रत दिखाई तो हो सकता है उसे मुँह की खानी पड़े।

असहिष्णुता और देश

असहिष्णुता देश में नहीं बढ़ी है बल्कि यह जवाब न देने का और सवाल करने वालों से बचने के लिए एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किये जाने वाला एक हथियार है और कुछ नहीं।

मोदी और बाजार

अगर बाजार को पहले ही ये समझ आ जाता है की आगे का भविष्य क्या होने वाला है तो इस हिसाब से मोदी की जीत पक्की है। अगर महागठबंधन के सरकार बनाने की जरा सी भी उम्मीद होती तो बाजार उत्तर की दिशा को कूच न कर के दक्षिण की दिशा की ओर गोते लगाता।

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