Thursday, December 3, 2020

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self reliant india

स्वदेशीकरण की महत्ता

परन्तु वर्तमान समय में पुनः स्वदेशीकरण की आवश्यकता क्यों महसूस हुई है? इसका मुख्य कारण विश्वभर में फैली कोरोना वायरस की महामारी जिसने विश्व की सप्लाई चेन की व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया।

Atmanirbhar is not merely Swadeshi- Here is why

India today stands on the cusp of a potential transformation in the way in which it produces and consumes. Irrespective of the political ideologies people may follow, it is worth to look at the ‘Atmanirbhar Bharat’ movement from an economic perspective.

स्वदेशी, स्वावलंबी, आत्मनिर्भर भारत – संकल्प राष्ट्र का

आत्मनिर्भर भारत मतलब विदेशो की बैसाखी का सहारा छोड स्वयं के पैरो पर खडा भारत, अपनी आत्मा पर निर्भर भारत और भारत की आत्मा उसकी ज्ञान, संस्कृति, सिद्धांत व मूल्य आधारित व्यवस्थायें है, अर्थव्यवस्था जिसका की एक महत्वपूर्ण अंग है।

आज का भारत

पर इस बार मोदी ने लाइन खींच दी है, विश्व को भी आगाह किया है की पागल हाथी बहुत विन्ध्वंस लाता है। डैगन की सारी आग उसी हिमालय में बर्फ बन जाएगी और हाँथी जिधर चलेगा उधर शमशान बनता जाएगा।

India’s moment has arrived!

Whether India becomes Atma Nirbhar or not, depends not just on how India acts but also on global developments, especially in USA, China and Europe, and the recent global Corona-virus pandemic.

Can we boycott Chinese in India?

A practical opinion on the recent demand for boycotting Chinese products, its reception on social media, and a possible way forward amidst ceaseless attacks from opposition

Latest News

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 21

हमारे सनातन धर्म की मूल भावना "जीयो और जीने दो" तथा "सभी जीवो को अपना जीवन अपनी ईच्छा से जीने का अधिकार है" में निहित है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी अपने संपूर्ण जीवन काल मे प्रत्येक जीव के प्राण व दैहिक स्वतंत्रता को अमुल्य व सर्वोपरि मानकर प्रतिष्ठित किया

2020: An unprecedented, unpredictable, and uncertain year

Who could have imagined that the “unique 2020” would ironically turn into the most "unprecedented, unpredictable, and uncertain 2020" of historic proportions, perhaps not even worth remembering and writing about?

Mr. Ahmad Patel, they missed you!

Through the obituaries and condolences written by MSM journalists, one can easily see as to why these power brokers who used to enjoy the access to power corridors are so unnerved as they miss the absence of jugglers and conjurers in current regime.

गुपकार गैंग द्वारा रोशनी एक्ट की आड़ में किया गया 25000 करोड़ रुपए का घोटाला!

व्यवस्था का लाभ उठाकर 2001 से 2007 के बीच गुपकार गैंग वालों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर को जहाँ से मौका मिला वहाँ से लूटा, खसोटा, बेचा व नीलाम किया और बेचारी जनता मायूसी के अंधकार में मूकदर्शक बनी देखती रही।

Death of the farmer vote bank

While in the case of a farmer the reform delivered double benefit but the political class faces double whammy, that of losing its captive vote bank that was dependent on its sops and secondly losing the massive income they earned as middlemen between the farmer and the consumer. Either the farmer is misinformed or wrongly instigated, otherwise it is impossible to conceive that any farmer should be actually unhappy or opposed for being given more choices, as to whom to sell their produce.

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गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था के मध्य अंतर और हमारे इतिहास के साथ किया गया खिलवाड़

वास्तव में सनातन में जिस वर्ण व्यवस्था की परिकल्पना की गई उसी वर्ण व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके समाज में जाति व्यवस्था को स्थापित कर दिया गया। समस्या यह है कि आज वर्ण और जाति को एक समान माना जाता है जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

Pt Deen Dayal Upadhyaya and Integral Humanism

According to Upadhyaya, the primary concern in India must be to develop an indigenous economic model that puts the human being at centre stage.

Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.