Saturday, February 27, 2021

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Maryada Purshottam Shri Ram

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 21

हमारे सनातन धर्म की मूल भावना "जीयो और जीने दो" तथा "सभी जीवो को अपना जीवन अपनी ईच्छा से जीने का अधिकार है" में निहित है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी अपने संपूर्ण जीवन काल मे प्रत्येक जीव के प्राण व दैहिक स्वतंत्रता को अमुल्य व सर्वोपरि मानकर प्रतिष्ठित किया

The true heritage of Bharat, a land of Dharma!

If Lord Rama is taken as a yardstick, it is not because he is a God, it is because he showed the extent of human capability and perseverance that can achieve miracles and wonders. He was born human but is worshiped as God because of his serenity and calm right from his childhood.

Can Lord Ram become a “historical” figure or will be linked to mythology forever?

Lord Ram had to fight for his birth place now will he have to fight for his identity?

राम मंदिर और भारतीय संस्कृति

राम मंदिर का निर्माण भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं उत्थान की ओर बड़ी छलांग है, सदियों से विदेशी आक्रांताओं ने न केवल भारत को लूटा अपितु उसकी संस्कृति को नष्ट भ्रष्ट करने का यथासम्भव प्रयास किया।

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