Tuesday, April 20, 2021

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Communist Party of India

भारत का वामपंथ इतना पिछड़ा और पिछलग्गू क्यों?

कभी भी भारत के वामपंथियों को मार्क्स, लेनिन, माओ या फिर कास्त्रो के मध्य खुद की औकात बनाते नहीं पाया।

The bloody history of communism: USSR

Communism is a political system in which the state owns the economy and aims to treat everyone equally. But the last 100 years have...

Communism: The opium of the mass murderers

What Nazis did was documented, filmed and photographed. But what about Communism? A sugarcoated ideology which killed millions of people across the globe: From Moscow to Stalingrad, Beijing to Tibet to Xinjiang, Pyongyang to killing fields of Cambodia, Tripura to Bengal to Kerala and so on.

The history of India – a story of distortion by marxists

By interpreting history only on the basis of economic monopoly can not eradicate the wrongdoings which were done based on religion.

चीन और पाकिस्तान का भारत पर सर्जिकल स्ट्राइक: एक बार नहीं कई बार

जब चीन के सामानों के बहिष्कार की लहर चल रही थी तो अपने ही देश के कुछ लोग चीन की वफादारी में लगे थें। हाँ ये बात अलग है कि अब वैसे लोग जेल जा रहे है जो अच्छी बात है।

वामपंथ का काला सच जो अब तक हमसे छिपाया गया

पिछले सौ सालों में वामपंथी सोच के कारण मानवता के शरीर पर अनेक घाव लगे हैं. आज के दिन 31 वर्ष पहले थियानमेन चौक पर जो बर्बरता हुई, वो आने वाली पीढ़ियों को वामपंथ के वास्तविक चेहरे का परिचय कराती रहेगी.

भारत में प्रमाणपत्रवाद (सर्टीफिकेशनलिज़्म) का सफर

भारत में आप को भक्त, संघी, चड्डी, अन सेक्युलर के प्रमाणपत्र राह चलते मिल जाएँगे. सिर्फ़ आपको आपके स्पष्ट विचार रखने हैं।

Washington Post doing a ‘Deshabhimani of America’

WP changes article's headline “India Kerala Coronavirus: How the Communist state flattened its Coronavirus curve” to a more neutral looking ”How the Indian state of Kerala flattened its Coronavirus curve”. Says much about their propaganda.

Indian Communists need to see a MIRROR!

Communists stand as a professional failure at all the fronts where their dare to question the Nationalists and try to trap the youth of our country in their propaganda.

साम्यवाद – लोकतंत्र और राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा

साम्यवाद में प्रतिएक मानव को संदेह की दृष्टि से देखने की प्रवृत्ति के कारण राजकीय तंत्र (सरकारी अफसर, प्रशाशन, सेना) सकती से काम करे यह भी जरूरी हो गया जिस कारण इन्हें भी सरकारी जोर के अंतर गत कार्य करवाना जरूरी था।

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