Saturday, September 26, 2020

TOPIC

casteism

मनुस्मृति और जाति प्रथा! सत्य क्या है?

मनुस्मृति उस काल की है जब जन्मना जाति व्यवस्था के विचार का भी कोई अस्तित्व नहीं था. अत: मनुस्मृति जन्मना समाज व्यवस्था का कहीं भी समर्थन नहीं करती.

Caste on wheels

Showing the caste names opening on the wheels and investing wholeheartedly of to which caste one is brought into the world is such backward and in reverse and absolutely not dynamic or forward looking.

जातिगत आधार पर कुख्यात अपराधी विकास दुबे की पैरवी करने वाले लोगों को कुछ तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए

आप जिसे अपना ब्राह्मण भाई समझ कर शेर बता रहे हैं या उसके अपराधी बनने के पीछे सिस्टम को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, आपके उसी शेर विकास दुबे ने जितनी हत्याएं अब तक की है उनमें से 80% ब्राह्मण ही हैं।

Sonam Kapoor, Karma and Caste: How left-liberal ecosystem normalizes casteism

What would a upper-caste left-liberal do after a warm lunch on quiet Sunday?

अतार्किक होते हुए भी क्यों प्रचलित है जातिवाद

इस समाज को यदि जातिवाद के जाल से निकलना है तो, इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य मे पढ़ाना होगा, सभी जन मानस को समान समझना होगा और पुत्र मोह को त्यागना होगा, तभी हम एक सभ्य समाज कि रचना कर सकते है जिसकी कल्पना हमारे पूर्वजों ने की थी।

“I don’t believe in caste”

Caste- the original phrase carries as much weight as claiming to disbelieve in capitalism. The question of belief does not arise at all. As the duality of rich and poor exists, so does caste. And it will stay.

Sir Jadeja and his sword

Neither Ravindra Jadeja’s identification to a caste, nor his Rajputana sword wave is an endorsement of casteism.

अम्बेडकरवादियों का सच

बाबासाहेब का यथार्थवाद वर्तमान समय में किसी भी राजनीतिक दल के खांचे फिट नहीं बैठता। आंबेदकरवाद का पुर्ण अनुकरण किसी दल या नेता के बस की बात नहीं हैं।

पहले इंसान बन जा

माना की जातीय परंपरा एक भाग हैं भारतीय समाज काI परन्तु ये जातीय परंपरा कम और अंतरजातीय संघर्ष ज्यादा प्रतीत होता हैI भारत में लोग जात के नाम पर भीड़ जाते है, मार दिए जाते हैंI

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

Latest News

Yogi Adityanath is right when he says “How can Mughals be our hero”

Why the name is important if that’s the question then given the free run of the secular historians right from the dawn of India’s independence, made us almost forget our own history, our ancestry, our tradition, and our culture.

GDP fall: Can we overcome this?

We should understand the fact that due to the pandemic situation, the whole world went on for a lockdown because heath is a major concern for any government.

Changes in labour laws – Kaal is the issue

Most of the above changes are going to help in doing business at ease which will eventually attract investors, including FDI. Only concern is, elimination of Standing Orders and elimination of labour unions’ interference for establishments employing up to 300 workers will not go down well with people as it will hinder job security of the workers.

25 सितम्बर/जन्म-दिवस एकात्म मानववाद के प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय

सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है, किन्तु अभावों के बीच रहकर शिखरों को छूना बहुत कठिन है। 25 सितम्बर, 1916 को जयपुर से अजमेर मार्ग पर स्थित ग्राम धनकिया में अपने नाना पण्डित चुन्नीलाल शुक्ल के घर जन्मे दीनदयाल उपाध्याय ऐसी ही विभूति थे।

जांबाज पुलिस

"बीजेपी और आरएसएस के एजेंट पाए जाने पर सख्त कार्यवाही होगी। बुकिंग था कि नहीं यह जांच का विषय नहीं है! धार्मिक आधार पर भेदभाव बर्दास्त नही होगी। "नो बॉडी विल ट्राय टू डिस्टर्ब कम्युनल हार्मोनी इन बंगाल! मा माटीर मानुस! जय बंगला! अमार बंगला! सोनार बंगला! विश्व बंगला! जय कोलकाता पुलिस।"

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There is a deeper story to Ambedkar's journey than most know

पोषण अभियान: सही पोषण – देश रोशन

भारत सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जीवनचक्र एप्रोच अपनाकर चरणबद्ध ढंग से पोषण अभियान चलाया जा रहा है, भारत...

Breaking India: Bangla Pokkho in Bengal, like Kashmiriyat in Kashmir

Prima Facie, it would look like any regional linguistic movement, like Shiv Sena's Marathi Maanoos (Person) and Marathi Asmita (Pride) movement, or Tamizh Pride that Dravidian Parties project. But if we scratch the surface we will observe that it is a very smartly devised separatist movement under the guise of linguistic regionalistic sub-nationalism.

New Education Policy- Winning the world with the Bharat centric Values

The NEP is an ambitious document, which is focused on the holistic and overall development of the students to make them Aatmnirbhar and to enable them to compete with the world while maintaining the Bharat centric values and culture.

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।
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