Sunday, December 4, 2022

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हिन्दू

आख़िर कहाँ और कितना बाकी है हिंदू?

स्वयं चिंतन ,स्वयं संगठन , स्वयं क्रिया , स्वयं पुरुषार्थ , तथ्यों से आगे कर्मबोध तक जाना है अन्यथा हिंदुओं की लुटिया खुद हिंदुओं को ही समयचक्र में पुनः पुनः डूबना है ।

मोदी जी का आना और बहुत कुछ बदल जाना: किसी को सबकुछ मिल जाना और किसी का सबकुछ लुट जाना

हर मर्ज की दवा मोदी जी नहीं हो सकते। आपको विदेशी कंपनियों के उत्पादों का वहिष्कार करना होगा, इसके लिए मोदी जी के बैन लगाने का इंतज़ार न करिये, ये काम हम आप भी मिल कर सकते हैं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में चलता हिन्दू धर्म का अपमान

जिस हिन्दू धर्म ने इस राष्ट्र को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया, सर्वधर्म समावृत्ति की शिक्षा दी उसी धर्म के सम्मान की अव्हेलना कर देना इस देश में कहाँ तक उचित है? क्या समीक्षा एवं अपमान के बीच कोई विभाजन की रेखा नहीं बची अथवा कोई रेखा खींचना नहीं चाहता।

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