Monday, October 18, 2021
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aryaninnag

An Advocate with 15+ years experience. A Social worker. Worked with WHO in its Intensive Pulse Polio immunisation movement at Uttar Pradesh and Bihar.

उन्होंने इतिहास से कुछ नहीं सिखा, जो भाइचारे की बात करते हैं

हमारे शस्त्रों में ये स्पष्ट रूप से कहा गया है कि "धर्मो रक्षति रक्षितः" अर्थात तुम धर्म की रक्षा करो, धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा। इसे इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है कि "धर्म की रक्षा करो, तुम स्वतः रक्षित हो जाओगे।

तुम जितना देते हो उसका सौ गुना गउ माता लौटा देती है

दोस्तों अभी कुछ दिनों पूर्व हि इलाहबाद ऊच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए गउ माता कि हत्या को अपराध कि श्रेणी में रखा और टिप्पणी कि कोई कैसे गउ माता को खाने के बारे में सोच सकता है।

श्री एस जयशंकर जैसा सपूत और श्री नरेंद्र मोदी जी जैसा जौहरी

इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान सरकार ने चुनाव, धार्मिक आयोजनों और विरोधों के साथ आगे बढ़ते हुए, प्रसार में जोड़ा लेकिन, भारत को ग्लोबली सिंगल आउट क्यों किया गया..?

आखिर ये विधर्मी हिन्दुओं/सनातन धर्मियों से इतनी नफरत क्यों करते हैं

अपना वाला पशुत्व वो सनातनधर्मियों में भी ढूँढने का प्रयास करते हैं और जब असफल हो जाते हैं तो नफरत से वशीभूत होकर कभी मिथ्या अपवंचना करके सनातनधर्मियों को बदनाम करने का प्रयास, कभी उनके देवी देवताओं की भद्दी तस्वीरें बनाकर उनको भड़काने का प्रयास या फिर उनके देवी देवताओं, आराध्यों, उनकी संस्कृति, भाषा, सभ्यता को अपमानित करने का प्रयास करते रहते हैं।

आखिर विपक्षि नेता हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी से चीढते क्योँ हैं?

दुष्ट व्यक्ति दूसरे की उन्नति को देखकर जलता है वह स्वयं उन्नति नहीं कर सकता । इसलिए वह निन्दा करने लगता है और यही कार्य आज ये विपक्षि मिलकर कर रहे हैं।

भारत का मिशन देवीशक्ति

ये तथ्य भी किसी से छुपा नहीं है की हजारो निर्दोष भारतीयों के हत्यारे मौलाना मसूद अजहर ने तालिबान के सबसे बड़े आतंकी मुल्ला बिरादर से मुलाकात की है काबुल में फैले तलबानी अँधेरे में और इस मुलाकात का एक मात्र मकसद है, तालिबान की सहायता से भारत के कश्मीर में एक बार पुनः आतंकवाद का भयानक तांडव करना।

जातिगत जनगणना एक और अभिशाप

सनातनधर्मीयों को जाती पाती में बाँट कर राज करने की कला।

देवबंदी विचारधारा: तालिबान

तालेबान आन्दोलन को सिर्फ पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ही मान्यता दे रखी थी। अफगानिस्तान को पाषाणयुग में पहुँचाने के लिए तालिबान को जिम्मेदार माना जाता है।

न्यायालय या कानून के आधार पर फैसले देने वाले सरकारी कार्यालय

हर आदमी ये सोचता है कि न्यायालय से उसे न्याय मिलेगा परन्तु क्या न्यायालय कि शरण में जाने पर उसे वाकई न्याय मिलता है या फिर न्याय कि आस में वर्षो न्याय के दरवाजे पर दस्तक देते देते उसकी उमर निकल जाती है पर उसका केस उसके मरने के बाद भी जिंदा रहता है और कोर्ट या अदालतो में वैसे हि अकारण तारीखें पड़ती रहती हैं।

बच्चे बने जिहादियों के नए हथियार: बुर्किना फासो

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक १२ वर्ष का बच्चा जो शायद ८ वी कछा का छात्र होगा, वो अपने हांथो में भयानक हथियार लेकर एक गाँव में घुसे और अपने समान जीवित लोगों पर गोलीयाँ बरसाते हुए मारने लगे। उस बच्चे कि मानसिक स्थिति क्या होगी?

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