Saturday, January 23, 2021
5 Articles by

Jayendra Singh

I am a political enthusiast, universal learner and a follower of Dharma. I write as Indic leaning centrist with opinions and topics related to political situation in India and globe. I also love to write poetry and songs. धर्मो रक्षति रक्षित:

अब जैविक-रासायनिक हथियारों पर होगी दुष्टों की नज़र

बिना किसी को पता चले, बिना किसी मिसाइल तकनीक के, बिना किसी शारीरिक कठिनाई के, इस वायरस ने पूरी दुनिया को घुटने के बल ला दिया। जहाँ आतंकवादी संगठन करोड़ों-अरबों का निवेश करके परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में रहते है वहीं इस वायरस ने व्यक्ति के शरीर को ही मिसाइल की तरह प्रयोग किया और दुनिया को शोक सभा बना दिया।

अतार्किक होते हुए भी क्यों प्रचलित है जातिवाद

इस समाज को यदि जातिवाद के जाल से निकलना है तो, इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य मे पढ़ाना होगा, सभी जन मानस को समान समझना होगा और पुत्र मोह को त्यागना होगा, तभी हम एक सभ्य समाज कि रचना कर सकते है जिसकी कल्पना हमारे पूर्वजों ने की थी।

Feminism is nice, but why settle for a lesser idea?

Feminism talks about only women, Devi talks about humanity and cares for everyone equally as a compassionate mother (real gender neutrality)

नया परिप्रेक्ष्य: व्यापार नहीं है परिवार

परिवार मे पारिवारिक और व्यापार मे व्यापारिक होना ही सही नीति है और इसी भूमिकाओं के विभाजन से ही से परिवार बच सकता है।

स्वरोजगार और समाज

जहाँ सरकार पूरी तरह प्रयासरत है, ऐसा प्रतीत होता है की समाज भी इसमे बराबर भगीदार है। परन्तु वास्तविक्ता इससे भिन्न है।

Latest News

The historic and hopeful January 20, 2021

Let January 20 serve as a stark reminder for the world at large that the democracy may have been halted temporarily but it has returned with greater hope and not fear.

खालसा पंथ की सिरजना के पीछे का ध्येय और गुरु गोबिंद सिंह जी

गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित खालसा पंथ और उनकी बलिदानी परंपरा के महात्म्य को समझने के लिए हमें तत्कालीन धार्मिक-सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों पर विचार करना होगा।

कश्मीरी हिन्दूओ का नरसंहार और 31 साल का इंतजार

19 जनवरी 1990 का वो दिन कोई भी कश्मीरी हिन्दू कभी नहीं भूल सकता। 19 जनवरी 1990 का वो दिन न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक काला दिन है।

धार्मिक आतंकवाद

समाज का एक धड़ा है जो कि शकुनि और मंथरा से भी लाखों गुना कपटी और क्रूर है, जो धर्मनिपेक्षता, उदारवादिता और बुद्धिजीविता का नक़ली मुखौटा लगाये आपकी मानकिसकता पर क़ब्ज़ा कर आपके आत्मसम्मान और पहचान को अपंग बनाये बैठा है।

Tale of India’s greatest test victory in Australia

Finally the Indian flag hung around one of the unbreached fortresses at Gabba. The haughtiness which Australians displayed on the field was put down to dust by fearless Indians.

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Daredevil of Indian Army: Para SF Major Mohit Sharma’s who became Iftikaar Bhatt to kill terrorists

Such brave souls of Bharat Mata who knows every minute of their life may become the last minute.

गुप्त काल को स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है

एक सफल शासन की नींव समुद्रगप्त ने अपने शासनकाल में ही रख दी थी इसीलिए गुप्त सम्राटों का शासन अत्यधिक सफल रहा। साम्राज्य की दृढ़ता शांति और नागरिकों की उन्नति इसके प्रमाण थे।

5 Cases where True Indology exposed Audrey Truschke

Her claims have been busted, but she continues to peddle her agenda

Taj Mahal Secrets (part-2)

Some unexplainedfacts of Taj Mahal

Girija Tickoo murder: Kashmir’s forgotten tragedy

her dead body was found roadside in an extremely horrible condition, the post-mortem reported that she was brutally gang-raped, sodomized, horribly tortured and cut into two halves using a mechanical saw while she was still alive.