Saturday, May 8, 2021

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Female superiority in Hinduism

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जहां से शुरू हुआ वहां तो भारत से सीख लेकर महिलाओं को काली रूप धारण करना चाहिए!

विद्या की देवी सरस्वती, धन की देवी लक्ष्मी, महारानी अवंतीबाई, विदुषी गार्गी, रानी लक्ष्मीबाई, महारानी झलकारी बाई, इंदौर की उदारमना शासक देवी अहिल्याबाई, गोंडवाना की शासक रानी दुर्गावती, रानी रुद्रम्मा देवी, रानी चेनम्मा, रानी और अनेकानेक उदाहरण हमारे समाज में मौजूद है।

Feminism movement- helping or hurting Bharatiya women?

Articles are written, conferences are organised, special programs and advertisements are on television and there are celebrations on women’s day all over the world, Sounds cool, doesn’t it?

Violence awaits silence

Domestic violence not only indicates physical abuse, bruises, and wounds but mental scars, battering opinions, the crucifixion of freedom, and shredding identity as well.

Womanhood: An Indian perspective

The clear heart and aspiring mind of a modern woman makes the society an elated space and to be breathing the same air is an honour and privilege and calls for life line celebrating period.

Why social reforms never reach to Muslim women? Why are they still silent about their rights?

In our country and especially in Hindu religion a woman is believed to be Laxmi, a capable, educated and independent woman. This holds true for Muslim women too who if given a chance can be of real strength to the country both economically and emotionally.

Savitri Katha – A tale of a powerful woman

Savitri stood for everything which a modern feminist shall strive for. Independent, assertive, devotion, wisdom, intelligence, and a fighting spirit.

रचनाधर्मियों को गर्भस्थ बेटी का उत्तर

जो तुम्हें अग्नि परीक्षा देती असहाय सीता दिखती है, वो मुझे प्रबल आत्मविश्वास की धनी वो योद्धा दिखाई देती है जिसने रावण के आत्मविश्वास को छलनी कर इस धरा को रावण से मुक्त कराया.

वट (सती) सावित्री के बहाने नारीवादी चर्चा

एक स्त्री जो अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, लिए गए निर्णय पर अडिग रहना जानती है, निर्णय का कुछ भी परिणाम हो उसे स्वीकार करने के लिए प्रस्तुत है, अपने प्रेम के लिए राजमहल को त्याग वन को जा सकती है, अपने प्रिय की प्राणरक्षा के लिए सीधे यमराज से टकराने का साहस और विजयी होने का सामर्थ्य रखती है क्या वो स्त्री निरीह या अबला हो सकती है?

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते: यहाँ ईश्वर को भी सर्वप्रथम ‘त्वमेव माता’ का सम्बोधन दिया जाता है

समानता का नारा देकर नारी को पुरुष के स्तर पर लाने का प्रयास इस देश में वैसे ही है जैसे बड़ी लकीर को मिटाकर छोटी के बराबर कर देना। भारत में जहाँ नारी को स्वयंवर तक की स्वतंत्रता रही हो वहाँ स्वतंत्रता, समानता का नारा देना उसके महत्त्व को कमतर करने का ही दुस्साहस कहा जा सकता है।

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