Tuesday, October 20, 2020

TOPIC

Ashok Gehlot

What Ashok Gehlot’s got which Sachin Pilot has not?

Sachin Pilot has what Rahul Gandhi has - Legacy and age on his side! And also what Rahul lacks - Merit! More than anybody, He is a threat to the Gandhi Dynasty.

Sachin- saga is the Congress Party’s own making

Conhress party only allowed Sachin Pilot to think that it was suicidal for his political career to remain in the party.

The net loser in Rajasthan’s chaos

From Jaitley and Sushma Swaraj to Anurag Thakur and Tejaswi Surya, the BJP believed in its young guns and that's a major reason why it's never short of good leaders.

Its time up for Rahul’s friends in Congress

Gehlot is the strong man and Rahul has once again proven his inability to protect the interest of his friend Sachin pilot.

गेहलोत के विरोध के बावजूद भी पार्टी में लाना चाहते है पायलट को राहुल गांधी

पायलट काफी लम्बे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए थे और राजस्थान के युवाओ का उनको समर्थन भी बहुत अधिक है जिसके कारण यह गेहलोत के लिए आने वाले समय में एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकते है।

गहलोत vs पायलट: राजस्थान में सियासी घमासान, देखे आंकड़ों का खेल

बागी पार्टी नेता पर चाबुक का वार करते हुए, कांग्रेस ने मंगलवार को पायलट को राजस्थान के उप मुख्यमंत्री और पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख के पद से बर्खास्त कर दिया। पार्टी ने उनके वफादारों विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी राज्य मंत्रिमंडल से हटा दिया।

मॉडल पर चर्चा!

अन सेक्युलर मॉडल। (by @ambujkmrjha)

क्या राजस्थान उन्मादी सांप्रदायिक राज्य में तब्दील हो रहा है?

गहलोत-पायलट युग्म सरकार को राजस्थान में महज अभी आठ-नौ महीने ही हुआ है, लेकिन जिस तरह इस युग्म सरकार का एक खास समुदाय के प्रति तुष्टिकरण हो रहा है, उससे लगता है आने वाले दिनों में प्रदेश में कानून और व्यवस्था के हालात बेकाबू होने वाले हैं।

नाकारा पुलिस, निर्लज्ज सरकार और प्रगतिशील मीडिया का मुखर मौन

क्या अलवर जिले के थानागाजी क्षेत्र में दलित महिला के लिए साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने राज्य के राजनैतिक तंत्र के माथे पर हल्की भी सिकन पैदा नहीं की? अगर होती तो अशोक गहलोत चुनाव प्रचार पर जाने से पहले पीड़िता का दर्द बांटने और उसे न्याय दिलाने का आश्वासन देने अब तक थानागाजी पहुंच चुके होते।

When the selfish royals throw their people to the wolves

The story which is emerging even before election results, is that the good-for-nothing royals have abandoned their troops in the middle of the battlefield to save themselves.

Latest News

शांत कश्मीर और चिदंबरम का 370 वाला तीर

डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के सबसे शक्तिशाली मंत्रियो में से एक चिदंबरम आज वही भाषा बोल रहे है जो पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर बोलता आया है। चिदंबरम यही नहीं रुके उन्होंने अलगाववादियों को भी महत्व देने की बात कही है।

मिले न मिले हम- स्टारिंग चिराग पासवान

आज के परिपेक्ष्य में बिहार का चुनाव कई मायनो में अलग है। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पारम्परिक राजनीती वाली रणनीति का अनुसरण कर रहे है तो वही युवा चिराग और तेजस्वी विरासती जनाधार को नए भविष्य का सपना दिखने का प्रयास कर रहे है।

How BJP can win seats in Tamil Nadu and Kerala

It is time for BJP to eye on Tamil Nadu and Kerala. In Lok Sabha election 2024 BJP will win ±15 seats in TN and ±3 seats in Kerala.

Brace for ad Jihad

Delusionary fairy tale

Why this hullabaloo about shifting Bollywood?

Let the new film city emerge as the genuine centre for producing high quality films that are genuinely Indian and be helpful in building a strong value-based society.

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Jallikattu – the popular sentiment & ‘The Kiss of Judas Bull’ incident

A contrarian view on the issue being hotly debated.

सामाजिक भेदभाव: कारण और निवारण

भारत में व्याप्त सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेष के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है के साथ ही व्यापक रूप से प्रभावी है परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही व्याप्त नहीं माना जा सकता।

How I was saved from Love Jihad

A personal experience of a liberal urban woman and her close brush with Islam.

Twitter wrongfully reports Jammu & Kashmir’s location again

In February of this year Twitter was accused of getting Jammu & Kashmir’s location wrong.

हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना कहां तक उचित है??

विज्ञापन में दिखाए गए पात्रों के धर्म एक दूसरे से बदल दिए जाएं तो क्या देश में अभी शांति रहती। क्या तनिष्क के शोरूम सुरक्षित रहते। क्या लिबरल तब भी अभिभ्यक्ती की स्वतन्त्रता की बात करते।