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अश्वमेध यज्ञ और फैली भ्रांतियाँ

वर्तमान में स्वघोषित बुद्धिजीवी हिंदुत्व की आलोचना कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। धर्मग्रन्थों को बिना समझे उनमें लिखी बातों का मनमाना अर्थ निकलकर दुष्प्रचार करना इन तथाकथित बुद्धिजीवियों का शौक बन गया है।

माननीय मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को पत्र

आप का साथ देने वाले आज यह पोस्ट और ‘फेक न्यूज़’ चला रहे हैं कि अगले सप्ताह राफेल पर सुनवाई की वजह से दवाब बनाने के लिए यह आरोप लगाया गया है। तो जनाब, सुनवाई तो नेशनल हेराल्ड पर भी होने वाली है। सुनवाई तो अवमानना केस पर भी हुआ।

क्या आतंकवाद का कोई धर्म है? हाँ है, और अवश्य है

अगर यह कट्टरपंथी सोच किसी धार्मिक ग्रन्थ से आ रही है तो तत्काल ऐसी शिक्षा पर रोक लगनी चाहिए और यदि यह सोच उन धार्मिक शिक्षाओं को न समझ पाने की वजह से उत्पन्न हो रही है तो उन शिक्षाओं को समझने लायक सरल शब्दों में बदलना चाहिए।

युवा भारत, जागृत भारत

राजनैतिक उदासीनता का लोकतंत्र में बिलकुल स्थान नहीं है और नहीं होना चाहिए। जनता की राजनैतिक उदासीनता से हो सकता है कि अयोग्य प्रत्याशी का चुनाव हो जाए।

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