Monday, April 15, 2024

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Democracy of India

लोकतंत्र के मंदिरों को अपवित्र करते अपराधी तत्व

1947 मे छद्म शांति के लिये देश विभाजन रूपी भारी मूल्य चुकाने का आत्मघाती निर्णय तुष्टीकरण की नीति का कुपरिणाम था यह नीति आज़ादी के अनंतर भी कायम रही। आज शासन के लिये इस नीति से मुक्त हो इतिहास की भूलों से सबक लेना, अपनी संवेधानिक शक्तियों के दृढ़ता पूर्वक प्रयोग द्वारा असामाजिक तत्वों को निर्मूल कर लोकतंत्र के मंदिरों मे इनका प्रवेश निषेध करना अत्यावश्यक है।

After 75 years of democracy

Many ideologies somehow work in a democracy, even ideas that are anti-democratic work democratically.

Public, politicians, peace and prosperity

In India democracy has not been adopted, rather we have democratic nature since the time immemorial. We have developed democracy inside us since the time immemorial.

वर्तमान संदर्भों मे लोकतंत्र के सिद्धांतों की समीक्षा विचारणीय

लोकतंत्र मे भी शक्ति का विवेकयुक्त प्रयोग देश मे सुशासन और शांति समृद्धि की गांरटी है। भारत की वर्तमान दुरावस्था लोकतांत्रिक परंपराओं को पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकाता का संकेत करती है।

2014 से लोकतंत्र खतरे में है

इसे भारत का दुर्भाग्य कहेंगे कि यहां की माटी पर मुट्ठी भर लोग ऐसे हैं, जो पाश्चात्य विचारधारा का अनुगामी बनते हुए यहां की परंपरा और प्रतीकों का जमकर माखौल उड़ाने में अपने को धन्य समझते है।

The democratic dilemma of India

it is time for the left and liberal political parties in Kerala to shrug off their appeasement strategy and let the law administration authorities act upon these radical Islamists and put them under the bars.

नए संसद भवन के भूमि पूजन के समय, मोदी जी ने उथिरामेरूर का उल्लेख किया था: क्यों?

उथिरामेरूर चेन्नई से लगभग ९० किमी दूर कांचीपुरम जिले में स्थित है, जो अपने आप में १२५० वर्षों का इतिहास समेटे हुए है। और आप को यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में विद्दमान लोकतंत्र का सर्वोत्तम मॉडल है।

Can democracies survive the excess dosage of individual liberties over common good?

Where is the system of checks and balances of a Democracy headed for? All the checks are on the Govt which needs to deliver and no check on those who do not have to deliver but are hell bent on disrupting governance.

Despicable and deplorable desecration of the Red Fort: Bharat’s damaged democracy

What was shocking and sad that January 26, the day when independent India’s constitution was unveiled, became the battleground of unruly and despicable behavior in the name of “Annadata,” the farmers who toil the land with their sweat and grow food to feed the millions.

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