Tuesday, March 9, 2021
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अमित कुमार

अमित कुमार, सहायक प्राध्यापक (भूगोल), एम.एन.एस. राजकीय महाविद्यालय, भिवानी।
  • भारतीय समाज, संस्कृति और राजनीति के अध्ययन में विशेष रुचि

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते: यहाँ ईश्वर को भी सर्वप्रथम ‘त्वमेव माता’ का सम्बोधन दिया जाता है

समानता का नारा देकर नारी को पुरुष के स्तर पर लाने का प्रयास इस देश में वैसे ही है जैसे बड़ी लकीर को मिटाकर छोटी के बराबर कर देना। भारत में जहाँ नारी को स्वयंवर तक की स्वतंत्रता रही हो वहाँ स्वतंत्रता, समानता का नारा देना उसके महत्त्व को कमतर करने का ही दुस्साहस कहा जा सकता है।

दुर्बलता मृत्यु है

हमारे राष्ट्र और हमें अब शक्तिशाली बनना ही होगा। शक्तिसंपन्न हुए बिना भला अशोक और गाँधीजी का अहिंसा और विश्वशांति का सन्देश "श्रेष्ठतम की उत्तरजीविता" जैसे जंगल के कानून में विश्वास करने वाले संसार को कैसे हम समझा पाएंगे?

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