Monday, May 16, 2022

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Ravish Kumar and his Prime Time

Shameless Ravish Kumar’s Prime Time on inflation

During, Modi govt's 1st term, Journalists like Ravish Kumar were at least pretending to be neutral and were making efforts to cover up their misdemeanors; were furthering their agendas discreetly. Now, they have got the audacity to showcase their biased journalism without any shame, they do it right in your face, staring in your eyes and if you blink.

आबादी: समस्या या बहाना?

जब सीमित संसाधनों वाले भारत देश को विकास की तरफ ले जाना था, तो जहां इंदिरा गांधी ने 'हम दो हमारे दो' की बात की, जिससे आबादी की बढ़ोत्तरी में कमी आए, तब उत्तर भारत के वामपंथी सोच के तथाकथित सोशलिस्ट नेता अपने-अपने वोट-बैंक के लिए 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी (संसाधन लेने में, टैक्स भरने में नहीं)' का राग अलाप रहे थे।

आरोग्य सेतू एप पर रवीश की प्राइम टाइम (व्यंग्य)

जहां देश कोरोना के संकट से जूझ रहा था, मजदूर भूख से तड़प रहे थे, दिहाड़ी मजदूर दूसरे प्रदेशों में फंसे होने के कारण आत्महत्या करने को विवश थे और प्रधानमंत्री मंत्री लोगो को अपने मोबाइल में app install करने को विवश कर रहे थे। क्या यही लोकतंत्र है..??

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