Saturday, September 18, 2021

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Ashok Gehlot

मिला झूठा आश्वासन मगर न्याय 6 महीने बाद भी नहीं, गहलोत सरकार से न्याय की उम्मीद में बैठा परिवार

आहौर के निकटवर्ती गाँव शंखवाली गाँव में 11 बर्षीय छात्र 11 फरवरी 2021 को घर से स्कूल के लिये निकला था देर रात तक घर नही पहुचाता है और सुबह 12 फरवरी 2021 को छात्र का शव स्कूल के पास खेत मे मिलता है।

What Ashok Gehlot’s got which Sachin Pilot has not?

Sachin Pilot has what Rahul Gandhi has - Legacy and age on his side! And also what Rahul lacks - Merit! More than anybody, He is a threat to the Gandhi Dynasty.

Sachin- saga is the Congress Party’s own making

Conhress party only allowed Sachin Pilot to think that it was suicidal for his political career to remain in the party.

The net loser in Rajasthan’s chaos

From Jaitley and Sushma Swaraj to Anurag Thakur and Tejaswi Surya, the BJP believed in its young guns and that's a major reason why it's never short of good leaders.

Its time up for Rahul’s friends in Congress

Gehlot is the strong man and Rahul has once again proven his inability to protect the interest of his friend Sachin pilot.

गेहलोत के विरोध के बावजूद भी पार्टी में लाना चाहते है पायलट को राहुल गांधी

पायलट काफी लम्बे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए थे और राजस्थान के युवाओ का उनको समर्थन भी बहुत अधिक है जिसके कारण यह गेहलोत के लिए आने वाले समय में एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकते है।

गहलोत vs पायलट: राजस्थान में सियासी घमासान, देखे आंकड़ों का खेल

बागी पार्टी नेता पर चाबुक का वार करते हुए, कांग्रेस ने मंगलवार को पायलट को राजस्थान के उप मुख्यमंत्री और पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख के पद से बर्खास्त कर दिया। पार्टी ने उनके वफादारों विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी राज्य मंत्रिमंडल से हटा दिया।

मॉडल पर चर्चा!

अन सेक्युलर मॉडल। (by @ambujkmrjha)

क्या राजस्थान उन्मादी सांप्रदायिक राज्य में तब्दील हो रहा है?

गहलोत-पायलट युग्म सरकार को राजस्थान में महज अभी आठ-नौ महीने ही हुआ है, लेकिन जिस तरह इस युग्म सरकार का एक खास समुदाय के प्रति तुष्टिकरण हो रहा है, उससे लगता है आने वाले दिनों में प्रदेश में कानून और व्यवस्था के हालात बेकाबू होने वाले हैं।

नाकारा पुलिस, निर्लज्ज सरकार और प्रगतिशील मीडिया का मुखर मौन

क्या अलवर जिले के थानागाजी क्षेत्र में दलित महिला के लिए साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने राज्य के राजनैतिक तंत्र के माथे पर हल्की भी सिकन पैदा नहीं की? अगर होती तो अशोक गहलोत चुनाव प्रचार पर जाने से पहले पीड़िता का दर्द बांटने और उसे न्याय दिलाने का आश्वासन देने अब तक थानागाजी पहुंच चुके होते।

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