Thursday, April 22, 2021

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Student Politics

क्या जेएनयू हिंसा छात्र संघों के राजनीतिक दलों से किसी भी तरह के साहचर्य को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का सही मौका नहीं...

क्या एक सभ्य लोकतंत्र को चलाने हेतु आवश्यक नागरिकों की नस्ल को पैदा करने और प्रशिक्षित करने के उद्देश्य में इस तरह के विरोध प्रदर्शन किसी तरह से उपयोगी हो पाएँगे? या ये अराजकता और तानाशाही को जन्म देंगे?

JNU like protests at TISS in Mumbai – how political propaganda works on campuses

A student from TISS writes about the experiences faced on campus.

Gurmehar Kaur: The useful idiot of left liberalism

The misplaced idealism which teaches Gurmehar that war killed her father is result of Marxist indoctrination of students in Indian universities. Indian academia is completely dominated by Marxists and liberals

यह कैसी पढ़ाई है और ये कौन से छात्र हैं?

छात्र तो मोहरा भर हैं असली राजनीति तो वे समझ ही नहीं पा रहे। शायद इसीलिए 27 फरवरी को रामजस कालेज के प्रिंसिपल राजेन्द्र प्रसाद छात्रों के बीच खुद पर्चे बाँट रहे थे जिसमें उन्होंने साफ तौर पर लिखा कि देशभक्ति की हवा तले शिक्षा को खत्म न होने दें।

राजनीति में आने के लिए “शार्ट कट” की तलाश करती गुरमेहर कौर

राजनीतिक दलों की लिखी हुयी स्क्रिप्ट पर काम करते हुए पहले तो गुरमेहर कौर ने इस सारे मामले को अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़ते हुए जे एन यू के छात्रों का समर्थन कर दिया और घोषणा कर डाली कि-" मेरे पिता कि मृत्यु के लिए पाकिस्तान नहीं, युद्ध जिम्मेदार है."

Save Indian Universities

Over the past few days, some people want Azadi, some raise slogans, some fight for Najeeb some for Rohith but not one fights for the state of education. Not one says that education should not suffer.

ABVP Pune set to change the discourse of the education

There are only a few organizations like ABVP (Akhil Bhartiya Vidyarthi Parishad) who has the history of fighting against the evils in the education system.

The JNU incidence also poses some touch question to the JNU faculty

With this JNU controversy, we should not forget the role of 600 odd teachers, faculty as they are called, of JNU

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